पद्मश्री राज बिसारिया ने प्रदेश के हिन्दी अंग्रेजी रंगकर्म को परिपक्व किया
पद्मश्री राज बिसारिया को श्रद्धांजलि देने के बाद रविवार तक के लिए स्थगित हुई थिएटर वर्कशाप

लखनऊ। थिएटर एंड फिल्म वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से प्रदेश के युवक युवतियों को रंगमंच, फिल्म और टीवी में अभिनय आदि के प्रशिक्षण के लिए सात दिवसीय थिएटर प्रोडक्शन वर्कशॉप का आयोजन हजरतगंज सप्रू मार्ग स्थित दिलीपपुर टावर, 20, ए.बी ब्लॉक तृतीय तल से सक्रिय अकादमी परिसर में 26 फरवरी 2024 से किया जाना प्रस्तावित था। इसके पहले दिन पद्मश्री राज बिसारिया को असोसिएशन की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके साथ ही वर्कशॉप को रविवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
इस अवसर पर पर अकादमी के सचिव दबीर सिद्दीकी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि रंगमंच की दुनिया में लखनऊ की पहचान पद्मश्री राज बिसारिया का निधन हो गया है। 88 वर्षीय राज बिसारिया रंगमंच और अभिनय की दुनिया में ‘राज साब’ के नाम से जाना जाता था। राज बिसारिया संस्था भारतेन्दु नाट्य अकादमी के संस्थापक निदेशक रह चुके हैं। उनसे हर रंगकर्मी को सौ फीसदी समर्पण और पूर्ण अनुशासन का गुण आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने हमेशा शौकिया रंगकर्म के बजाए प्रोफेशनल रंगकर्म को प्रोत्साहित किया और प्रशिक्षण पर जोर दिया। इसी कड़ी में वह भी रंगकर्म प्रशिक्षण के लिए समय समय पर नाट्य प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करते रहे हैं।
इस अवसर पर नव अंशिका फाउंडेशन अध्यक्ष नीशू त्यागी ने बताया कि भारत में आधुनिक रंगमंच के जनक राज बिसारिया की जन्म लखीमपुर खीरी में 10 नवंबर 1935 में हुआ था। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर भी थे। साल 1962 में लखनऊ विश्वविद्यालय में थिएटर ग्रुप बनाया वहीं साल 1966 में थिएटर आर्ट्स वर्कशॉप की स्थापना की। इस क्रम में उनकी यादगार पहल भारतेंदु नाट्य केन्द्र रही जो वर्तमान में राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतेन्दु नाट्य अकादमी के रूप में स्थापित है। अकादमी में 23 सितंबर 1975 से 10 सितंबर 1989 तक उन्होंने युवाओं में रंगकर्म के संस्कार दिये। उन्होंने हिन्दी ही नहीं अंग्रेजी नाटकों को अलग पहचान दी।
वरिष्ठ फिल्मविद् आशीष कश्यप ने कहा कि जो स्थान पद्मश्री राज बिसारिया से रिक्त हुआ है उसे भरना अंसभव लगता है। नाटकों के निर्माण के माध्यम से राज साहब ने निर्देशक और डिजाइनर के रूप में समकालीन विश्व नाटक का एक व्यापक स्पेक्ट्रम प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते थे।



