विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल की 98वीं जयंती पर अशोक सिंघल स्मृति न्यास की ओर से काव्य गोष्ठी आयोजित

लखनऊ। स्वामी विवेकानंद के उद्घोष ‘ गर्व से कहो हम हिंदू हैं ‘ को जन जन का स्वर बनाने वाले विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अध्यक्ष रहने वाले अशोक सिंघल जी की 98वीं जयंती पर काव्यांजलि का आयोजन किया गया। गोमतीनगर स्थित सीएमएस स्कूल के सभागार में इस अवसर पर प्रसिद्ध कवियों ने काव्यपाठ किया.
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने कहा कि अशोक सिंघल जी के जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि जीवन में लक्ष्य बना लेने के बाद उसकी पूर्ति ही मिशन बन जाता है।
कार्यक्रम के आरंभ में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक नरेंद्र भदौरिया ने कहा कि भारत माता के अनन्य पुजारी एवं हिंदुत्व को आंदोलन बनाने वाले सिंघलजी की जयंती पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करने के साथ ही उन्होंने राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण में सिंघल जी के प्रयासों का वर्णन किया। इसके उपरांत अशोक सिंघल स्मृति न्यास की ओर से आयोजित इस काव्यांजलि को गति देते हुए शिखा भार्गव ने अशोक सिंघल के बारे में कहा कि लखनऊ आगमन पर वह न्यास के ट्रस्टी भार्गव जी के घर पर ही ठहरते थे। उनकी मधुर स्मृति के बारे में उन्होंने कहा कि लखनऊ आगमन पर वह उनके घर पर ही सभाओं का आयोजन करते थे। देर रात तक पुस्तकें पढ़ते थे। न्यास की संरक्षक अचला भार्गव एवम लखनऊ की लोकप्रिय पूर्व महापौर संयुक्ता भाटिया हैं। इसी के बाद उन्होंने सिंघल जी को श्रद्धांजलि देते हुए एक मार्मिक कविता का पाठ किया।
मुख्य अतिथि चंपत राय ने कहा कि जीवन में लक्ष्य तय कर लेने के बाद उसे सफल करने के लिए प्रयास करने की प्रेरणा और उसे सफल होते देखने की प्रेरणा हमें सिंघलजी के जीवन से मिलती है। अशोक जी एक साधारण मनीषी होने के बाद भी असाधारण कार्य करने में सफल रहे। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वेत वस्त्र धारण करने वाले सिंघलजी का जीवन सादगी की मिसाल थी। उन्होंने देश में बड़े-बड़े कई कार्य किए, वह भी कानपुर में मात्र एक तख्त बराबर कमरे में रहते हुए। ऐसे समाजसेवी के जीवन से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
तदोपरांत, अयोध्या के संत कमल नयनदासजी ने कहा कि सिंघलजी की इच्छाशक्ति दृढ़ थी। उन जैसे महापुरुष अपने संकल्प से जनमानस की सेवा करते हैं। राम मंदिर का स्वप्न साकार करने के लिए उन्होंने जीवन खपा दिया।
इसके पश्चात विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश जी ने सिंघलजी के संपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए, उनके प्रयासों से भारत में हुए हिंदुत्व के उदय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वहीं, प्रसिद्ध कवि हरिओम पवार ने कहा कि मैंने एक बार सिंघल जी को भाषण देते हुए सुना था। संभव है कि उसी कारणवश मेरी कविताओं में राष्ट्रवाद का पुट मिलता है। उन्होंने कहा कि भले ही मैं संघ का कोई सक्रिय सदस्य नहीं रहा हूं लेकिन मुझे इसका पूरा विश्वास है कि संघ के ऐसे ही महान मनीषियों के चलते आज भी हमारे देश में संस्कृति संरक्षित है। इसके बाद उन्होंने अपने परिचय के अनुरूप ही वीर रस की कविता पढ़ते हुए कश्मीर का स्वप्न देखना बंद करो…काव्य का पाठ कर श्रोताओं को जोश से भर दिया।
इस अवसर पर कवि जगदीश मित्तल, व्यासजी, प्रमोद द्विवेदी, अतुल नारायण, बौखल जी एवं सोनी मिश्र ने अपनी रचनाओं से सबका हृदय जीत लिया।
कार्यक्रम में महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, अवध प्रांत प्रचारक कौशल जी, महापौर सुषमा खर्कवाल, लखनऊ की पूर्व मेयर संयुक्ता भाटिया, दिनेश जी, मनोजकांत, विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र संगठन मंत्री गजेंद्र सिंह, सूचना आयुक्त पीएन द्विवेदी, आरएसएस के सह प्रांत प्रचारक संजय जी, अपर महाधिवक्ता विमल श्रीवास्तव, मीनाक्षी परिहार, सिंधी आयोग के उपाध्यक्ष नारदचंद, जिए एडवोकेट बीके सिंह आदि ने अपनी उपस्थिति से काव्यांजलि को यादगार बना दिया।



