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नये औजार से कबीर की खुदाई’ किताब दे रहे नया विमर्श

बलरामपुर गार्डन में 23वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला : पांचवां दिन

लखनऊ । दलित साहित्य अत्यंत समृद्ध और वैचारिक रूप से शक्तिशाली धारा है। यह साहित्य सदियों के शोषण, दर्द, संघर्ष और आत्मसम्मान की अभिव्यक्ति है। बलरामपुर गार्डन में चल रहे 23वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में दलित विमर्श की क़िताबें भी अच्छी तादाद में बिक रही हैं। गतिविधियों भरे मेले का आज पांचवा दिन था। बौद्ध और दलित साहित्य के लिए जाने गये सम्यक प्रकाशन के स्टाल पर नयी किताबों में आरएल चन्द्रापुरी की भारत में ब्राह्मणराज और पिछड़ा वर्ग आंदोलन, राजकुमार इतिहासकार की नागवंशी भारत, डा.राजेंद्र प्रसाद सिंह व डा.शशिकला की नये औजार से कबीर की खुदाई पसंद की जा रही हैं। सन् 1929 में छपी सुंदरलाल सगर की यादव (जाटव) जीवन पहला दूसरा भाग भी फिर छपकर आयी है। अम्बेडकर साहित्य के अलावा यहां स्मृतिचिन्ह और उपहार की अनेक सामग्री है। सेतु प्रकाशन में अशोक गोपाल की पुरस्कृत अनुवादित किताब बाबासाहेब डा.अम्बेडकर : जीवन और विचार को तवज्जो दक्षिण रही है तो राजपाल के स्टाल पर राजनीति विज्ञान पर रतनलाल द्वारा संपादित आम्बेडकर और संसदीय लोकतंत्र चर्चा में है। संविधान प्रचार के स्टाल पर संविधान की कई आकारों की पुस्तकों के अलावा नयी किताबों में लोकतंत्र को केंद्र में रखकर लिखी गयी डा.देवेन्द्र प्रताप यादव की ‘जहरीला बहुमत’ बहुत ही सामयिक प्रश्न उठाती है। रामकुमार गौतम के संपादन में निकली दूसरी नयी पुस्तक ‘बहुजन पर प्रदर्शक’ 26 विभूतियों पर है। बौद्ध साहित्य की अनेक पुस्तकों में डा.जगन्नाथ उपाध्याय की ‘भारत को बुद्ध धर्म की देन’ प्रमुख हैं। इससे इतर प्रभात के स्टाल पर लेखक महेन्द्र कुमार अग्रवाल अपनी नयी किताब मेरा संभल महान को लेकर पुस्तक प्रेमियों के बीच सम्भल के इतिहास सहित कल्कि धाम, हरिहर मंदिर, वहां की सनातन परम्परा और सती स्मारकों के बारे में उत्साह से बताते दिखायी दिये।

मुख्य मंच पर शाम को सर्वेश अस्थाना की परिकल्पना में उप्र साहित्य सभा के प्रणाम परिवार सम्मान और काव्य स्व.बाँकेलाल-विमला देवी, गिरिजाशंकर द्विवेदी, कृष्णचन्द्र- शारदा देवी, डा.उर्मिलेश, विजय बहादुर सिंह की याद में नरेंद्र गरल बदायूं, बलराम श्रीवास्तव मैनपुरी, अर्जुन सिंह चाँद, डा.राजीव राज इटावा और गजेन्द्र प्रियांशु बाराबंकी को प्रणाम सम्मान से परिवारीजनों ने नवाजा। फिर मुकुल महान के संचालन में काव्य समारोह चला।
इससे पहले आज सुबह नवसृजन के समारोह में दो पुस्तकें निबंध संग्रह सद्चित्त आनन्द और काव्य संग्रह क से कवि डा.मिथिलेश दीक्षित, प्रो.ओमप्रकाश‌ पाण्डेय, ओम् नीरव, नरेन्द्र भूषण, योगेश आदि की उपस्थिति में विमोचित होकर पाठकों के बीच पहुंचीं। अभा अगीत परिषद के काव्य समारोह में हर रस की रचनाओं की गूंज रही। अवधी साहित्य पर चले संवाद में पद्मश्री विद्याविंदु सिंह, डा.रामबहादुर मिसिर, डा.करुणा पाण्डेय, विजय भास्कर पाण्डेय और डा. हरिशंकर मिश्र ने विचार रखे।

*द्वितीय मंच पर*

दूसरे मंच पर दिन में अपनी कथा रचना पाठ करते हुए संजीव जायसवाल पुस्तक प्रेमियों के बीच थे। ओपेन माइक के संग किताबों पर चर्चा चली। शाम को यहां
जन संस्कृति मंच की ओर से कौशल किशोर की किताब ‘समय, साहित्य और समाज’ का विमोचन साहित्यकार शकील सिद्दीकी की अध्यक्षता में हुआ। मौजूदा हालात टटोलती इस किताब पर शकील सिद्दीकी, दिनेश प्रियमन, डा.उषा राय, शैलेश पंडित और कुमार विनीताभ ने विचार रखे। संचालन शांतम निधि ने किया और आभार सचिव फरजाना महदी ने व्यक्त किये।
नि: शुल्क प्रवेश वाला ये मेला रोज सुबह 11 बजे से रात नौ बजे तक जारी इस मेले में खरीदी गई हर पुस्तक पर कम से कम 10 प्रतिशत की छूट मिल रही है।
फ़ोर्स वन द्वारा आयोजित पुस्तक मेले के सहयोगी संस्थान यूपी मेट्रो, रेडियोसिटी, ओरिजिंस, किरण फाउंडेशन, ज्वाइन हैंड्स फाउंडेशन, लोकआंगन, विश्वम् फाउंडेशन, विजय स्टूडियो, गोल्डेन ग्रास और कविता किस्से कहानियां हैं।

आज के कार्यक्रम/6 अक्टूबर
सुबह 11:00 बजे काव्यगोष्ठी- सुंदरम,
अपराह्न 12: 30 बजे सम्मान- वरिष्ठ कविजन,
अपराह्न 2: 00 बजे
काव्य समारोह- नवोदय,
अपराह्न 3: 00 बजे आयोजन- कविता किस्से कहानियां,
शाम 4: 00 बजे कार्यक्रम- ब्लू ट्राप
शाम 5: 00 बजे
पुस्तक विमोचन- विवेक शुक्ल,
शाम 6: 00 बजे
पुस्तक चर्चा
शाम 7: 30 बजे पुस्तक विमोचन- कामिनी श्रीवास्तव

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