श्रम संवाद 2026- चारों नवीन श्रम संहिताओं के ज़मीनी क्रियान्वयन पर केंद्र और उत्तर प्रदेश का मंथन
संहिताएँ श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ युवाओं के लिए रोज़गार सृजन में सहायक होंगी : अनिल राजभर

लखनऊ : श्रम विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा 26 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के होटल ताज पैलेस में श्रम संवाद-2026 कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अनिल राजभर, मंत्री, श्रम एवं सेवायोजन, उत्तर प्रदेश सरकार रहे।
कार्यक्रम में मंत्री, श्रम एवं सेवायोजन, उत्तर प्रदेश अनिल राजभर ने श्रम संहिताओं को हर श्रमिक तक पहुँचाने के लिए निरंतर संवाद का आहवान किया। सामाजिक सुरक्षा, निर्माण श्रमिक कल्याण, विदेश रोज़गार और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विस्तृत चर्चा की।
श्रम संहिताओं, श्रम कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा विषय पर दो-दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता निर्माण एवं जागरूकता कार्यक्रम “श्रम संवाद 2026” का आज होटल ताज, लखनऊ में शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम का आयोजन श्रम विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से किया जा रहा है।
श्री राजभर ने कहा कि सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है और 29 श्रम कानूनों के स्थान पर चार श्रम संहिताएँ विकसित भारत, औद्योगिक विकास तथा पाँच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे संवाद ज़मीनी स्तर तक और श्रम संगठनों के साथ निरंतर होने चाहिए, ताकि सुधारों के प्रति कोई नकारात्मक वातावरण न बने। उन्होंने कहा कि संहिताएँ श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ युवाओं के लिए रोज़गार सृजन में सहायक होंगी, और इनके लाभ हर श्रमिक तक पहुँचाने होंगे।
अपर मुख्य सचिव, श्रम एवं सेवायोजन डॉ. आशीष कुमार गोयल ने स्वागत संबोधन में बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य श्रम संहिताओं, श्रम कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा पर राज्य स्तरीय क्षमतावृद्धि एवं जागरूकता करना है।
सचिव, श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय डॉ. चन्द्र भूषण कुमार ने अपने संबोधन में बताया कि नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पर लगभग 7 करोड़ रोज़गार-इच्छुक और करीब 60 लाख नियोक्ता पंजीकृत हैं। उन्होंने प्रदेश में ईपीएफ व ईएसआईसी कवरेज बढ़ाने, गिग, प्लेटफॉर्म, निर्माण व अन्य असंगठित श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा पहुँचाने तथा प्रदेश के लिए तैयार जनपदवार रोज़गार संभावना आकलन के उपयोग पर बल दिया।
श्रमायुक्त उत्तर प्रदेश सुश्री सौम्या अग्रवाल ने श्रम कल्याण व श्रम सुधारों के सम्बन्ध में एक प्रस्तुतीकरण किया, जिसमें जोखिम-आधारित व रैंडमाइज़्ड निरीक्षण, निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण, बिना शुल्क सुरक्षा उपकरण, लिखित सहमति व सुरक्षा व्यवस्था के साथ महिलाओं को रात्रि पाली की अनुमति, श्रम न्यायालयों के लिए पेपरलेस ई-कोर्ट प्रणाली, और चिन्हित 1,765 में से 764 बाल श्रम हॉटस्पॉट को बाल श्रम मुक्त घोषित किया जाना शामिल है।
मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) सुश्री सोनल मिश्रा ने केंद्रदृराज्य समन्वय को और सुदृढ़ करने पर बल दिया। खुले सत्र में उद्योग प्रतिनिधियों ने लाइसेंस, ईएसआईसी डिस्पेंसरी व वेतन से जुड़े व्यावहारिक प्रश्न रखे, जिनका अधिकारियों ने समाधान किया।
अपर सचिव, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार अजय शर्मा ने ई-श्रम, श्रम सुविधा, समाधान, नेशनल करियर सर्विस नेटवर्क और प्रस्तावित लेबर स्टैक की जानकारी दी,
निदेशक, सेवायोजन एवं प्रशिक्षण नेहा प्रकाश ने बताया कि रोज़गार संगम पोर्टल पर 45.7 लाख रोज़गार-इच्छुक पंजीकृत हैं और प्रदेश के लगभग 6,000 श्रमिक इज़राइल में नियोजित हुए हैं।
विशेष सचिव, श्रम कुणाल सिल्कू ने बताया कि प्रदेश में संहिताओं के अंतर्गत नियमावलियाँ जारी कर दी गई हैं तथा ई-श्रम पर 8.42 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों के पंजीकरण के साथ उत्तर प्रदेश देश में प्रथम है। क्रियान्वयन की समीक्षा में बताया गया कि औद्योगिक संबंध संहिता की नियमावली को 16 अक्टूबर को राज्य मंत्रिमंडल ने अनुमोदित किया; नए नियमों के तहत लाइसेंसिंग 15 नवंबर तक पोर्टल पर आरंभ होगी; रिटर्न व निरीक्षण प्रणाली 21 दिसंबर तक नए स्वरूप में होगी; तथा राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड व बीओसीडब्ल्यू बोर्ड की अधिसूचना लगभग दो सप्ताह में जारी होगी।
संयुक्त सचिव, श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय आशुतोष ए.टी. पेडनेकर ने बताया कि गिग व प्लेटफॉर्म श्रमिक, जो आज कार्यबल का लगभग 1.5 प्रतिशत हैं, 2030 तक करीब 4 प्रतिशत हो सकते हैं; 22 एग्रीगेटर जुड़ चुके हैं और 12.63 लाख प्लेटफॉर्म श्रमिक ई-श्रम पर पंजीकृत हैं।
उ.प्र. भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की सचिव सुश्री पूजा अग्रवाल ने बताया कि बोर्ड में 2 करोड़ से अधिक श्रमिक पंजीकृत हैं, 11 कल्याणकारी योजनाएँ चल रही हैं तथा प्रत्येक मंडल में एक, कुल 18 अटल आवासीय विद्यालय संचालित हैं।
ई0एस0आई0सी0 के संयुक्त निदेशक के.सी. झा ने बताया कि प्रदेश में 34 लाख बीमित व्यक्ति और 1.30 करोड़ लाभार्थी आच्छादित हैं। ईपीएफओ ने बताया कि लगभग 70 प्रतिशत दावे अब ऑटो मोड में निस्तारित हो रहे हैं तथा 27 अक्टूबर को सभी 75 जनपदों में “निधि आपके निकट” कार्यक्रम होगा।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय आयुक्त अश्विनी गुप्ता ने नये कोडों के अन्तर्गत भविष्य निधि के विभिन्न प्रावधानों के बारें में बताते हुए भविष्य निधि की ऑटोक्लेम की व्यवस्था के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन जुनैद अहमद, अपर श्रमायुक्त, उत्तर प्रदेश ने किया।
कार्यक्रम के दूसरे दिन राज्य मंत्री, श्रम एवं सेवायोजन मनोहर लाल मन्नू कोरी की उपस्थिति में चारों श्रम संहिताओं के अंतर्गत अनुपालन पर तकनीकी सत्र आयोजित होंगे।
आज के कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से श्रम कानूनी सलाहकार, उद्योगों के प्रतिनिधि, एच.आर मैनेजर, चार्टड एकाउटेण्ट, लीगल कंसलटेन्ट तथा सिविल सोसाइटी के लगभग 300 प्रतिनिधियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
कार्यक्रम में लखनउ क्षेत्र लखनउ की अपर श्रमायुक्त कल्पना श्रीवास्तव, कानपुर क्षेत्र के अपर श्रमायुक्त शमीम अख्तर, नोएडा के अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी, मुख्यालय कानपुर के अपर श्रमायुक्त पी.के. सिंह, उप श्रमायुक्त अजय मिश्रा, उप श्रमायुक्त ए.के. सिंह, उप श्रमायुक्त गोविन्द यादव सहित श्रम विभाग के क्षेत्रीय उप श्रमायुक्त व जनपदों से सहायक श्रमायुक्त व जनपदों से श्रम प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।



