रंगदारी का बेताज बादशाह, दुबग्गा में खौफ का खेल!
मुकदमा दर्ज, अब सलाखों के पीछे का इंतजार!

मो. सैफ साबरी
लखनऊ की फिजाओं में कानून के राज के दावे गूंजते हैं और राजधानी के दुबग्गा थाना क्षेत्र के रिंग रोड स्थित ग्रीन व्यू अपार्टमेंट की दास्तान इन दावों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। यहां कानून की किताबों में धाराएं दर्ज हो चुकी हैं, मुकदमों की स्याही भी सूख चुकी है, लेकिन इस मामले के केंद्र में बैठा हिस्ट्रीशीटर और कुख्यात अपराधी मिर्ज़ा शाहरुख बेग अभी भी कानून की पकड़ से बाहर है।
यह कोई आम अपराधी नहीं है, बल्कि इसका इतिहास पहले से ही खून और जुर्म के काले पन्नों से रंगा है। मिर्ज़ा शाहरुख बेग पहले भी हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में जेल की हवा खा चुका है, जो इस बात का पुख्ता सबूत है कि यह एक बेहद खूंखार और शातिर अपराधी है। इसके नाम पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, और जमानत पर बाहर आने के बाद भी इसकी आपराधिक भूख शांत नहीं हुई है।
आरोप है कि इस शख्स ने ग्रीन व्यू अपार्टमेंट के फ्लैट स्वामियों से पांच लाख रुपये की रंगदारी की मांग को लेकर आतंक मचा रखा है। हालत यह है कि रंगदारी न मिलने पर यह अपराधी अपने गुर्गों के साथ मिलकर किराएदारों को डरा-धमकाकर रातों-रात फ्लैट खाली करवाने और दिनदहाड़े फ्लैटों को ध्वस्त कर कब्जा करने का प्रयास करता है। कभी किसी की गाड़ी की हवा निकालना, तो कभी किसी का आशियाना उजाड़ देना, इसके आतंक से 24 परिवारों की नींद उड़ी हुई है। शिकायतकर्ता जहीर अली बेग को व्हाट्सएप पर फ्लैट तोड़ने की धमकियां तक दी जा चुकी हैं। खौफ का आलम यह है कि कई लोग अपनी जान-माल की सलामती के डर से असहनीय स्थितियों में जीने को मजबूर हैं।
दुबग्गा पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी का पहला कदम बढ़ा दिया है। खाकी ने कानूनी शिकंजा कसने की शुरुआत कर दी है, जो स्वागतयोग्य है।
अब जब मुकदमा दर्ज हो चुका है, तो क्षेत्रीय नागरिकों और पीड़ित परिवारों की निगाहें पूरी तरह से दुबग्गा पुलिस पर टिकी हैं। लोगों को पूरा विश्वास है कि पुलिस अपनी मुस्तैदी का परिचय देते हुए इस शातिर अपराधी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजेगी।
यह समय अपराधियों के हौसलों को कुचलने और आम जनता के मन में कानून के प्रति अटूट विश्वास को और मजबूत करने का है। यदि इस दुर्दांत अपराधी को जल्द गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजा गया, तो यह किसी बड़ी अनहोनी को दावत दे सकता है। उम्मीद यही है कि खाकी अपनी मुस्तैदी दिखाते हुए इस मामले का ऐसा सुखद अंत करेगी, जिससे अपराधियों के दिल में कानून का खौफ साफ नजर आए।




