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“प्रबंधन शिक्षा को तकनीक, नीति और दीर्घकालिक रणनीतिक सोच से जोड़ना आवश्यक,” युगांतर ’26 में बोले संजीव सान्याल

नई दिल्ली : श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC), यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली में आयोजित पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन ग्लोबल बिज़नेस ऑपरेशंस (PGDGBO) के वार्षिक प्रबंधन सम्मेलन ‘युगांतर ’26’ का दूसरे और अंतिम दिन समापन हुआ। समापन सत्र में उद्योग नेतृत्व, उद्यमशीलता की दृढ़ता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित परिवर्तन के नीतिगत आयामों पर विस्तृत चर्चा हुई।

श्रिधर श्रीराम ऑडिटोरियम में आयोजित वैलिडिक्टरी सत्र को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल ने संबोधित किया, वहीं कार्यक्रम की मेजबानी एसआरसीसी की प्राचार्य प्रो. सिमरित कौर ने की। इस अवसर पर वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. मिशा गोविल (जीबीओ कोर्स कोऑर्डिनेटर), डॉ. सपना बंसल (कन्वीनर, युगांतर 2026) और डॉ. सुनीता शर्मा (को-कन्वीनर, युगांतर 2026) भी उपस्थित रहीं।

*नीति दिशा और संस्थागत समन्वय*

अपने संबोधन में संजीव सान्याल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भारत के व्यापक आर्थिक परिवर्तन के संदर्भ में रखते हुए कहा कि उच्च शिक्षा को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने समुद्री अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में हो रहे संरचनात्मक सुधारों — जहाज निर्माण, बंदरगाह, स्वामित्व और फ्लैगिंग नियमों तथा दीर्घकालिक वित्तीय व्यवस्थाओं — का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, “हम बंदरगाह, जहाज निर्माण और स्वामित्व ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश कर रहे हैं। पिछले बारह महीनों में स्वामित्व और फ्लैगिंग नियमों में सुधार किए गए हैं और बैंकों को इस क्षेत्र में दीर्घकालिक ऋण देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्थापित वैश्विक नेतृत्व को रातोंरात बदला नहीं जा सकता, लेकिन अगले पाँच वर्षों में सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र के साथ भारत एक विश्वसनीय वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है।”

उन्होंने रेखांकित किया कि मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जनसांख्यिकीय क्षमता, नीतिगत स्पष्टता और संस्थागत प्रतिबद्धता आवश्यक है।

*जोखिम, क्रियान्वयन और राष्ट्रीय क्षमता*

भारत की ऐतिहासिक जहाज निर्माण परंपरा को प्रदर्शित करने वाली अपनी हालिया समुद्री यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ऐतिहासिक कथाओं को व्यवहारिक क्षमता में रूपांतरित करना था।

उन्होंने कहा, “इस पहल का उद्देश्य यह दिखाना था कि भारत की सभ्यतागत शक्ति जोखिम लेने वालों — खोजकर्ताओं, उद्यमियों और नवप्रवर्तकों — से निर्मित हुई है। कुछ महत्वाकांक्षी सोचें और उसे गंभीरता से क्रियान्वित करें; प्रभावी क्रियान्वयन ही विश्वसनीयता बनाता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि प्रबंधन के विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता के साथ नीतिगत समझ और दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टि विकसित करनी होगी, ताकि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रभावी भूमिका निभा सकें।

एसआरसीसी की प्राचार्य प्रो. सिमरित कौर ने युगांतर ’26 के शैक्षणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह सम्मेलन उद्योग, नीति-निर्माताओं और विद्यार्थियों के बीच संवाद का सशक्त मंच बना हुआ है। उन्होंने विशिष्ट अतिथि, संकाय सदस्यों, आयोजन समिति और विद्यार्थियों का सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह कार्यक्रम संस्थान की शैक्षणिक गंभीरता और सामूहिक प्रयास की भावना को प्रतिबिंबित करता है।

कार्यक्रम का समापन डॉ. मिशा गोविल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ।

औपचारिक सत्रों के अतिरिक्त, दूसरे दिन “ग्रूवियो: द अल्टीमेट ग्रुप डांसिंग बैटल” का आयोजन भी हुआ, जिसने सम्मेलन में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और समग्र विकास को रेखांकित किया। प्रतियोगिता का मूल्यांकन सुश्री अनास्तासिया इल्यूशिना, डॉ. रूबी गुप्ता और डॉ. सुनीता शर्मा ने किया। कार्यक्रम का समापन जतिन सांगरी द्वारा डेनियल और श्रेयांश के साथ लाइव प्रस्तुति से हुआ, जिसने दो दिवसीय शैक्षणिक और सांस्कृतिक संवाद को पूर्णता प्रदान की।

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