संस्कार संस्कृति साहित्य का दर्पण: प्रो. हरि शंकर मिश्र

लखनऊ : अखिल भारतीय साहित्य परिषद महानगर लखनऊ एवं दक्षिण ईकाई लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान मे ऑनलाइन परिचर्चा और काव्य गोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ।

साहित्य का प्रदेय विषय पर आधारित परिचर्चा मे
मुख्य वक्ता हिन्दी के पूर्व विभागाध्यक्ष लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. डा. हरि शंकर मिश्र ने अपने विचार व्यक्त किये ।

दक्षिण ईकाई लखनऊ की अध्यक्ष डा. नीतू शर्मा के संयोजन मे कार्यक्रम का शुभारंभ राजीव वत्सल ने वाणी वंदना अंतर्मन के सूनेपन में, कुछ संगीत मधुर दो हे मां। मैं भी गा लूं पंचम सुर में, मुझको ऐसा स्वर दो हे मां।

वाणी वंदन के पश्चात प्रो डा. हरि शंकर मिश्र के अनुसार साहित्य का का उदय हमारी पारम्परिक संस्कार और संस्कृति से होता है। परिष्कृत साहित्य प्राप्त हो उसके लिए विद्या अध्ययन की आवश्यक है जिससे संस्कार और संस्कृति को भली भांति समझा जा सके । युवा साहित्य से विमुख क्यो हो रहा । दूसरा वाल्मिकी को कयो प्रथम कवि माना जाता ऐसे प्रश्नो के उत्तर सहजता से देते हुए सभी की जिज्ञासाओं को भी पूर्ण किया ।

परिचर्चा उपरान्त काव्य गोष्ठी मे काव्य पाठ का शुभारंभ राह सुझाये हर पथ पे साहित्य वही,
जो तमस मिटाये इस जग के साहित्य वही,
‘निर्भय’ होकर प्रतिकार करे दुर्भावों का,
जो सच कह डाले साहस से साहित्य वही ।।
निर्भय नारायण गुप्त ‘निर्भय’,अध्यक्ष अखिल भारतीय साहित्य परिषद, महानगर लखनऊजिसने ठानी देश हित, रहे राष्ट्र का मान। है सपूत सच्चा वही, करता कार्य महान।।

– मनमोहन बाराकोटी ‘तमाचा लखनवी’ शब्द शब्द गाते विरुद्धावली,अक्षर अक्षर मे वंशावली,हर शब्द बोलता है जयगाथा,जन मंगल से रखता नाता, जिसका परिचय स्वंय रश्मियां अपना परिचय क्यो दे सविता, कवि का परिचय केवल कविता।

विजय मिश्र प्रान्त अध्यक्ष अखिल भारतीय साहित्य परिषद : भले वर्ष नव यह ग्रिगोरियन, नहीं सनातन।
किंतु मनाता सकल जगत ही, है अधुनातन।
राजीव वत्सल ; प्रेम विषय पर बगीचे में खिला गुलाब,
मुझे देख जब मुस्काया,उसे आनंदित देख,
मेरा मन भी हर्षाया.प्रशांत माहेश्वरी ।। कभी मैं सुलाई गई तो कभी जगाई गई, दस्तावेजों में लपेटकर संस्थानों में सजाई गई। माँ भी कहते हो और घर में जगह भी नहीं देते
अपने हीं घर में पखवाड़े भर के लिए बुलाई गई।
डॉ ममता पंकज, ममता पंकज, सुरसरी तरंग मिश्र , काजल मिश्रा , कन्हैयालाल , अनन्या मूर्ति , अनुष्का ज्योति किरन रतन, प्रदीप, जाह्नवी अवस्थी ,पूनम,प्रिया सिंह। आदि ने अपनी रचनाये प्रस्तुत की.


