राष्ट्रीय कथक समारोह “विरासत” में नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियाँ

लखनऊ :राष्ट्रीय कथक संस्थान द्वारा पिछले कई दशको से कथक समारोह “विरासत का आयोजन किया जा रहा है इसके मंच पर असंख्य देश-विदेश के सुप्रसिद्ध एवं अर्न्तराष्ट्रिय ख्याति प्राप्त कलाकारों के द्वारा प्रस्तुति दी जा चुकी है। 12 मार्च 2023 क़ो कार्यक्रम का शुभारम्भ पारम्परिक दीपप्रज्जवलन से किया गया।

प्रथम प्रस्तुति- “मंगलाचरण” कलाकार- राष्ट्रीय कथक संस्थान । द्वितीय प्रस्तुति- “परम्परा” कलाकार- विशाल कृष्ण, वाराणसी। तृतीय प्रस्तुति- “सृजन” कलाकार- विधालाल, दिल्ली द्वारा दी गयी.
प्रथम प्रस्तुति मंगलाचरण के अन्तर्गत वीणा वादिनी, ज्ञान दायिनी, सुरों की देवी माँ सरस्वती’ जी की स्तुति “जयति जय जय माँ सरस्वती” से किया गया जिसकी शब्द एवं स्वर रचना सुश्री अर्चना कुशवाहा द्वारा की गयी। छात्र-छात्रओ में अजलि, संस्कृति, प्रज्ञा, श्वेता, रूद्र, एकाक्ष, जिज्ञांशू थे।

प्रशिक्षिका अर्चना कुशवाहा व संगतकर्ता तबला- आनन्द दीक्षित हारमोनियम- मीना वर्मा थे । द्वितीय प्रस्तुति परम्परा
नृत्य की थी.कलाकार विशाल कृष्ण, वाराणसी थे । श्रृंखला के द्वितीय चरण का आरम्भ बनारस घराने के सुप्रसिद्ध कलाकार विशाल कृष्णा के एकल नृत्य द्वारा किया गया। आप की प्रथम गुरू आप की दादी भारत की प्रसिद्ध नृत्य सम्राज्ञी पदमश्री सितारा देवी जी रहीं ततपश्चात् पिता पं. मोहन कृष्ण एवं रविशंकर मिश्र जी द्वारा कथक की शिक्षा ग्रहण की। आपकी उत्कृष्ट कला के फल स्वरूप आपको कला विभूति सम्मान, श्रृंगारमणि, पं.विरजू महारज संगीत संमृद्धि सम्मान, उप्र संगीत नाटक अकादमी सम्मान इत्यादि से अलंकृत किया जा चुका है।

आज नृत्य प्रस्तुति का शुभारम्भ देवी स्तुति “जय जय जगजननी देवी” से किया गया जिसकी रचना आचार्य पं. सुखदेव जी द्वारा की गई है तत्पश्चात पारम्परिक शुद्ध कथक नृत्य के अन्तर्गत तीनताल विलम्बित एवं द्रुतलय में आमद परन, टुकड़े, तिहाईयों एवं लड़ी इत्यादि की प्रस्तुति दी गयी। अन्त में तुलसीदास जी द्वारा रचित भगवान श्री रामचन्द्र जी पर आधारित भजन “श्री रामचन्द्र कृपालु भजमन एवं मीराबाई जी द्वारा रचित होली अत्यन्त सौन्दर्यपूर्ण, आकर्षक अंदाज में गरिमामयी प्रस्तुति दी गयी।

तृतीय प्रस्तुति :सृजन के नृत्य कलाकार- विधालाल, दिल्ली थे। विद्यालाल कथक की एक जानी मानी प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं। इन्होने अपने नृत्य की शिक्षा जयपुर घराने की प्रसिद्ध गुरु गीताजंलि लाल जी के सानिध्य में प्राप्त की। आप दिल्ली दूरदर्शन की ‘ए’ श्रेणी की कलाकार हैं। आपने कथक महोत्सव, मुम्बई 2007 विश्व नृत्य दिवस ‘लास्य’ मुम्बई 2007 ‘शरद वैभव’ बंगलोर, विश्व पर्यटन दिवस, युवा महोत्सव साहित्य कला, कथक महोत्सव पुणे, गोवा, भोपाल एवं विदेशों में लिली, कार्निवल, फांस फेस्टिवल जर्मनी, इटली, फीजी इत्यादि। आपने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेई, श्रीलंका के प्रधानमंत्री, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति के समक्ष नृत्य प्रदर्शन किया.
आपके द्वारा नृत्य प्रस्तुति का शुभारम्भ बैजूबावरा जी द्वारा रचित “हरि हर” के माध्यम से शिव और कृष्ण के लास्य एवं ताण्डव भाव के साथ उनके अलग अलग स्वरूपों को बड़े ही मोहक अंदाज में प्रस्तुत किया गया। जोकि राग बैरागी में निबद्ध थी.

शुद्ध पारम्परिक कथक नृत्य के अन्तर्गत जयपुर घराने की बारीकियाँ थाट. आमद, परन, उठान, चलन एवं कवित्त प्रस्तुत किया गया अभिनय पक्ष के अन्तर्गत रसखान जी द्वारा रचित सवैया राग मियाँ मल्हार तीनताल में निबद्ध “मोर पखा सर ऊपर राखिहूँ, गूज की माल गले पहरूंगी” प्रस्तुत किया गया। परिकल्पना, अवधारणा एवं निर्देशन सरिता श्रीवास्तव व प्रस्तुति राष्ट्रीय कथक संस्थान, लखनऊ की थी.




