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वजीरे सल्तनत की सरपरस्ती में फलता फूलता भ्रष्टाचार : डॉ. सम्पूर्णानंद मल्ल

सत्याग्रह संकल्प के 12वें शतक पर गरजे सत्याग्रही

गोरखपुर। 13 जुलाई 2021 से रफ्ता रफ्ता सत्याग्रह संकल्प का बढ़ता कारवां आज 12 वें शतक को पार करता नजर आ रहा है।

यह एक ज्वलंत विषय के रूप में उभर रहा है, हर एक शख्स इस बात को सोचने पर विवश है कि आखिर भ्रष्टाचार पर शासकीय तंत्र की खामोशी और नजर अंदाजी अब तक क्यों है?
क्या शासकीय तंत्र में बैठे शासकों का भ्रष्टाचारियों के साथ चोली दामन का तो साथ नही?
आखिर वजह का क्या है कि लोकहित में तीसरी आंख मानव अधिकार संगठन द्वारा प्रचलित सत्याग्रह संकल्प के 12 वें शतक के उपरांत भी भ्रष्टाचार के आगोश में डूबे अभियंता आज भी बेखौफ भ्रष्टाचार का तांडव करने में मशगूल हैं।
अब सवाल यह उठता है कि शासकीय तंत्र पर प्रशासकीय तंत्र भारी है या भ्रष्ट प्रशासकीय तंत्र के भ्रष्टाचार में शासकीय तंत्र भागीदार है।
आज 1200 दिनों से यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है कि प्रधान लेखाकार व महालेखा परीक्षक के वार्षिक लेखा परीक्षण रिपोर्ट में उजागर हुए भ्रष्टाचार पर शासकीय तंत्र निष्क्रिय और खामोश क्यों है।
उक्त के क्रम में आज तीसरी आंख मानव अधिकार संगठन द्वारा 12 वें शतक के अवसर पर बेखौफ मगरूर बेगैरत शासकीय तंत्र को आगाह करने के उद्देश्य से प्रचलित सत्याग्रह स्थल मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग गोरखपुर कार्यालय के मुख्य द्वार पर वैचारिक प्रतीकात्मक प्रतिकार व्यक्त करने हेतु आयोजित कार्यक्रम में शहर के संभ्रांत और प्रतिष्ठित एवं शिक्षित गणमान्य व्यक्ति के रूप में पूर्वांचल के गांधी कहे जाने वाले डॉ. संपूर्णानंद मल्ल ने कहा कि व्यवस्था में बैठे व्यवस्था के पोशाक गूंगे बहरे हो गए हैं? 1200 दिनों से प्रचलित सत्याग्रह संकल्प दिखाई सुनाई नहीं दे रहा है, किस भाषा में किस भाषा में सुनना चाहते हैं और किस नजरों से देखना चाहते वे बताएं हम उन्हें उसी नजरों से दिखाएंगे और उसी भाषा में समझायेंगे। उन्होंने कहा कि अहिंसात्मक आंदोलनकारियों की दमन करने की कुचेष्टा न करें वरना मैं उन्हें सबक सिखाने से बाज नहीं आएंगे।
उक्त के क्रम में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष व संगठन के संरक्षक डॉ जेपी नायक ने शासकीय प्रशासकीय तंत्र के अब तक की उदासीनता पर तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सत्ता में बैठे मगरूर बेखौफ शासक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का कत्ल करने पर आमादा हैं और शासन सत्ता को अपनी जागीर समझ रखे हैं।
प्रतीकात्मक प्रतिकार के क्रम में शिवसेना के प्रदेश महामंत्री लल्लन दुबे ने कहा कि कथित जीरो टॉलरेंस का नारा देने वाली सरकार सर से पांव तक भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबा है, सरकारी उपक्रम व्यावसायिक प्रतिष्ठान का रूप धारण कर चुके हैं और आम जन आर्थिक उपयोग की वस्तु बन चुका है। जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त किया जाना लोकतंत्र में संभव नहीं है।
उपरोक्त के क्रम में संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तबस्सुम ने कहा कि वर्तमान सत्तासीन शासक प्रशासक अंग्रेजी दमनकारी नीति को धारण कर चुके हैं और आमजन को अपने भौतिक पिपासा की पूर्ति के लिए कोपभाजन का शिकार बनाने पर तुले हुए हैं जिसका परिणाम भविष्य में गंभीर होंगे।
जिससे भ्रष्ट व्यवस्था को अंग्रेजी कार्यकाल के अंत से सीख लेनी चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में सत्याग्रह स्थल पर आए सभी अतिथियों का संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार मिश्र ने आभार व्यक्त करते हुए आश्वस्त किया कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रचलित सत्याग्रह संकल्प निष्कर्ष परिणाम तक जारी रहेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित ध्रुव नारायण सिंह, रामचंद्र दुबे, संतोष गुप्ता, पवन गुप्ता, चंद्रप्रकाश मणि, वीरेंद्र वर्मा, राजेश्वर पांडे, शमशेर जमा खान, सुधीर पांडेय,
सतीश कुशवाहा, अजय जायसवाल व अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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