उ.प्र. मिनिस्ट्रीयल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ का 22 सूत्रीय मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना आयोजित
लखनऊ में प्रान्तीय अध्यक्ष सुशील कुमार त्रिपाठी ने किया धरने का नेतृत्व

लखनऊ। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उ.प्र. मिनिस्ट्रीयल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ का एक दिवसीय धरना गांधी प्रतिमा हजरतगंज लखनऊ में प्रान्तीय अध्यक्ष सुशील कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ, जिसमें प्रदेश के लगभग 57 जनपद शाखाओं के अध्यक्ष / मंत्री व अन्य कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया।
धरने को सम्बोधित करते हुए प्रान्तीयअध्यक्ष सुशील कुमार त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि 22 सूत्रीय मांगो में से प्रमुख मांगे जैसे कलेक्ट्रेट कार्यालय को विशेष प्रतिष्ठा प्रदान करते हुए कार्मिकों का देतन उच्चीकृत करने, कलेक्ट्रेट लिपिक संवर्ग सेवा नियमावली 2011 पूर्ववत लागू करने, लेखा का कार्य संपादित करने वाले पटल सहायकों को लेखा संवर्ग का वेतनमान दिये जाने, नवसृजित जनपदों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं नवसृजित तहसीलों में प्रशासनिक अधिकारी का पद सृजित किये जाने, भूलेख लिपिक का पद पूर्व की भांति कलेक्ट्रेट में वापस किये जाने, सामयिक सहायक वासिल वाकी नवीसों को रिक्त पदों के सापेक्ष एक मुश्त शत-प्रतिशत समायोजित किये जाने आदि प्रकरणों में विभागाध्यक्ष / अध्यक्ष राजस्व परिषद उ.प्र. की संस्तुति हो जाने के उपरान्त भी अभी तक शासनादेश निर्गत न करने से कर्मचारियों में काफी कुण्ठा व्याप्त है, जिससे उनकी आर्थिक व मानसिक क्षति हो रही है। शासन द्वारा सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिये बार-बार कार्मिकों को समय से पदोन्नति का शासनादेश निर्गत किया जाता है,
किन्तु सेवा नियमावली में प्रदत्त व्यवस्था के तहत प्रशासनिक अधिकारियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों के पदों पर पदोन्नति के लिए पात्रता क्षेत्र के विस्तार का अनुमोदन शासन एवं राजस्व परिषद द्वारा नहीं किया जा रहा है, जिससे पात्र कार्मिक पदोन्नति के लाभ से वंचित होकर सेवानिवृत्त हो जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त कलेक्ट्रेट को मिनी सचिवालय घोषित किये जाने, लिपिक संवर्ग कर्मचारियों को नायब तहसीलदार के पदों पर पदोन्नति किये जाने, पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू किये जाने, सामयिक रूप से की गयी सेवाओं को सेवा अवधि में जोड़े जाने, रिक्त पदों पर यथाशीघ्र भर्ती किये जाने, पदोन्नतियों में आरक्षित रिक्तियों में पदों की गणना के संबंध में 0.51 के स्थान एर 01 पद स्थापित किये जाने, चिकित्सा प्रतिपूर्ति को आयकर आगणन में शामिल न किये जाने, सामूहिक बीमा की धनराशि को 10.00 लाख रू० किये जाने आदि अनेकों मांगे शासन एवं राजस्व परिषद में अनावश्यक रूप से लंबित है। शासन का सबका साथ सबका विकास का नारा कर्मचारियों के प्रति खोखला साबित हो रहा है।
उपरोक्त मांगे यथाशीघ्र पूर्ण न होने पर अनिश्चितकालीन जैसे कार्यकमों को करने के लिये कर्मचारियों को विवश होना पड़ेगा, जिसका पूर्ण उत्तरदायित्व राज्य सरकार का होगा। धरने का संचालन करते हुए कार्यकारी महामंत्री अजीत उपाध्याय ने कहा कि शासन द्वारा कई बार निर्देश दिये गये कि सेवा संगठनों के साथ प्रत्येक माह शासन एवं राजस्व परिषद स्तर पर बैठक करके समस्याओं का निराकरण कराया जाय, किन्तु विगत 02 वर्षों से कोई बैठक नहीं की गयी, जिससे समस्यायें जस की तस पड़ी हैं। धरने को प्रान्तीय महामंत्री अरविन्द कुमार वर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष केन्द्रपाल सिंह, कनिष्ठ उपाध्यक्ष प्रथम जगदीश कुमार निगम, कनिष्ठ उपाध्यक्ष द्वितीय अशोक कुमार मिश्र, कनिष्ठ उपाध्यक्ष तृतीय राजीव श्रीवास्तव, प्रान्तीय संगठन मंत्री प्रथम शैलेन्द्र पटेल, प्रान्तीय संगठन मंत्री द्वितीय मुकेश कुमार, प्रान्तीय संगठन मंत्री तृतीय संजय कुमार शर्मा, प्रान्तीय कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश पाण्डेय, प्रान्तीय सम्प्रेक्षक विनय कुमार सिंह, प्रान्तीय सांस्कृतिक एवं कीड़ा मंत्री खजान सिंह, प्रान्तीय मुख्य सचेतक नरेन्द्र सिंह, प्रान्तीय प्रवक्ता नीरू सिंह, प्रान्तीय कार्यालय सचिव गोपीकृष्ण, प्रान्तीय मीडिया प्रभारी शशिभूषण तिवारी, प्रान्तीय प्रचारक दुलीचन्द शर्मा व उपस्थित सभी जनपदों के अध्यक्ष / मंत्री व जुझारू साथियों ने संबोधित करते हुए कहा कि 22 अगस्त 2024 को समस्त जनपदों में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करके मुख्यमंत्री जी को संबोधित ज्ञापन भेजते हुए यह अनुरोध किया गया कि यदि 17 सितम्बर 2024 तक मांगो का सम्मानजनक निराकरण नही किया जाता है तो पूरे प्रदेश के कर्मचारी 18 सितम्बर 2024 को गांधी प्रतिमा, हजरतगंज लखनऊ में धरना प्रदर्शन करेंगे, किन्तु सरकार द्वारा इन ज्ञापनों का कोई संज्ञान नहीं लिया गया, जिसके कारण आज राजधानी मुख्यालय पर धरना देने के लिये कर्मचारी विवश हो गया। यदि एक माह के अन्दर मांगो का सम्मानजनक निराकरण नही होता है तो अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे आन्दोलन के निर्णय के लिये विवश होना पड़ेगा।



