संस्कृति राष्ट्र का शरीर है। चित्त उसकी आत्मा है। विचार उसका प्राण है : प्रो.ए. पी. तिवारी

लखनऊ । आजादी के समय भाऊराव देवरस की प्रेरणा से पं दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी बाजपेयी जी सम्पादन मे राष्ट्रधर्म पुस्तक 31 अगस्त 1947 को प्रकाशित होना शुरू हुई।
राष्ट्रवादी विचारों की यात्रा के 79 वर्ष पूर्ण होने पर बच्चो को कहानी चित्रकला आदि मे पुरस्कृत करके राष्ट्रधर्म मासिक पत्रिका के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हो प्रो.ए. पी. तिवारी ने कहा की संस्कृति राष्ट्र का शरीर है। चित्त उसकी आत्मा है।
विचार उसका प्राण है।
मंच संचालन करते हुए प्रो ओम प्रकाश सिंह ने राष्ट्रधर्म के संस्थापक निदेशक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयन्ती के उपलक्ष्य में आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं को कार्यक्रम में सम्मान प्राप्त किया । चित्र प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाले सुधांशु चौहान, द्वितीय स्थान सुदीप्त सिंह और तृतीय स्थान पाने वाली महक रावत को सम्मानित किया गया। प्रोत्साहन पुरस्कार प्रियांशी मिश्रा, लक्ष्मी सिंह और गौरी शुक्ला को दिया गया।
लेखन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाली अंजू, शिवा श्रीवास्तव, द्वितीय स्थान पाने वाले प्रियांशु चौहान, वसुन्धरा बारी तथा तृतीय स्थान पाने प्रियांशु आर्य एवं अंशिका को सम्मानित किया गया। लेखन प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दो-दो प्रतिभागियों को दिये गये। प्रोत्साहन पुरस्कार आकांक्षा जय प्रकाश सिंह को दिया गया।
कार्यक्रम में राष्ट्रधर्म के सितम्बर अंक का विमोचन हुआ।
राष्ट्रधर्म के पाठको डाॅ अवनीश मिश्र और राममिसिर दीक्षित ने राष्ट्रधर्म पुस्तक की लेखन शैली और विषय वस्तु पर अपने प्रेरणादायक विचार व्यक्त किये।
पुस्तक विमोचन मे उपस्थित अतिथिगणो पाठको, सहयोगियो को धन्यवाद ज्ञापन सर्वेश चन्द्र द्विवेदी ने किया।



