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लिवर सिरोसिस संग पोर्टल उच्च रक्तचाप, अपोलो के डॉक्टरों ने मरीज को बीमारी की दोहरी मार से बचाया

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने अपने ज्ञान और अनुभव से तजाकिस्तान रोगी को किया स्वस्थ

लखनऊ : अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बार फिर अपने ज्ञान और अनुभव की बदौलत बीमारी की दोहरी मार झेल रही एक महिला मरीज को नया जीवन दिया है। महिला मरीज लिवर सिरोसिस के साथ साथ पोर्टल उच्च रक्तचाप की बीमारी से ग्रस्त थी। यह एक ऐसी ​​स्थिति होती है जिसमें मरीज का लिवर क्षतिग्रस्त हो जाता है। साथ ही साथ उसकी रक्त वाहिकाओं में दबाव बढ़ने से प्रोटीन और एल्ब्यूमिन का स्तर भी तेजी से कम होने लगता है और रक्त प्रवाह बा​धित होने लगता है। इसकी वजह से पूरे शरीर में सूजन आ जाती है।

नई दिल्ली ​स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि 66 वर्षीय महिला मरीज तजाकिस्तान की निवासी हैं और पिछले काफी समय से पेट में दर्द, पैरों और टखनों में सूजन के साथ साथ भोजन निगलने में परेशानियों का सामना कर रही थीं। अलग अलग अस्पतालों में जांच कराई जहां डॉक्टरों ने लिवर प्रत्यारोपण कराने की सलाह दी। हालांकि मरीज दिल्ली ​स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के संपर्क में आईं और यहां उन्होंने डॉक्टरों से नैदानिक परीक्षण कराया।
डॉक्टरों ने बताया कि जब वह अस्पताल आई थीं तब उनके पेट और दोनों निचले अंगों में सूजन थी। बिस्तर पर हिलने-डुलने तक में वह असमर्थ थीं। उनके शरीर में प्रोटीन और एल्ब्यूमिन का स्तर काफी कम था। आगे की जांच के बाद लिवर सिरोसिस के साथ पोर्टल उच्च रक्तचाप, ग्रेड II हायटस हर्निया (एक ऐसी स्थिति जहां पेट का हिस्सा डायाफ्राम में एक छेद से छाती की ओर धकेलता है), छोटी एसोफेजियल वेरिसेस (गले को पेट से जोड़ने वाली नली में सूजी हुई रक्त वाहिकाएं) और हल्के पोर्टल हाइपरटेंसिव गैस्ट्रोपैथी (पीएचजी) (एक ऐसी स्थिति जहां पेट की परत पोर्टल नस में बढ़ते दबाव के कारण प्रभावित होती है। यही नस पाचन अंगों से लिवर तक रक्त ले जाती है।) बीमारियों की पहचान हुई।
नई दिल्ली ​स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. योगेश बत्रा की विशेषज्ञ देखभाल और निगरानी के तहत रोगी को बीते 23 सितंबर 2023 को भर्ती कराया गया जहां डॉ. बत्रा और उनकी टीम ने मरीज के इलाज को लेकर बकायदा एक योजना बनाई। टीम ने मल्टी मॉडल का इस्तेमाल करते हुए इलाज शुरू किया। इसका सबसे बड़ा फायदा रहा कि मरीज की भूख में सुधार होने लगा और पैरों व पेट की सूजन में कमी आने लगी। अब मरीज गतिशील अवस्था में भी आने लगी थीं। करीब आठ दिन की देखभाल के बाद मरीज को काफी बेहतर स्थिति में छुट्टी दे दी गई। उनका रक्त पैरामीटर लगभग सामान्य था और लिवर भी ठीक से काम कर रहा था।
नई दिल्ली ​स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. योगेश बत्रा ने कहा, ”इस जटिल मामले ने हमारे सामने एक महत्वपूर्ण चिकित्सा चुनौती पेश की थी लेकिन हमारी प्राथमिकता रोगी की स्थिति का प्रबंधन करने के लिए सटीक निदान और बहु-विषयक देखभाल प्रदान करना था। हमने प्रभावी ढंग से चिकित्सा देखभाल के साथ इलाज पर जोर दिया। साथ ही लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत के बिना इसे संभव किया। हमारी यह सफलता अपोलो अस्पताल में हमारी टीम की विशेषज्ञता, दृढ़ संकल्प, समर्पण के साथ-साथ हमारे चिकित्सा विशेषज्ञों और रोगी के बीच सहयोग का प्रमाण है। हम अपने मरीजों को उच्चतम गुणवत्ता वाली देखभाल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और हमें इस बात पर गर्व है कि हमने इस मरीज को जीवन की बेहतर गुणवत्ता हासिल करने में मदद की है।”

 

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