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सुमित कुमार की प्रदर्शनी युवा कलाकारों के लिए उदाहरण : अवधेश मिश्र

युवा कलाकार सुमित कुमार की प्रदर्शनी कला स्रोत कला वीथिका में 5 जुलाई 2022 तक

 लखनऊ. डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के ललित कला परास्नातक विद्यार्थी सुमित कुमार की प्रथम एकल कला प्रदर्शनी का आज कला स्रोत आर्ट गैलरी में शुभारंभ हुआ।

प्रदर्शनी के मुख्य अतिथि प्रख्यात चित्रकार, कला समीक्षक और संपादक डॉ अवधेश मिश्र थे। प्रदर्शनी में 52 चित्र लगाए गए हैं जिनका अवलोकन करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि सुमित कुमार युवा कलाकारों के लिए उदाहरण है जिसने परास्नातक पाठ्यक्रम में अपने बचपन में जिए गए पलों को अपने चित्रों में अभिव्यंजित किया है।

नॉस्टैल्जिया प्रदर्शनी को देखना अपने बचपन में बार-बार लौटना है। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की पूर्व कुलपति प्रो पूर्णिमा पाण्डेय ने कहा कि किसी को गढ़ कर एक आकार देना बड़ी बात होती है और अवधेश मिश्र के निर्देशन में उभरते इस कलाकार का अपनी जड़ों से जुड़े रहना इसे बहुत ऊंचाई पर ले जायेगा।

वास्तु कला महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो वन्दना सहगल ने कहा कि ऐसा गुरु भी सबको नहीं मिलता जो शिष्य को अपने से अधिक ऊंचाई पर देखना चाहे। सुमित के चित्र आंखों को खींचते हैं और एक देखने बतियाने के लिए एक कौतूहल पैदा करते हैं। कला समीक्षक डॉ लीना मिश्र ने कहा कि हम सबकी जिंदगी में ऐसे अनुभव रहे हैं जो जीवन की आपाधापी में परतों के नीचे दब जाते हैं, जिसे सुमित कुमार ने दोबारा अपनी चित्र में जिया है। स्कूल से बंक मारते बच्चे, टीवी का एंटीना ठीक कर रामायण और महाभारत सीरियल देखते बच्चे, रेडियो पर सदाबहार गाने सुनते बुजुर्ग दंपत्ति, पड़ोसी के बाग से आम तोड़ने के लिए दोस्त की पीठ पर बैठे बच्चे, भैंस की पीठ पर बैठकर चरवाही करते बच्चे, एक-दूसरे को उछालते बच्चे, काठ के घोड़े पर या रेलगाड़ी बनाकर एक दूसरे के पीछे लाठी पर बैठे बच्चे, मेले में पिपहरी बजाते और लड्डू खेलते बच्चे, खटिया बीनता गृहस्थ, साइकिल पर सामान लेकर जाते आदमी के साथ सींग और मुखौटा लगाए आगे बैठा छोटा बच्चा, बाइसकोप, गुब्बारे और आइसक्रीम फेरीवाला, जुगनू और तितली पकड़ते बच्चे, कैंची साइकिल चलाता बच्चा जिसके कैरियर पर उकुडू बैठा दूसरा बच्चा, हैंडपंप के नीचे नहाता बच्चा आदि चित्रों की अभिव्यंजना देखते ही बनती है। नोस्टल्जिया श्रृंखला में सुमित ने अपना मुहावरा गढ़ा है जो उनके स्वभाव की तरह सीधी साधी और सरल भाषा में है। कई चित्रों में दृश्य के परे जाकर नए रूप गढ़ना काव्य और संगीत का भाव पैदा करता है। लकड़ी की पट्टी पर खींची जाने वाली सतरों के पीछे परत दर परत रचा गया संसार दर्शकों में उत्सुकता पैदा करता है। प्रदर्शनी के क्यूरेटर अनुराग डिडवानिया और मानसी डिडवानिया ने बताया कि यह प्रदर्शनी 5 जुलाई 2022 तक दर्शकों के अवलोकनार्थ 12:00 बजे से 7:00 बजे शाम तक खुली रहेगी, जिसमें अफॉर्डेबल प्राइस में सुमित कुमार की कृतियों को कलाप्रेमी खरीद सकते हैं।
इस अवसर पर वनिता यादव, मोहम्मद शकील फौजदार, अनिता वर्मा सहित अनेक युवा कलाकार और कलाप्रेमी उपस्थित थे।

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