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भाग्य की धनी सोनिया गांधी ! मुकद्दर के मारे नरसिम्हा राव !!

के. विक्रम राव

भारत के दसवें प्रधानमंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे पीवी नरसिम्हा राव को मणिशंकर अय्यर ने भाजपायी और “बाबरी मस्जिद का तोड़क” बताया। अपनी आत्मकथा के विमोचन पर (नई दिल्ली : कल : 24 अगस्त 2023) वे राजीव भवन में सभा को संबोधित कर रहे थे। श्रोताओं में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी थीं। दिवंगत नरसिम्हा राव की खिल्ली उड़ने पर वे मुस्कराती रहीं।
तो है कौन यह मणिशंकर अय्यर ? कभी राजीव गांधी के देहारादून स्कूल में सहपाठी रहे। उनकी मां ने इसी स्कूल में टीचर की नौकरी की ताकि अय्यर की फीस कम हो सके। फिर छब्बीस साल तक इन मणिशंकर ने सरकारी नौकरी की। राजीव गांधी के प्रधानमंत्री कार्यालय (1985-89) में भी। दिल्ली के सैनिक फार्म की हरित भूमि पर बने मकानों में वे रहे। इस आवासीय कॉलोनी को दिल्ली हाईकोर्ट ने अवैध करार दिया था।

वे सांसद भी रहे। मगर तीन बार 1996 और 1998 फिर 2009 में लोकसभा का चुनाव हार भी गए थे। राज्यसभा के लिए नामित हुये। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एकदा अय्यर ने “नीच आदमी” कहा था। उसके पहले सिर्फ “चायवाला” कहते थे। एक दफा अय्यर अंडमान द्वीप गए। जेल के दौरे पर उन्होंने कहा : “इंडियन ऑयल फाउंडेशन के अध्यक्ष की हैसियत से मैंने सेलुलर जेल में सावरकर के उद्धरणों से युक्त पट्टिका को हटाने के आदेश दिए। मेरे अध्यक्ष बने रहने तक पट्टिका को वापस जेल में लगाने का सवाल ही पैदा नहीं होता।”
इस पर स्व. बालासाहेब ठाकरे ने अय्यर से कहा : “यह अय्यर कौन है और देश की आजादी की लड़ाई के बारे में उसे क्या पता है?” उन्होंने सावरकर के बारे में सुभाषचंद्र बोस और बी. आर. अम्बेडकर जैसे नेताओं के विचार दोहराए।
अय्यर ने स्वीकारा था कि संजय गांधी की दुर्घटना में निधन के बाद उन्हें अचरज हुआ जब पीएम पद के लिए राजीव गांधी का ऐलान हुआ। तब उन्हें हैरानी हुई थी कि एक पायलट देश कैसे चलाएगा ? अय्यर ने ये भी कहा कि अयोध्या में शिलान्यास करना राजीव गांधी की गलती थी।
चंद्रयान-3 का जिक्र करते हुए मणिशंकर अय्यर ने कहा : “भारत कभी भी ‘विश्वगुरु’ नहीं बन सकता क्योंकि वह पाकिस्तान को नजरअंदाज कर रहा है।” उन्होंने कहा कि “अगर भारत अपने पश्चिमी पड़ोसी के साथ शांति स्थापित नहीं कर सकता, अगर भारत पाकिस्तान से बात नहीं कर सकता, तो यह कभी भी दुनिया का नेतृत्व नहीं कर सकता।”
वे पाकिस्तान को गाढ़ा दोस्त मानते हैं। अय्यर ने लाहौर में पाकिस्तान से कहा था कि मोदी को अपदस्थ करने में मदद करें। पाकिस्तान के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की वकालत करते हुए अय्यर का कहना है कि भारत तब तक दुनिया में अपना उचित स्थान नहीं ले पाएगा, जब तक उसका पश्चिमी पड़ोसी ”हमारे जी का जंजाल” बना रहेगा। उनकी आत्मकथा में अपने इस कार्यकाल पर एक पूरा अध्याय है। पीटीआई के साथ एक साक्षात्कार में अय्यर ने कहा कि “उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ दौर पाकिस्तान में महावाणिज्य दूत का कार्यकाल था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में भारत की “सबसे बड़ी संपत्ति” वहां के लोग हैं जो इसे दुश्मन देश नहीं मानते।
गत माह प्रसिद्ध स्तंभकार तवलीन सिंह ने मणिशंकर अय्यर को जवाब (इंडियन एक्सप्रेस, संपादकीय पृष्ठ) दिया था। उसे यहां प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है। मगर इस वक्तव्य से मणिशंकर अय्यर को नारी के प्रति भावना का समुचित परिचय मिल जाता है। अब गौर कर लें कि कैसे नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री के कार्य करने में कांग्रेस पार्टी वाले कैसे पंगु करने की साजिश रचते रहे। अय्यर का इल्जाम है कि बाबरी ढांचे को नरसिम्हा राव ने नहीं बचाया। भाजपायी मुख्य मंत्री कल्याण सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय से वादा किया था कि उनकी सरकार ढांचे की समुचित सुरक्षा करेगी। मगर विफल होने पर मुख्यमंत्री जेल की सजा भी काट आए। उत्तर प्रदेश विधान सभा (2007) के चुनाव में कांग्रेस के इस तत्कालीन कांग्रेस महामंत्री राहुल गांधी ने मुस्लिम बस्ती में प्रचार अभियान में कहा था कि यदि नेहरू-गांधी कुटुम्ब का कोई सदस्य दिसम्बर 1992 में प्रधान मंत्री रहता तो बाबरी मस्जिद न गिरती। मानो नरसिम्हा राव ने अपने प्रधानमंत्री कार्यालय से हथौड़ा-फावड़ा उन कारसेवकों को मुहय्या कराया था।
भारत को परमाणु शक्ति बनाने की नींव भले ही इंदिरा गाँधी ने डाली हो, नरसिम्हा राव के अविचल प्रयास थे जिसने अटल बिहारी वाजपेयी को भी अनुप्राणित किया था| राजग के प्रधान मंत्री बनते ही अटलजी को नरसिम्हा राव ने बताया कि पोखरण द्वितीय की तैयारी फिर शुरू हो| उनकी सरकार की पूरी तैयारी थी पर तभी अमरीकी जासूस उपग्रह ने पोखरण की तस्वीर सार्वजनिक कर दिया था| अमरीकी राष्ट्रपति (जॉर्ज बुश) ने धमकी दी कि भारत की अर्थव्यवस्था, जो डगमगा रही थी, पंगु कर दिया जायेगा। बाद में पता चला कि सीआईए को खबर कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने दी थी।
जब पंजाब आतंकवाद से धधक रहा था, दार्जिलिंग में गुरखा और मिजोरम में अलगाववादी समस्या पैदा कर रहे थे, तो इन्दिरा गांधी ने नरसिम्हा राव को गृह मंत्री बनाया था। तभी आया अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर में सेना का प्रवेश और नरसिम्हा राव पर इन्दिरा सरकार को फिर से बचाने का दायित्व। इन्दिरा गांधी की हत्या के चन्द घण्टों बाद ही हैदराबाद से नरसिम्हा राव को वायुसेना के विमान से दिल्ली लाया गया था। तब सिख-विरोधी दंगों से दिल्ली जल रही थी। बाद में राजीव गांधी ने उन्हें रक्षा तथा मानव संसाधन मंत्री बनाया।

नरसिम्हा राव के व्यक्तित्व के सम्यक ऐतिहासिक आंकलन में अभी समय लगेगा। मगर इतना कहा जा सकता है कि तीन कृतियों से वे याद किए जाएंगे। पंजाब में उग्रवाद चरम पर था। रोज लोग मर रहे थे। एक समय तो लगता था कि अन्तर्राष्ट्रीय सीमा अमृतसर से खिसकर अम्बाला तक आ जाएगी। खालिस्तान यथार्थ लगता था। तभी मुख्यमंत्री बेअन्त सिंह और पुलिस मुखिया के.पी. सिंह गिल को पूर्ण स्वाधिकार देकर नरसिम्हाराव ने पंजाब को भारत के लिए बचा लिया। एक सरकारी मुलाजिम सरदार मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री नियुक्त कर नरसिम्हा राव ने आर्थिक चमत्कार कर दिखाया। मनमोहन सिंह स्वयं इसे स्वीकार चुके है। तीसरा राष्ट्रहित का काम नरसिम्हा राव ने किया कि गुप्तचर संगठन ‘‘रॉ’’ को पूरी छूट दे दी कि पाकिस्तान की धरती से उपजते आतंकी योजनाओं का बेलौस, मुंहतोड़ जवाब दें। अर्थात् यदि पाकिस्तानी आतंकी दिल्ली में एक विस्फोट करेंगे तो लाहौर और कराची में दो दो विस्फोट होंगे।
नरसिम्हा राव कितने भ्रष्ट रहे? वे प्रधानमंत्री रहे किन्तु अपने पुत्र को केवल पैट्रोल पम्प ही दिला पाये। एक अकेले बोफोर्स काण्ड में तो साठ करोड़ का उत्कोच था| अपनी आत्मकथा रूपी उपन्यास के प्रकाशक को इस भाषाज्ञानी प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को स्वयं खोजना पड़ा था। नक्सलियों से अपने खेतों को बचाने में विफल नरसिम्हा राव दिल्ली में मात्र एक फ्लैट ही बीस साल में साझेदारी में ही खरीद पाये। तो मानना पडे़गा कि नरसिम्हा राव आखिर सोनिया के कदाचार की तुलना में अपनी दक्षता, क्षमता, हनक, रुतबा, रसूख और पहुंच के बावजूद कहीं उनके आसपास भी नहीं फटकते। राजीव फाउंडेशन, जिसकी जांच हो रही है, को नरसिम्हा राव ने सौ करोड़ दिया था| माँ, बेटा, बेटी को बड़ा आवास और सुरक्षा दिया था| बोफोर्स काण्ड को समाप्त कराने हेतु नरसिम्हा राव ने अपने विदेशमंत्री माधवसिंह सोलंकी के हाथ स्वीडन के प्रधानमंत्री के नाम सन्देश भेजा था| राज फूटा तथा बेचारे सोलंकी की नौकरी चली गयी|
मगर जीते जी नरसिम्हा राव की जो दुर्गति कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने की वह हृदय विदारक है। उससे ज्यादा खराब उनके निधन पर किया गया बर्ताव रहा है। नरसिम्हा राव के शव को सीधे हैदराबाद रवाना कर दिया ताकि कहीं राजघाट के आसपास उनका स्मारक न बनाना पड़े। नरसिम्हा राव के नाती एन.वी. सुभाष ने व्यथा व्यक्त की कि हर मौके पर नीचा दिखाने, छवि विकृत करने और उनकी उपलब्धियों को हल्का बताने की प्रवृत्ति से सोनिया तथा राहुल बाज नहीं आते| मिट्टी के तेल से शव दहन करने और पार्टी कार्यालय (24 अकबर रोड) के फुटपाथ पर शव डाल देने तथा राजघाट पर शव दहन से मना करने का उल्लेख भी इस नाती ने किया| मात्र सांसद रहे संजय गाँधी की भी राजघाट पर समाधि बनवाइ गयी है| इस पूर्व प्रधानमंत्री को अभी तक भारत रत्न से विभूषित नहीं किया गया| जबकि खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर, गायिका लता मंगेशकर, फ़िल्मी सितारे एम. जी. रामचंद्रन आदि को नवाजा जा चुका है| अतिरिक्त प्रधानमन्त्री पद पर आते-जाते रहे, गुलजारी लाल नन्दा भी नहीं छूटे|
इसी विचारक्रम में याद आता है यह बात 14 मार्च 1998 की है। अपनी अकर्मण्यता और लिबलिबेपन के कारण नरसिम्हा राव ने कांग्रेस पार्टी को सरकार में ड्राइवर सीट से उतर कर कन्डक्टर बना डाला था। सत्ता के खेल में ताल ठोकनेवाले अब ताली पीटते रहे। खाता-बही संभालने वाले बक्सर के सीताराम केसरी ने वरिष्ठ और विद्वान नरसिम्हा राव से गद्दी छीन ली थी। खुद अध्यक्ष बन गये। मगर इतिहास ने तब स्वयं को दुहराया। दो वर्ष बाद सोनिया गांधी ने अपने दल बल सहित कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के कमरे का ताला तोड़कर खुद कुर्सी हथिया ली। सीताराम केसरी ने बस इतना विरोध में कहा कि यदि “सोनियाजी इशारा कर देती” तो वे खुद बोरिया-बिस्तर समेट लेते। सेवक अपनी औकात समझता है। तो बिना किसी चुनाव प्रक्रिया के, बिना नामंकन के, बिना वैध मतदान के, सोनिया गांधी 25 वर्ष पूर्व स्वयंभू पार्टी मुखिया बन गई। सवा सौ साल की विरासत पर सात साल के बल पर काबिज हो गई। बीच में राहुल गांधी भी आए थे। अब शीघ्र प्रियंका सत्ता पाकर कुनबावाली पार्टी का त्रिभुज पूरा बनाएगी।

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