वेदना, संवेदनाओं, खुशियों को एक साथ उच्चारित करना जानते हैं लेखक उदयवीर : आशीष कन्धवे
'बंजर होती संस्कृति ' पुस्तक में विमर्श की शैली देखने को मिलती है:प्रेम भारद्वाज 'ज्ञान भिक्षु '

रिपोर्ट -विनीता रानी विन्नी
लेखक उदयवीर सिंह की पुस्तक “बंजर होती संस्कृति’ लोकार्पित
नई दिल्ली : कथा साहित्य का अर्थ है कि आपके कथन में आकर्षक, चरमोत्कर्ष भाषा कैसी है. आपने जो लिखा है, किसके लिए, अगर अंतिम लक्ष्य पाठक को आकर्षित नहीं कर रहा तो लेखन व्यर्थ है. अधिक लिख देने से कवि, लेखक, समालोचक नहीं होंगे. काल के सापेक्ष लिखेंगे तो निश्चित रूप से पाठक को प्रभावित करेंगे.
उक्त विचार वरिष्ठ साहित्यकार आशीष कन्धवे ने साहित्यकार उदयवीर सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ” बंजर होती संस्कृति ” के लोकार्पण अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए.
यह लोकार्पण समारोह नई दिल्ली के कुंजुम, एम 60 प्रथम तल, एम ब्लाक मार्केट, ग्रेटर कैलाश -2, नियर मेट्रो ग्रेटर कैलाश में मंगलवार,20 दिसंबर को सम्पन्न हुआ.श्री आशीष कन्धवे ने कहा कि कहानी व कविता में भाषा का लालित्य क्या होता है, उसे पढ़ा जाना चाहिए. लेखक उदयवीर के लेखन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री कन्धवे ने कहा कि वे वेदना, संवेदनाओं, खुशियों को एक साथ उच्चारित करना जानते हैं. इनके लेखन में भाषाई कौशल है.

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रेम भारद्वाज ‘ज्ञान भिक्षु ‘ जी ने कहा कि लेखक उदयवीर जी के मौन के अंदर बहुत कुछ छिपा है. उन्होंने कहा कि ‘बंजर होती संस्कृति ‘ पुस्तक में विमर्श की शैली देखने को मिलती है.

दार्शनिक चिंतन को गहराई से समझते हैं उदयवीर: हरीश अरोरा
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शिक्षाविद हरीश अरोरा ने कहा कि ‘बंजर होती संस्कृति ‘ पुस्तक के शीर्षक से निराशा जरूर हुई थी लेकिन पढ़ने के बाद विचार आया कि लेखक उदयवीर जी दार्शनिक चिंतन को गहराई से समझते हैं.
लेखक का कुछ भी अपना नहीं होता, वो जो समाज को समर्पित करता है वही उसका होता है. उन्होंने लेखक उदयवीर जी की कई कथाओं का उल्लेख भी किया.

इस दौरान समाजसेवी व साहित्यकार इंद्रजीत शर्मा ने साहित्य कार उदयवीर को बधाई दी.लोकर्पित पुस्तक ‘बंजर होती संस्कृति’ के लेखक उदयवीर सिंह ने अपने अनुभवों को साहित्यप्रेमियों से साँझा किया.

कार्यक्रम का संचालन कीर्ति वैद्ध ने किया . इस अवसर पर काफ़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित थे.




