भारत को एकता के सूत्र में बाँधने का सबसे मजबूत तंतु है साहित्य : गजेंद्र सिंह शेखावत
एशिया के सबसे बड़े साहित्योत्सव का शुभारंभ

नई दिल्ली। साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित किए जा रहे एशिया के सबसे बड़े साहित्योत्सव का आज विधिवत उद्घाटन भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया। साहित्योत्सव 2025 का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को एकता के सूत्र में बांधने वाला सबसे मजबूत तंतु साहित्य है। उन्होंने भारत के साहित्य की गतिशीलता और जीवंतता को उसकी विशेषता बताते हुए कहा कि तकनीक के समय में अनुवाद के जरिए हमारा साहित्य अब वैश्विक होने लगा है। अब उस पर चर्चा प्रारंभ हो गई है। पूरी दुनिया का भारत को देखने का नजरिया बदला है। आगे उन्होंने भारतीय साहित्य को जीवन को सही दिशा देने वाला मानते हुए कहा कि इसकी भूमिका हर काल और परिदृश्य में प्रासंगिक रही है और आगे भी रहेगी। यह भारत की मनीषा ही है जिसने अपनी पुरातनता को सदा नवीन बनाए रखते हुए यथार्थ से साक्षात्कार कर अनेक समस्याओं के निदान दिए हैं।
इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव अमृता प्रसाद साराभाई भी उपस्थित थीं। प्रारंभ में गजेंद्र सिंह शेखावत ने रिबन काटकर और दीप प्रज्वलित कर साहित्य अकादमी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस वार्षिक प्रदर्शनी में चित्रों तथा लेखों के विवरण से विगत वर्ष की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है।
साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने मंत्री महोदय का स्वागत शाल, पुस्तक और पुष्प देकर किया। अपने स्वागत वक्तव्य में सचिव ने अकादमी की पिछले वर्ष की उपलब्धियों के बारे में कहा कि साहित्य अकादमी ने पिछले वर्ष 484 किताबें सामने लाने के संग 459 कार्यक्रम आयोजित किए।
साहित्योत्सव के पहले दिन आज 20 विभिन्न कार्यक्रमों में एक सौ से अधिक लेखकों ने सहभागिता की। कुछ महत्वपूर्ण कार्यक्रम थे आदिवासी कविता एवं कहानी-पाठ और पैनल चर्चा। भारतीय साहित्य में नदियाँ, भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र की लोक संस्कृति, भारत की साहित्यिक कृतियों में लुप्त होता ग्रामीण समाज आदि विषयों पर भी विधिवत वक्तव्य दिए गए। अनेक सत्रों में बहुभाषी कविता और कहानी के पाठ किए गए। साहित्यप्रेमी श्रोताओं ने कहा कि सही मायनों में यह भारतीय भाषाओं का समग्र उत्सव है।
कल साहित्योत्सव का मुख्य आकर्षण साहित्य अकादमी पुरस्कार 2024 अर्पण समारोह, कमानी सभागार में शाम 5 बजे होगा। इस पुरस्कार-अर्पण समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात अंग्रेज़ी नाटककार महेश दत्तानी होंगे। पुरस्कार समारोह के बाद प्रख्यात बाँसुरी वादक राकेश चौरसिया द्वारा बांसुरी वादन तय है।
साहित्योत्सव 2025 के प्रथम दिन गोदावरी सभागार में ‘भव्य पुष्पक्रम : आदिवासी कविता-पाठ’ का आयोजन हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता प्रतिष्ठित साहित्यकार हरिराम मीणा ने की। इस सत्र में टीएचडी चुङबोई चिरू (चिरू) नसीम अख़्तर (गोजरी)
सम्प्री किमी फाङचो (कार्की) खानपो कोंचोक रिग्ज़ेन (लद्दाखी) अनीता कोंवर (तिवा) ने अपनी कविताओं का अपनी मूल भाषा में और उसके बाद उसका अर्थ बताते हुए हिंदी या अंग्रेजी में अनुवाद प्रस्तुत किया। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में हरिराम मीणा ने आदिवासी कविता की विशिष्टता को रेखांकित करते हुए कई विशेष गुणों का उल्लेख किया। इन सभी कविताओं में प्रकृति, पशु और मानवीय संबंध आदि का सुंदर रूप देखने को मिला।



