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एपी सेन कॉलेज में संस्कृत दिवस और हर घर तिरंगा सप्ताह

प्राचीन ही नहीं, भविष्य की भाषा भी संस्कृत

                    चेरिश टाइम्स न्यूज़
लखनऊ । आजादी के अमृत महोत्सव पर हर घर तिरंगा के अंतर्गत स्वतंत्रता सप्ताह का शुभारंभ हुआ। इससे पहले संस्कृत दिवस की पूर्व वेला पर कॉलेज के संस्कृत विभाग द्वारा कार्यक्रम का आयोजन भी हुआ। स्वतंत्रता सप्ताह के कार्यक्रम में एनसीसी प्रभारी डा.मोनिका श्रीवास्तव, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डा. मोनिका अवस्थी व कंचन मिश्रा और आजादी का अमृत महोत्सव की समन्वयक डा.कीर्ति गौड़ और समन्वय समिति सदस्यों सहित कॉलेज की छात्राओं ने भाग लिया।
इस मौके पर महाविद्यालय को तिरंगे रंगों में सजाया गया था। मुख्य अतिथि समाज सेविका रेशू भाटिया ने छात्राओं को तिरंगे भी वितरित किये। प्राचार्य रचना श्रीवास्तव ने झण्डा संहिता में हुए आवश्यक संशोधन से अवगत कराया। उन्होंने तिरंगा फहराने के सही नियम की जानकारी भी साझा की। साथ ही हरी झण्डी दिखाकर जनमानस राष्ट्र प्रेम और सम्मान की भावना जागृत करने के उद्देश्य से जनमानस जागरूकता रैली का शुभारंभ किया। समारोह में राष्ट्रीय सेवा योजना प्रतिभागियों सहित छात्राओं और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
महाविद्यालय की छात्राओं ने हर घर तिरंगा अभियान सफल बनाने का संकल्प लेकर आसपास के क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाया। मौके पर ही महाविद्यालय द्वारा डिजिटल पोस्टर अभियान भी प्रारंभ किया गया। मीडिया प्रभारी श्वेता तिवारी ने बताया कि इससे पूर्व मनाए गए संस्कृत दिवस कार्यक्रम का प्रारंभ बीए प्रथम वर्ष की छात्रा मनीषा यादव और सरस्वती वंदना और छात्रा सपना के साथ- “महा महानीय मेधाविन…..” गाकर अतिथि सत्कार के साथ हुआ।

प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने संस्कृत दिवस की बधाई देते हुए कहा कि संस्कृत भाषा भारतीय संस्कृति के विरासत का प्रतीक है। यह एक ऐसी कुंजी है जो हमारे प्राचीन ग्रंथों और धार्मिक, सांस्कृतिक परंपराओं के असंख्य रहस्य को जानने में मदद करती है। संस्कृत हमारे दार्शनिकों, वैज्ञानिकों, गणितज्ञों, नाटककारों, कवियों व व्याकरण आचार्यों की भाषा रही है। इसी प्रकार कंप्यूटर के लिए संस्कृत सबसे उपयोगी भाषा है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय संस्कृत युग होगा और संस्कृत पढ़ने वाला प्रत्येक विद्यार्थी रोजगार युक्त होगा| मुख्य अतिथि भारतीय जनता युवा मोर्चा के क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी आशुतोष ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार संस्कृत है। हम सभी को संस्कृत का अध्ययन करना चाहिए। यह व्यक्तित्व निर्माण में भी सहायक होती है। डॉ. मंजू सिंह एसोसिएट प्रोफेसर शिक्षा शास्त्र विभाग ने संस्कृत की महत्ता बताते हुए विद्यार्थी के पांच लक्षण, गुरु की महिमा, धर्म के 10 लक्षण, परोपकार एवं विद्या की महत्ता आदि विषयों पर प्रकाश डाला। एशियन कल्चर विभाग की प्रोफेसर डॉ.मंदाकिनी असिस्टेंट ने संस्कृति और संस्कृत का संबंध बताते हुए राज तरंगिणी, मुद्राराक्षस एवं महाभारत आदि ग्रंथों में निहित ज्ञान विज्ञान के विषय में छात्राओं को बताया। इसी क्रम में बीए प्रथम वर्ष की छात्राओं आराध्या तिवारी, पिंकी कश्यप, संजना तिवारी, इकरा व ऋचा पांडे आदि ने भारतीय संस्कृति और संस्कृत विषय पर अपने विचार रखें। अंत में कार्यक्रम समन्वयक व असिस्टेंट प्रोफेसर संस्कृत विभाग डॉ.ऋचा मुक्ता द्वारा मुख्य अतिथि एवं सभी उपस्थित शिक्षकों डॉ.मंजू सिंह, डॉ. मोनिका श्रीवास्तव, डॉ. मोनिका अवस्थी, डॉ.मंदाकिनी, सुश्री चंद्रकला के साथ सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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