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लखनऊ विश्वविद्यालय का 102वां स्थापना दिवस समारोह मनाया गया

लखनऊ : लखनऊ विश्वविद्यालय का 102वां स्थापना दिवस मनाया गया। समारोह की शुरुआत विश्वविद्यालय के  कुलपति, प्रो. आलोक कुमार राय के स्वागत भाषण के साथ हुई, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में योगेंद्र उपाध्याय, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, दयाशंकर सिंह, माननीय परिवहन मंत्री (इंडिपेंडेंट चार्ज) उत्तर प्रदेश सरकार के साथ  शशि शेखर, हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक का सम्मानित अतिथि के रूप में, स्वागत किया गया।

विश्वविद्यालय के छह प्रतिष्ठित पूर्व छात्र अर्थात् माननीय न्यायमूर्ति सेवानिवृत्त रितु राज अवस्थी, वर्तमान राष्ट्रीय विधि आयोग, नई दिल्ली के अध्यक्ष (पूर्व छात्र 1986), अनिल भारद्वाज, निदेशक, भौतिक प्रयोगशालाएँ, अहमदाबाद (पूर्व छात्र 1987),  जयंती प्रसाद, सेवानिवृत्त, वर्तमान में भारतीय दिवाला और दिवालियापन बोर्ड के पूर्णकालिक सदस्य ( पूर्व छात्र 1984), शशि प्रकाश गोयल (आईएएस)  मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव, आशुतोष शुक्ला, , यूपी के राज्य प्रमुख (पूर्व छात्र 1987) और मनु श्रीवास्तव (आईएएस), मुख्य सचिव, महाराष्ट्र सरकार, मुंबई को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया।
प्रो. आलोक कुमार राय ने सभी का परिचय उपस्थित विश्वविद्यालय परिवार से कराया और विगत वर्ष में विश्वविद्यालय की कुछ उपलब्धियों को गिनाया। उन्होंने विश्वविद्यालय को NAAC द्वारा दिए गए ए++ ग्रेड के साथ-साथ एनईपी-2020 की सभी बिंदुओं को लागू करने वाला देश का पहला संस्थान होने की बात कही। इस अवसर पर विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन एवं वार्षिक कलैण्डर भी जारी किया गया। डॉ. अनिल भारद्वाज ने अपने विश्वविद्यालय के दिनों को याद किया और चंद्रयान मिशन के बारे में बात की, जिसका वह हिस्सा थे।


आशुतोष शुक्ल ने अपने प्राध्यापकों को याद किया जिन्होंने उन पर अमिट छाप छोड़ी। यहां तक कि वह अपने मूल विभाग के कर्मचारियों को भी प्यार से याद करने से नहीं चूके। उन्होंने दृढ़ता से इस तथ्य को सामने रखा कि जीवन में हमारा उद्देश्य दूसरों की सेवा करना है।
जयंती प्रसाद ने अपने प्रोफेसरों को अच्छी यादों और उनके द्वारा गठित संगीत समूह को याद किया। वह इतना भावुक हो गए कि उनकी आंखों में आंसू आ गए।
न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी ने इस दिन को एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में व्यक्त किया और अपने प्रोफेसरों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि आज वो जो भी हैं अपने शिक्षकों की बदौलत है।
शशि प्रकाश गोयल ने अपने विश्वविद्यालय के दिनों, टैगोर पुस्तकालय को याद किया और अपने शिक्षकों को सबसे बेहतरीन कह संबोधित किया।
मनु श्रीवास्तव ने एक वीडियो संदेश भेजा क्योंकि उनकी पूर्व निर्धारित प्रतिबद्धताओं के कारण वे आज के समारोह का हिस्सा नही बन पाए, और आभार व्यक्त किया। उनके माता पिता इस कार्यक्रम में आए थे।


दयाशंकर ने सभी का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की, और याद किया कि कैसे विश्वविद्यालय ने उनके राजनीतिक जीवन को संवारने में मदद की। उन्होंने यह भी उद्धृत किया कि कैसे यूपी के  मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने उनसे अपने अल्मा मेटर में योगदान करने के तरीकों का पता लगाने के लिए बात की।
शशि शेखर जी ने एक कहानी सुनाई कि किस प्रकार शिक्षा मानव जीवन में दीयों की एक ऐसी शृंखला को प्रकाशित करती है जिसकी सहायता से संदेह की अंधेरी रातों का मुकाबला किया जा सकता है।
मुख्य अतिथि योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि विश्वविद्यालय एक ऐसी जगह है जो किसी की भी युवा ऊर्जा को वापस लाती है। विश्वविद्यालय का एक गौरवशाली अतीत है, जिसमें योगी और कुलाधिपति, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल,  आनंदीबेन पटेल सहित सभी के अथक प्रयास शामिल हैं जिससे लगातार विश्वविद्यालय हर दृष्टि में बेहतर बना है। उन्होंने विश्वविद्यालय को ऐसी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा का अग्रदूत बनाने की कामना की कि कोई भी बच्चा अवसरों की तलाश में देश से बाहर न जाए।
अंत में प्रोफेसर चक्रवर्ती ने इस अवसर पर उपस्थित सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। शाम को मालवीय हॉल में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ लखनऊ विश्वविद्यालय का 102वा स्थापना दिवस का समापन हुआ।

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