प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित को मिला सारस्वत सम्मान

लखनऊ। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, अवध प्रांत, उ.प्र. एवम भारतीय साहित्य परिषद् के तत्वावधान में
आयोजित अखिल भारतीय साहित्य परिषद्
संगोष्ठी एवं सारस्वत सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता – डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने की ।
मुख्य वक्ता के तौर पर प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित, वरिष्ठ साहित्यकार साहित्य का प्रदेय विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आजके साहित्य में शिष्टता का समावेश कम हो गया है। चाहे वह किसी भी माध्यम से विद्यार्थी को मिले। सोशल मीडिया इसका कारण है।
विशिष्ट वक्ता – प्रोफेसर पवन अग्रवाल, सभापति, भारतीय हिन्दी परिषद, प्रयागराज ने तुलसी साहित्य में सामाजिक समरसता विषय पर अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि एक लंबे ॳतराल के बाद तुलसीदास जी लोकनायक के रूप में मिलते है जो ईश्वर को सभी के ह्रदय में स्थापित करते नजर आते हैं। विशिष्ट वक्ता- प्रो. सूर्यकांत, वरिष्ठ चिकित्सक, के. जी.एम.सी., लखनऊ ने चिकित्सा के क्षेत्र में हिन्दी के विषय पर अपने संस्मरण को याद करते हुए कहा कि कैसे हिन्दी मे अपने शोध पत्र को जमा करने के लिए चिकित्सा संस्थान, विश्वविद्यालय, राजभवन के चक्कर लगाने पड़े। कैसे विधान सभा से आदेश मिला कि हिन्दी में ही डा सूर्यकांत का शोध पत्र जमा होगा । आज उन्हीं के प्रयासो से मध्यप्रदेश में हिन्दी से एम बी बी एस प्रथम वर्ष में प्रवेश होने लगे हैं। और हिन्दी में पुस्तके भी उपलब्ध है।

विशिष्ट वक्ता- डॉ. पवनपुत्र बादल, राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री, अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने- फ़िजी यात्रा के साहित्यक संस्मरण को बताते हुए कहा कि कैसे भारत से गये लोग वहां 80% खेती-बाड़ी करते हैं । और अपने माई – बाप(पूरवज) की बात को मानते हुए रामायण और रामचरित मानस का अनुसरण करते हुए हिन्दी साहित्य को संजो कर रखा है।।
डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि गुरु शिष्य परम्परा में गुरु जब शिष्य से हारता है तो दूसरे जीवन का सुखद अनुभव होता है जो आज चार पीढ़ियों से समृद्ध मच पर हुआ है।

डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव सह-महामंत्री, अवध प्रांत
विजय त्रिपाठी अध्यक्ष, अवध प्रांत ,द्वारिका प्रसाद रस्तोगी
महामंत्री, अवध प्रांत ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम में शामिल ,डा नीतू शर्मा, डा निर्भय नारायण, ममता पंकज, ज्योति किरन रतन, मनमोहन बाराकोटी राजीव वर्मा वत्सल, तरल ,रुपम तिवारी, रीता तिवारी, सुबोध कुमार, सुशील कुमार, विनोद कुमार भावुक, रेणु सिंह , विनोद कुमार, संजय , विद्रोही सहित सभी का उपस्थिति के लिए धन्यवाद, आभार व्यक्त किया। समापन रीता तिवारी के द्वारा वन्दे मातरम् के साथ हुआ ।।



