नवाब जाफ़र मीर अब्दुल्लाह की स्मृति में नवाबीन ए अवध और दानिश्वरों का ताज़ियाती जलसा

लखनऊ : यश भारती सम्मानित नवाब जाफ़र मीर अब्दुल्लाह लखनऊ के नवाब की मौत दिल का दौरा पड़ने से मौत होने पर नवाबीन ए अवध और दानिश्वरों का ताज़ियाती जलसा सल्तनत मंज़िल, निकट सिटी स्टेशन, हामिद रोड, लखनऊ में मुनअक़ीद हुआ ।

इस अवसर पर राजकुमार अमीर नक़ी खाँ ऑफ़ महमूदाबाद ने कहा कि हम सभी मरहूम के ग़म में बराबर के शरीक हैं। मरहूम एक गरीब परवर, हमदर्द और एक अज़ीम शख़्सियत के मलिक थें। जिनके नेक कामों को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। अल्लाह ताला मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में जगह दे। आमीन ! रॉयल फ़ैमिली के नवाबज़ादा सैयद मासूम रज़ा, एडवोकेट ने आगे कहा कि उन्होंने क़रीब 72 साल की उम्र में विवेकानंद पॉलीक्लिनिकल, लखनऊ में आख़िरी सांसें ली और इस दुनिया को हमेशा हमेशा के लिये अलविदा कह दिया। कल रात क़रीब 8 बजे उन्हें तालकटोरा करबला में दफ़न कर दिया गया। नवाबज़ादा सैयद मासूम रज़ा ने आगे कहा की नवाब साहेब के इंतेक़ाल से जो खिला पैदा हो गया उसकी भरपायी नामुमकिन है। उन्होंने आगे कहा की क़ौम एक अज़ीम शख़्सियत से महरूम हो गयी।

मरहूम नवाबज़ादा मासूम रज़ा की बेगम नसीमा रज़ा के रिश्ते में चचा थें। नवाब साहेब का नवाबी घराने सल्तनत मंज़िल, लखनऊ से बहुत ही क़रीबी रिश्ता था। उनके अहले ख़ाना की ख़िदमत में ताज़ियत् पेश करते हुए उनके पसमंदिगान से ग़म का इज़हार किया और दुआ की के अल्लाह उनके सभी रिश्तेदारों को सब्रे जमील अता करे। नवाब जाफ़र मीर अब्दुल्लाह पाबंदिये वक़्त के साथ धार्मिक प्रोग्रामों, मजलिस, महफ़िल और आज़ादारी के प्रोग्राम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते थें। उनकी मौत से घर, पड़ोस, मोहल्ला, दोस्त और अज़ीज़ सब सौगवार हो गयें और वह इतनी दूर चले गयें जहां से लौट कर आना नामुमकिन है।




