पंचायतों को पूर्ण अधिकार नहीं मिले तो पंचायत प्रतिनिधि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर सामूहिक इस्तीफा देंगे : सुनील सिंह

हापुड़ : लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व एमएलसी चौधरी सुनील सिंह बतौर अतिथि के तौर पर हापुड़ में पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन कार्यक्रम में पहुंचे , जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व एमएलसी चौधरी सुनील सिंह ने सर्वप्रथम समस्त पंचायत प्रतिनिधियों को पूर्ण अधिकार मिलने को लेकर 2 अक्टूबर को सामूहिक इस्तीफा देने के लिए सरकार को चेताया है, इसी के साथ चौधरी सुनील सिंह ने कहा जैसा कि आपको ज्ञात है कि राष्ट्रीय पंचायतीय राज संगठन त्रिस्तरीय पंचायतीय राज संस्थानों एवं ग्राम सभाओं को सषक्त बनाते हुये उन्हे प्रषासनिक एवं वित्तीय अधिकार दिलाने के लिए सन् 1997 से संघर्शरत है।आजादी के बाद आज तक सरकारों पर सरकार और चेहरे पर चेहरे बदलते रहे हैं लेकिन गाॅंव और पंचायतों की स्थिति आज भी बदहाल है, क्योंकि कोई भी सरकार पंचायतों को उनके पूर्ण अधिकार सौपना नहीं चाहती। गांधी जी के सपनों का भारत बनाने के उद्देष्य से संविधान का 73वां तथा 74वां संषोधन वर्श 1993 में किया गया था और उसको लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर छोड़ दी गई थी। परन्तु आज 32 वर्शो वाद भी न तो पंचायतों को उनके पूर्ण अधिकार दिये गये और न ही कोई सरकार देना चाहती है। पंचायत प्रतिनिधि 90-95 प्रतिषत वोट पर चुनकर आता है जिसे ग्राम की जनता ने बडे विष्वास से चुना, परन्तु बड़ा ही दुःख का विशय है कि सरकार उनको उनका अधिकार देना ही नहीं चाहती। इतने सालों के बाद भी आज तक सत्ता के विकेन्द्रीकरण हेतु पंचायतों को वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार नहीं सौपे गये। इन वर्शों में विभिन्न राजनैतिक दलों में भाजपा और कांग्रेस की सरकारे रहीं, लेकिन विधायकों एवं नौकरषाह ने पंचायतों के अधिकारों का अतिक्रमण करते हुये 29 विभागों के अधिकार पंचायतों को नहीं सौप पाये।
हमारे संगठन द्वारा पचंायतों को उनके प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार दिलाने के लिए अनेकों बार धरना प्रदर्शन, भूख हड़ताल आदि कर कुछ अधिकार तो दिलाये परन्तु आज भी पंचायतों को उनके पूर्ण अधिकार नहीं मिल पाये हैं। चैधरी सुनील सिंह ने सभा को सम्बोधित करते हुये सरकार से मांग की है कि सभी प्रधान, बी.डी.सी., सभासद व जिला पंचायत सदस्यों को भी प्रति माह मानदेय एंव भत्ते विधायक एवं सांसदो की तर्ज पर दिये जाये, नही तो सभी के भत्ते बंद कर दिये जाये। अगर विधायक व सांसद के मानदेय व भत्ते सरकार बंद कर दे तो प्रधान, बी.डी.सी. को भी कोई भत्ता नहीं चाहिए। परन्तु अगर देष व प्रदेष की सरकार विधायक व सांसद को भत्तों के नाम पर प्रदेष व देश की जनता का पैसा बांट रही है तो उसी अनुपात में सभी पंचायत प्रतिनिधियों को भी भत्ता मिलना चाहिए।एक बार सांसद व विधायक बनने पर पूरी उम्र पेंशन मिलती है परन्तु कोई प्रधान या बी.डी.सी पूरी उम्र भी पद पर रहे तो उन्हे कुछ नही मिलता। या तो सभी सांसदो, विधायकों के भत्ते, पेंशन बंद कर दिये जाये नही ंतो सभी को भत्ते व पंेशन दिलाने की आवाज संगठन द्वारा उठाते रहेगें। विधान परिशद में पंचायतों के प्रतिनिधियों द्वारा 36 विधान परिशद सदस्य चुने जाते है जिनके उद्देश्य पंचायतों के हितों की बात करना है, परन्तु हमारा दुर्भाग्य है कि जो सदस्य चुनकर जाते है वह भा.ज.पा., ब.स.पा., स.पा., कांग्रेस पार्टी में बंधकर रह जाते है। आप पंचायत प्रतिनिधि किसी पार्टी के एहसान से नहीं बल्कि अपनी काबिलियत पर चुने जाते है। समय आने पर सही व्यक्ति को चुनकर अपना प्रतिनिधित्व बनाये जो आपके हितों की लडाई लड़ सके। सिंह ने वादा किया कि लोकदल सरकार बनने पर
गेहूं,बाजरा,और धान पर समर्थन मूल्य चार हजार रुपए प्रति कुंतल देने का काम करेगा, और 60 रुपए प्रति लीटर टैक्स फ्री डीजल देने का भी काम करेगा। इस सम्मेलन की अध्यक्षता जीत सिंह ने की । और संचालन अमित भड़ाना,हरीश हुंड ,प्रदीप हुड्डा, संदीप मावी ,सदन चौधरी,फरीद कलाल ,बाबू सलमान ,संदीम तोमर ,नीरज मावी आदि सैकड़ों प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य उपस्थित थे।


