CM योगी के आदेश के बाद भी जलकल विभाग के भ्रष्ट बाबू का लखनऊ से नहीं टूटा मोह

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस की नीति को जलकल विभाग के एक रसूखदार अधिकारी ने शायद हवा में उड़ा दी है। कहानी है लखनऊ के जलकल विभाग के अधिशाषी अभियंता सचिन यादव की, जिन पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं।
सत्ताधारी पार्टी के मंत्रियों और विधायकों की शिकायत पर, खुद मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद, उन्हें 19 सितंबर 2025 को लखनऊ से हटाकर प्रयागराज स्थानांतरित कर दिया गया था। आदेश स्पष्ट था, स्वत: कार्यमुक्त होकर नए स्थान पर ज्वाइन करना है।
दस दिन बीत चुके हैं, लेकिन जनाब सचिन यादव अब भी लखनऊ की कुर्सी पर जमे हुए हैं। बड़ा सवाल जलकल विभाग के जीएम कुलदीप सिंह पर है, कि आखिर वह किस दबाव में मुख्यमंत्री के आदेश को लागू करने से हिचक रहे हैं?
सूत्रों की मानें तो यह सिर्फ कुर्सी का मोह नहीं है, बल्कि फाइलों का खेल है। चर्चा है कि बड़े पैमाने पर फाइलें निपटाने का काम चल रहा है, ताकि सचिन यादव के कार्यकाल में हुए बड़े भ्रष्टाचार का पर्दाफाश न हो सके। आशंका है कि वर्ष 2025-26 के जनहित के बजट में हुए कथित खेल की लीपापोती की जा रही है।
अगर नियम-विरुद्ध तरीके से रोके गए इस अधिकारी के कार्यों की गहन जांच होती है, तो जलकल विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। सवाल यह है कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद लखनऊ का यह मोह आखिर कब टूटेगा?



