लखनऊ. ‘शेरदिल शेरगिल’ के लिए एक बार फिर धीरज धूपर के साथ आ रहीं सुरभि चंदना ने कहा,“जब आपके को-स्टार आपके दोस्त होते हैं, तो काम करना आसान हो जाता है.
इस शो में एक बात कही गई है कि ‘लड़कियाँ घर संभालती हैं, ऑफिस नहीं’ जिस पर सुरभि चंदना कहते हैं की ‘लड़कियाँ घर संभालती हैं और ऑफिस भी’! वह हर काम करती हैं। वह सुबह उठती हैं और नौ बजे तक काम शुरू कर देती हैं। वह सात बजे उठती हैं और आठ बजे तक काम के लिए तैयार हो जाती हैं। उनके पेरेंट्स उनसे प्यार करते हैं, लेकिन वह कम से कम 10-15 मिनट किचन में देने की कोशिश करती हैं। वह यह संभाल सकती हैं। उनके पेरेंट्स ने उन्हें एक आत्मनिर्भर महिला के रूप में बड़ा किया है। सुरभि की माँ एक कामकाजी महिला थीं और बच्चे खुद से ही सारे काम करते थे। अगर उनके पेरेंट्स घर पर न हों, तब भी वह अपना खाना बनाकर शूटिंग के लिये निकल जाती हैं। एक औरत जो चाहे, कर सकती है।
इसी तरह इस शो में मनमीत एक बच्चे की सिंगल मदर है और अपने घर की देखभाल करती है। आमतौर पर उन्हें किसी शो में माँ की भूमिका निभाने में संकोच होता है। यह बच्चा शादी से नहीं जन्मा है। यह मनमीत का बच्चा है और जब आप शो देखेंगे, तब आपको पता चलेगा कि मनमीत ने अपनी जिन्दगी में कुछ फैसले क्यों लिए हैं। मनमीत का निडर और आत्मनिर्भर होना उन्हें पसंद है। वह आर्किटेक्चर पढ़ना चाहती थी और उसने यह अपने परिवार की इच्छाओं के विरोध में जाकर किया है। वह एक आर्किटेक्चरल कंपनी की सीईओ है। उसके पिता ने उसे चेतावनी दी थी कि इस इंडस्ट्री में पुरूषों का दबदबा है, लेकिन वह कुछ बड़ा करना चाहती थी। सुरभि को ऐसी भूमिकाएं करना पसंद है, जो लोगों को प्रेरित करती हों और मनमीत ने उन्हें प्रेरित किया है। इस कारण यह शो उनके लिए खास है।