योगः कर्मसु कौशलम् अर्थात कर्मों में कुशलता ही योग की अभिव्यक्ति है : राधा बहन

लखनऊ : योगः कर्मसु कौशलम् अर्थात कर्मों में कुशलता ही योग की अभिव्यक्ति है. कर्मों में कुशलता के लिए तन और मन दोनों का स्वस्थ होना आवश्यक है. स्वस्थ शरीर और उमंग-उत्साह से भरा हुआ मन, हमें स्वास्थ्य अर्थात स्व में आनंदपूर्वक स्थित रहने की शक्ति प्रदान करता है. यह विचार आज ब्रह्माकुमारीज, गोमतीनगर केंद्र इंचार्ज राधा दीदी ने नवे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर व्यक्त किए.

उन्होंने बताया कि योग ही भारत की पहचान है. जब हम विदेशों में जाते हैं तो विदेशी हमसे, आध्यात्मिकता एवं योग की विशेषताओं की अपेक्षा करते हैं. योग संपूर्ण मानव जीवन के विकास का आधार है. धन एवं पद हमें रहने का अच्छा स्थान और सुविधापूर्ण जीवन तो दे सकते हैं लेकिन इस सुख भरे जीवन में मन की शांति और खुशी के लिए कैरियर और बाहरी दौड़-भाग भरे कार्य व्यवहार के साथ-साथ योग को अपनाना आवश्यक होता जा रहा है. आज योग आधुनिक जीवन शैली का आवश्यक अंग बन गया है. यह हमारे तन और मन दोनों को स्वस्थ रखकर, हमें सभी प्रकार की मानसिक एवं शारीरिक बीमारियों से मुक्त कर देता है. ब्रह्माकुमारीज के 140 देशों में लगभग 5000 केंद्रों में राजयोग का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है.
राधा दीदी के उद्बोधन के पश्चात सभी साधकों ने भाग्यलक्ष्मी बहन के निर्देशन में प्रोटोकॉल के अनुसार योगाभ्यास किया. सब के स्वस्थ एवं शांतिपूर्ण जीवन के लिए शुभकामनामों के साथ योगाभ्यास का समापन हुआ.



