राष्ट्रीय कथक संस्थान के कथक प्रवाह में मनोरम सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

लखनऊ : राष्ट्रीय कथक संस्थान, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उ.प्र.) का कथक प्रवाह कार्यक्रम राष्ट्रीय कथक संस्थान परिसर में सम्पन्न हुआ. कार्यक्रम का शुभांरम्भ पारम्परिक दीप प्रज्जवलन से किया गया।
कार्यक्रम की प्रथम प्रस्तुति आगरा की सुप्रसिद्ध कलाकार दीप्ति गुप्ता द्वारा आदिदेव भगवान शिव पर आधारित ’’शंकर अति प्रचण्ड’’ ध्रुपद को कथक की मनोरम भाव भंगिमाओं के साथ दी गयी ।
इसी कड़ी में पारम्परिक कथक नृत्य जिसमें तीनताल में तोड़े, टुकड़े, लड़ी उठान, आमद, परन इत्यादि का प्रस्तुतिकरण अत्यन्त मोहक एवं मौलिक अन्दाज में किया गया। उत्कृष्ट सांगीतिक संयोजन एवं कथक की नायिका भेद में ’’चतुर्नी खण्डिता नायिका‘‘ को अत्यन्त ही अलौकिक ढ़ंग से प्रस्तुत किया गया। अन्तिम चरण में भगवान श्रीकृष्ण पर आधारित रचना ’’मैं तो नहीं जाऊँ‘‘ की प्रस्तुति दी गयी।

कार्यक्रम की द्वितीय प्रस्तुति ’’ताल वृन्द‘‘ के अन्तर्गत आनन्द दीक्षित के निर्देशन में संस्थान के तबला विधा की युवा पीढ़ी द्वारा तबला समूह वादन प्रस्तुत किया गया जोकि तीनताल 16 मात्रा में निबद्ध था। समूह वादन का आरम्भ भगवान श्री गणेश के छन्द से किया गया तदुपरान्त पेशकार, कायदा, रेला, मध्यलय में टुकड़े एवं परन तथा द्रुतलय में जुगलबन्दी प्रस्तुत की गयी।

कलाकारों में तुषार, सत्य प्रकाश , अखण्ड प्रताप, मानसी, मोहित, एकाक्ष, अग्रिम, इस्काॅन, वैदिक थे ।
लहरा संगत मीना वर्मा,परिकल्पना, अवधारणा एवं निर्देशन सरिता श्रीवास्तव का था.



