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शाहीराज की मिटती निशानियाँ !

के. विक्रम राव
क्या इतिफाक है ? ठीक जिस वक्त (8 सितम्बर 2022) स्काटलैण्ड के बालमोरल ग्रीष्मकालीन दुर्ग में मलिकाये बर्तानिया एलिजाबेथ प्रथम की मौत हुयी, तभी सात हजार किलोमीटर दूर नयी दिल्ली के इंडिया गेट पर लगे राजछत्र तले नरेन्द्र मोदी उन्हीं के दादा सम्राट जार्ज पंचम की मूर्ति की जगह साम्राज्य के तीव्रतम बागी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 28-फिट ऊंची ग्रेनाइट की चट्टानी प्रतिमा लगा रहे थे। मोदी के शब्द थे: ‘‘गुलामी की निशानी मिटा दी गयी है। दासता अब इतिहास के गर्त में समां गयी।‘‘ शायद कुछ पुराने लोगों में टीस उठी हो क्योंकि रानी के राज्याभिषेक समारोह (मंगलवार, 2 जून 1953) पर जवाहरलाल नेहरू विशेष रूप से लंदन में शामिल हुये थे। एलिजाबेथ जिनकी आयु 96 वर्ष की थी ने अपने ज्येष्ट पुत्र 73-वर्षीय युवराज चार्ल्स तृतीय को वर्षों से सत्ता हेतु उत्तराधिकार की लाइन में प्रतीक्षारत रखा। शाहजादा इंतजार करते बुढ़ा गये।




