प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय , लखनऊ द्वारा ‘स्वर्णिम भारत की पहचान : आत्मनिर्भर किसान’

लखनऊ : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय , लखनऊ द्वारा ‘स्वर्णिम भारत की पहचान – आत्मनिर्भर किसान’ अभियान के अंतर्गत गांव-गांव जाकर किसानों को शाश्वत योगिक खेती की समझ एवं अपनाने की प्रेरणा दी जा रही है. शाश्वत योगिक खेती, जैविक खेती के साथ-साथ योग का प्रयोग सम्मिलित करते हुए, की जाने वाली खेती है.
आजकल अधिक उत्पादन एवं कीटरक्षण के लिए किसानी में तरह-तरह की रासायनिक खादों का उपयोग बढ़ता ही जा रहा है. यह रसायन भूमि की उर्वरा शक्ति को तो बुरी तरह से नुकसान पहुंचाते ही हैं और साथ ही साथ महत्वपूर्ण मित्र जीवाणुओं एवं कीटों को भी नष्ट कर देते हैं. यही रसायन अनाज एवं एवं फलों में भी अवशोषित हो जाते हैं जो फिर इनका उपयोग करने वाले मनुष्य के शरीर में पहुंच जाते हैं जिसके फलस्वरूप आजकल तरह-तरह की नई-नई बीमारियां बढ़ती ही जा रही हैं.
रासायनिक खेती के इन्हीं दुष्परिणामों को देखते हुए प्रजीपिता ब्रह्माकुमारीज के द्वारा, हमारी प्राचीन ऋषि-कृषि परंपरा के अनुरूप प्राकृतिक तरीके से की जाने वाली खेती एवं उसके साथ योग का प्रयोग करने को बढ़ावा दिया जा रहा है. शाश्वत योगिक खेती में हम फसल उत्पादन के प्रत्येक चरण पर, जैसे की भूमि की जुताई के पहले, बीजों की बुवाई के पहले एवं फसल तैयार होने एवं कटाई के समय, उनको परमात्मा से शक्ति लेकर, शक्तिशाली बनाते हैं, ऊर्जा का संचार करते हैं और साथ ही साथ अपनी फसलों एवं पशुओं के साथ एक भावनात्मक संबंध भी स्थापित किया जाता है. हमारी यह भावनाएं एवं परमात्मा की शक्ति फसलों द्वारा अवशोषित कर ली जाती हैं. विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों के आधार पर आंका भी गया है कि शाश्वत योगिक खेती के फल स्वरुप उत्पन्न हुई फसलें एवं फल, अधिक पौष्टिक एवं शक्तिशाली होते हैं.
आज इसी अभियान के दूसरे दिन के अंतर्गत, ब्रह्माकुमारीज लखनऊ की तीन टीमें मलौली, मोहनलालगंज, गंगागंज,शिवलर, बहरौली आदि गांवों में पहुंची और किसानों को शाश्वत योगिक खेती के फायदे बताते हुए प्रशिक्षण भी दिया. अभियान में ब्रह्माकुमारी स्वर्णलता बहन, ज्योति दीदी, भ्राता कपूर भाई, आदर्श भाई, पूर्व कृषि निदेशक विनयप्रकाश भाई, दिनेश एवं संजय टंडन भाई की मुख्य उपस्थिति रही.



