ललित कला अकादमी में कलावार्ता के साथ नव रूप अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का समापन
वर्णाभिनय आर्ट गैलरी ने किया संयोजन

लखनऊ : ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश एवं वर्णाभिनय आर्ट गैलरी के संयुक्त तत्वावधान में नव रूप अंतरराष्ट्रीय कला प्रर्दशनी का समापन 23 दिसम्बर 2023 को नव रूप , कलावार्ता के साथ हुआ.

इस अवसर पर मुख्य वक्ता उमेश कुमार सक्सेना ( वरिष्ठ कलाकार एवम कलाविद ) , शहंशाह हुसैन ( शायर / कवि , लेखक एवम कला समीक्षक) , पूजा वर्मा ( विभाग अध्यक्ष फाईन आर्ट्स एवम फैशन , एमिटी विश्वविद्यालय), राघवेन्द्र प्रताप सिंह ( युवा नृतक एवम चित्रकार) , सुमेधा गुप्ता ( कथक नृत्यांगना, स्कॉलर एवम अतिथि प्रवक्ता भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ) थे.

कला प्रर्दशनी में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र , बंगाल के 32 कलाकार के 32 चित्र शामिल है। जिसमे वरिष्ठ कलाकार , युवा कलाकार तथा विजुअल आर्ट्स स्टूडेंट के चित्र है।

इस दौरान वर्णाभिनय आर्ट गैलरी एवम इंस्टीट्यूशन के निदेशक एम एस मंसूरी ने पौधा देकर सभी अतिथियों का स्वागत किया।

इस बीच वर्णाभिनय के नव रूप प्रदर्शनी की क्यूरेटर आरती सिंह एवम ऋषिका गिहार ने भी दोनों ही अतिथि प्रवक्ता का अभिनंदन किया । साथ ही वर्णाभिनाय के डायरेक्टर / निदेशक एम एम मंसूरी ने अतिथि एवम सभी कलाकार व कलारसिकों का स्वागत किया।

इस एग्जीबिशन की रूपरेखा को बनाने में सहायक भूमिका में जो योगदान राजेंद्र मिश्र का रहा, इसके लिए उन्हें धन्यवाद भी दिया गया ।

अतिथि प्रवक्ता वरिष्ठ कलाकार भूपेंद्र अस्थाना एवम शहंशाह हुसैन ने कलाओं के अंतर्संबंध पर मुखरता से बात रखी तथा उत्तर प्रदेश के टी जी टी के लिए सरकार द्वारा इंटरमीडिएट में आर्ट विषय पर बात की. साथ ही लाहौर के डिप्लोमा लेना का जिक्र किया और इसे हास्यास्पद बताया और लखनऊ कला महाविधालय पर बात की।

कलावार्ता में उमेश कुमार सक्सेना ने लखनऊ कला के इतिहास पर दृष्टि डाली और उसमे कॉलेज ऑफ आर्ट्स लखनऊ के योगदान , कलाओं के अंतर्संबंध पर व समकालीन समय में महिला कलाकारों की स्तिथि पर बात और इसे बेहतर बताया.

साथ ही भातखंडे को संस्कृति विश्वविद्यालय बनाए जाने पर बधाई दी और और संस्कृति विश्वविद्यालय में विजुअल आर्ट कहां है ? इसकी जानकारी ली.क्या कोई संस्कृति विश्वविद्यालय बगैर विजुअल के पूर्ण हो सकता या इस कोई संभावना है तो बताए ? तथा कला एवम संस्कृति के प्रति जागरूकता तथा भारतीय कला इतिहास में लखनऊ व उत्तर प्रदेश के कलाकार के योगदान पर बात की।

सुश्री पूजा वर्मा ने फैशन और विजुअल तथा परफॉर्मिंग आर्ट पर मिलिजुली बात की । राघवेन्द्र प्रताप सिंह जो कि विजुअल आर्ट और परफॉर्मिंग आर्ट दोनो में पारंगत है, उन्होंने दोनो विधाओं को दो नाव के रूप में बताया और कहा कि मैने दोनों नाव को जोड़कर एकबार बड़ी नाव बनाई है। दोनों कलाओं के सामंजस्य पर मुखरता से बात की और अनुभव साझा किए। इसी क्रम में सुश्री सुमेध गुप्ता ने परंपरागत नृत्य पर , मंदिरों में बने मूर्तिशिल्प tath सिन्धु सभ्यता में मिली नृत्यागना के मूर्तिशिल्प को कलाओं का अंतर्संबंध बताया और अपने अनुभवों को सरलता से साझा किया।
वार्ता में श्रीलंका एवम नेपाल के कुछ युवा कलाकार तथा लखनऊ के युवा वा वरिष्ठ कलाकार मौजूद रहे।यह उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी, केसरबाग में आयोजित यह प्रदर्शनी 18 से 23 दिसंबर तक चली.



