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रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों व सम्मान समारोह के साथ मनायी गयी पद्मश्री योगेश प्रवीन जी की जयन्ती

लखनऊ : “जीते जी याद रहे सबको, मरके भी याद आऐंगे। न तुम हमें भूल पाओगे न हम तुम्हे भूल पाऐंगे। लखनऊ हम पर फिदा हम फिदाए लखनऊ क्या हस्ती आसमां की जो हमसे छुड़ाए लखनऊ, इन शेरों के साथ पद्मश्री योगेश प्रवीन जी की जयन्ती कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष के. सरन द्वारा किया गया।

सर्वप्रथम गायिका शक्ति श्रीवास्तव ने सरस्वती वन्दना की उसके पश्चात रेडियो दूरदर्शन कलाकार कुसुम वर्मा के निर्देशन में बाल कलाकार स्वरा त्रिपाठी ने गणेश स्तुति एवं उन्नति श्री ने भरतनाट्यम की बहुत सुन्दर नृत्य प्रस्तुति दी। शक्ति जी के ही निर्देशन में बेबी डिमायरा तायल और साम्भवी सूर्यवंशी ने भी अपने भावपूर्ण नृत्यों से सबका मन मोह लिया।


मुख्य अतिथि प्रसिद्ध साहित्यकार पद्मश्री डा. विद्या विन्दु सिंह ने योगेश जी के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रृद्धांजलि देकर याद करते हुए बताया कि योगेश प्रवीन जी की प्रसिद्ध पुस्तक “कंचनमृग” की भूमिका लिखते समय वह कैसे अभिभूत हो गई थीं। “पद्मश्री डा. योगेश प्रवीन परिवार” नामक फेसबुक ग्रुप के माध्यम से योगेश प्रवीन जी द्वारा लिखित साहित्य और इतिहास को आगे बढाने के लिए शिद्दत से जुटे ग्रुप एडमिन के. सरन ने कहा कि गद्य और पद्य पर बराबर नियंत्रण रखने वाली अपनी कलम से, लखनऊ को दुनियां के सामने अपनी वास्तविक विशेषताओं के साथ पेश करने के लिए, योगेश जी ने दर्जनों पुस्तकें लिखीं थीं। उन्हीं में से एक “लखनऊ नामा” के लिए उन्हे पद्मश्री से अलंकृत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही उ. प्र. हिन्दी संस्थान की प्रधान सम्पादक डा. अमिता दुबे ने योगेश जी लिखित रामायण पर आधारित महाकाव्य “अपराजिता” सहित उनकी सभी रचनाओं का संक्षिप्त स्वरूप “सृजन के सोपान” नामक पुस्तक जिसका विमोचन खुद योगेश जी ने किया था के बारे में बताते हुये योगेश जी को आलराउंडर और लखनऊ का इनसाइकिलोपीडिया बताया। उन्होने प‌द्मश्री डा० योगेश प्रवीन की यादों को लखनऊ वासियों के दिलों में जीवित रखने के लिए ग्रुप के एडमिन के. सरन की सराहना करते हुए बताया कि योगेश जी के निधन के बाद उनके चित्र को भारत और विश्व प्रसिद्ध साहित्यकारों के हिन्दी संस्थान में लगे चित्रों के मध्य स्थापित करने के लिए अथक प्रयास किया और सफलता पाई। आज योगेश जी यहां विश्व प्रसिद्ध हिन्दी विद्वानों के मध्य स्थापित हैं। संरक्षक सेवा निवृत्त जस्टिस राघवेन्द्र कुमार ने भी के. सरन द्वारा पद्मश्री योगेश प्रवीन ग्रुप द्वारा 84वीं जयन्ती के अवसर पर उर्दू एकेडेमी में उपमुख्य मंत्री बृजेश पाठक से मांग की थी कि रकाबगंज चौराहे का नाम योगेश प्रवीन चौराहा रखा जाय और उनके तथा क्षेत्रीय सभासद के प्रयासो से यह कार्य भी सम्पन्न हो गया।

विशिष्ट अतिथि सुशील दुबे, पत्रकार ने कहा कि योगेश प्रवीन जी ने लखनऊ इतिहास और साहित्य के लिए क्या नहीं किया? वह इतिहासकार के साथ साहित्यिकार, कथाकार, पटकथाकार, उपन्यासकार, कवि, गीतकार सभी तो थे। इस अवसर पर योगेश जी के छोटे भाई कामेश श्रीवास्तव भी उपस्थित थे। उन्होने योगेश जी की व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला ।

जयन्ती कार्यक्रम और योगेश जी लिखित गीत संगीत कार्यक्रम के विजेताओं को पुरस्कार वितरण एवं लखनऊ के गणमान्य अतिथियों को सम्मानित करने की पूरी जिम्मेदारी संभाल रही. मुख्य संयोजिका एवं आकाशवाणी अनुमोदित गायिका शक्ति श्रीवास्तव ने संस्था द्वारा वर्ष 2023-24 में योगेश प्रवीन जी लिखित गीत गजल को अपने सुरों में ढाल कर ऑनलाइन प्रस्तुत करने ‘वाले लखनऊ के आकाशवाणी गायकों की प्रतियोगिता पूरे वर्ष प्रत्येक माह के अंतिम शनिवार को कराई थी जिसका पुरस्कार वितरण भी आज समारोह में किया गया। सीनियर और जूनियर ग्रुप के प्रथम द्वितीय व तृतीय विजेता गायिकाओं नवनीता जाफा, सुषमा प्रकाश, राशी श्रीवास्तव, काजल अग्रहरि, कीर्ति श्रीवास्तव सहित अमित श्रीवास्तव, नवनीत भसीन, कुसुम वर्मा, अमितेश
श्रीवास्तव आदि कलाकारो को भी ट्राफी और अंग वस्त्र तथा प्रमाण पत्र देकर योगेश प्रवीन लिखित गीत गजल गायन पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया। मंचासीन प्रमुख लोगों सहित अति विशिष्ट अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित-वरिष्ठ साहित्यकार डा. अनिल मिश्रा, सत्य प्रकाश दरवारी, एडवोकेट मनोज लाल, संजीव वर्मा, अधिवक्ता आलोक सरन, डा. कमलेश नारायण और सरसिज कुमार त्रिवेदी, प्रेम कुमार आनन्द के अतिरिक्त 95 वर्षीय गुरू जी निर्मल कुमार को भी मोमेंटो और अंग वस्त्र ओढ़ा कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में लखनऊ वासी और पद्मश्री के. पी. सक्सेना की नातिन और वर्तमान में स्विट्जरलैंड मे रह रही सुप्रसिद्ध कवियत्री नेहा वर्तिका को सर्वश्रेष्ठ विदेशी सदस्य का पुरस्कार दिया गया जो उनके अभिभावक ने प्राप्त किया। सम्पूर्ण कार्यक्रम का कुशल संचालन पूनम हिम्मत अद्वितीय व मंच संचालिका दीपिका श्रीवास्तव ने किया।

लखनऊ के तमाम कवि कवयित्री और लेखक तथा वरिष्ठ नागरिकों जिनमें योगेश प्रवीन काव्य मंच की ऑनलाइन प्रस्तोता निवेदिता निवि, सुधाराज बोधवी, डा. किरन दयाल, डा. कमलेश नारायण, प्रेम कुमार आनन्द, प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी, सरसिज कुमार त्रिवेदी अतुल आदि को भी योगेश प्रवीन जी की रचनाओं को फेसबुक के माध्यम से प्रचारित प्रसारित करने के लिए सम्मानित किया गया।

अंत में आयोजक के. सरन ने योगेश जी के जयन्ती कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आगन्तुक अतिथियो का धन्यवाद किया।

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