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उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश कार्यालय में संगठन के पदाधिकारियों एवं व्यापारियों ने की “प्री- बजट चर्चा”

जीएसटी के अंतर्गत सेवा सेक्टर को 5% के स्लैब में शामिल होना चाहिए

लखनऊ : उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश कार्यालय अयोध्या रोड पर संगठन के पदाधिकारियों ने “प्री- बजट चर्चा” का आयोजन किया व्यापारियों ने वित्त मंत्री से बजट पर अपेक्षाएं करते हुए पुराने एवं वर्तमान व्यवस्था के स्वरूप पर व्यापक गहन चर्चा की एवं समीक्षा की “प्री -बजट चर्चा” में संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष अविनाश त्रिपाठी, लखनऊ अध्यक्ष हरजिंदर सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. साकेत चतुर्वेदी ट्रांसगोमती प्रभारी मनीष पांडे,मोहम्मद रिजवान, ज्ञानेंद्र उपाध्याय, प्रवीण मिश्रा,अरविन्द पांडेय, दिनेश यादव, आशु अग्रवाल आदि शामिल हुए

इस अवसर पर बोलते हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता ने कहा देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए देश के परंपरागत घरेलू व्यापारियों के व्यापार को बढ़ाने की योजना बननी चाहिए तथा व्यापारियों को और अधिक मजबूत करना होगा तभी यह टारगेट प्राप्त किया जा सकता है.


उन्होने कहा बैंकों से लोन लेकर विलफुल डिफॉल्टर होने वालों पर सरकार को शिकंजा कसना चाहिये, ताकि उसका बोझ व्यापारियों और जनता को ना झेलना पड़े क्योंकि इसी वजह से बैंकों का घाटा पूरा करने के लिए ऋण की दरे बढ़ती है.

व्यापारियों ने 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में वित्त मंत्री से निम्न मांग एवं अपेक्षा की.
1.पिछले वर्ष शुरू हुए नए इनकम टैक्स स्लैब में 80 c की छूट को भी शामिल करने की मांग.

2.प्रमुख बाजारों में सीसीटीवी कैमरा योजना शुरू करने की मांग

3.जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों को 10 लख रुपए का स्वास्थ्य बीमा
अपंजीकृत व्यापारियों को ₹500000 का स्वास्थ्य बीमा दिए जाने की अपेक्षा

4.जीएसटी भुगतान पर आधारित व्यापारियों के लिए पेंशन योजना शुरू करने की मांग
5.परंपरागत व्यापारियों के व्यापार को बचाने के लिए “ई-कॉमर्स पॉलिसी” लागू करने की मांग

6.”रिटेल ट्रेड पॉलिसी” बनाए जाने की मांग
7.व्यापारियों को बैंकों से कम ब्याज दरों पर बिना सिक्योरिटी लोन उपलब्ध कराने की अपेक्षा
8.डिजिटल पेमेंट को और अधिक बढ़ावा देने के लिए डेबिट क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले शुल्क को समाप्त किया जाए
9.आयकर की दोहरी व्यवस्था को समाप्त करके सिंगल व्यवस्था ही होनी चाहिए
10. आठ लाख तक आय कर मुक्त हो
11. सी जी टी एम एस ई योजना के प्रावधानों को सरल किया जाए ताकि एम एस एम ई के अंतर्गत आने वाले उद्योगों को आसानी से ऋण उपलब्ध हो सके
12. जीएसटी प्रणाली में केवल दो दरे ही होनी चाहिए
13. जीएसटी के अंतर्गत सेवा सेक्टर को 5% के स्लैब में शामिल होनी चाहिए

 

 

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