लखनऊ : जन्म से ही कई गम्भीर बीमारियों से जूझ रहे एक प्री- मेच्योर जन्मे शिशु को सहारा हॉस्पिटल के डाक्टरों ने नया जीवन दिया। जब शिशु छह सप्ताह तक एनआईसीयू में चले उपचार के बाद पूरी तरह से स्वस्थ हो गया, तब शिशु के माता-पिता ने सहारा हास्पिटल के डाक्टरों, स्टॉफ और यहां उपलब्ध अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
गत अप्रैल माह में गर्भवती महिला मरीज आपातकालीन स्थिति में सहारा हॉस्पिटल में आयी। महिला की हालत को देखते हुए सहारा हॉस्पिटल की स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋचा गंगवार ने जांच के बाद आपातकालीन सी- सेक्शन की सलाह दी क्योंकि बच्चा सेप्टिक अवस्था में था। प्री मेच्योर डिलिवरी के बाद शिशु को एनआईसीयू में भर्ती किया गया। प्री मेच्योर डिलीवरी होने की वजह से शिशु को श्वसन संकट सिंड्रोम, एपनिया, एनीमिया, पीलिया और संक्रमण हो गया था। उसे एक वेंटिलेटर से श्वसन सहायता दी गयी और पीलिया के लिए फोटोथेरेपी के साथ-साथ उसके अपरिपक्व फेफड़ों को, प्रत्येक सांस के बीच फुलाए जाने में मदद करने के लिए सर्फेक्टेंट थेरेपी भी दी गई।
डिलीवरी प्री- मेच्योर होने के कारण शिशु का वजन 28 सप्ताह में मात्र 1060 ग्राम था। जैसे-जैसे दिन बीततेे गए, उसमें वजन बढ़ने के साथ सुधार के लक्षण भी दिखने शुरू हो गए। एक समय के बाद, जैसे-जैसे शिशु बच्ची कुछ ठीक दिखने लगीं, तब उसको सेप्टीसीमिया के दौरे पड़ने लगे। यह वास्तव में बच्ची के माता-पिता के लिए बेहद परेशान करने वाला अनुभव था, लेकिन डाक्टर की कुशल चिकित्सा व देखभाल के तहत, बच्ची एक के बाद एक चिकित्सा लड़ाई लड़ती रही और उससे जीत कर बाहर निकल आयी। एनआईसीयू डॉक्टरों की टीम, डॉ. मोनिका कार, डॉ. पवन, डॉ. उमेश, डॉ. आलोक डॉ. सुमेधा और डॉ. राशिद के साथ मंगल, मोनिका , प्रदीप, संध्या ज्योति , अभिलाषा, सौरभ और एकता जैसी नर्सों के चिकित्सकीय देखभाल और भावनात्मक सपोर्ट ने अपना असर दिखाया। डा. एम. यू. हसन (एच.ओ.डी) के अनुसार इस केस में उनके अनुभव से काफी सहायता मिली। कुछ दिनों के बाद महिला मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल गयी।
महिला ने बताया कि अक्सर उसके पति उससे यह कहते थे कि जब वह दूध देने के लिए सहारा हॉस्पिटल जाते थे, तो वहां अपने शिशु के प्रति डॉक्टरों की देखभाल और नर्सिंग केयर से दिल में बहुत शांति मिलती थी। सहारा अस्पताल की तारीफ करते हुए बच्ची के माता- पिता ने बताया कि यहां का स्टाफ काफी मददगार था और उसने सभी आवश्यक उपकरण की उनको जानकारी भी दी। छह सप्ताह के एनआईसीयू प्रवास के साथ डा. ऋचा व डॉक्टर मोनिका के अथक प्रयासों की वजह से बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है और माता-पिता बेहद खुश हैं।
सहारा इंडिया परिवार के वरिष्ठ सलाहकार अनिल विक्रम सिंहजी ने बताया कि हमारे अभिभावक “सहाराश्री” ने विश्वस्तरीय सुविधाओं एवं अत्याधुनिक उपकरणों से युक्त सहारा हॉस्पिटल का निर्माण कराया है, जहां गम्भीर से गम्भीर अवस्था में आये मरीजों को उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं अति कुशल टीम द्वारा निरंतर प्रदान की जा रही हैं। श्री सिंह ने बताया कि सहारा हॉस्पिटल में नियोनेटल विभाग अति कुशल अनुभवी व अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है और उचित मूल्य पर अपनी सेवाएं दे रहा है।