उत्तर-प्रदेशनई दिल्लीबड़ी खबरलखनऊ

प्रदेश को 2027 तक बाल श्रम मुक्त कराने के उद्देश्य से तैयार की गयी राज्य कार्ययोजना की समीक्षा बैठक सम्पन्न

लखनऊ : प्रदेश को 2027 तक बाल श्रम मुक्त कराने के उद्देश्य से तैयार की गयी राज्य कार्ययोजना की विभिन्न विभागों के साथ प्रमुख सचिव, श्रम की अध्यक्षता में आहूत बैठक में निर्णय लिया गया कि 2027 तक प्रदेश को बाल श्रम मुक्त कराने की कार्ययोजना के अन्तर्गत सर्वप्रथम दिसम्बर 2026 तक प्रदेश के आठ आकांक्षी जनपदों बहराइच, बलरामपुर, चन्दौली, चित्रकूट, फतेहपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर व सोनभद्र के साथ कानपुर मण्डल व देवीपाटन मण्डल को बाल श्रम से मुक्त कराया जायेगा। लखनऊ के गोमती नगर स्थित उ0प्र0 भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के सभागार में शिक्षा विभाग, पंचायती राज विभाग, महिला कल्याण विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, समाज कल्याण विभाग, गृह विभाग, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0 कौशल विकास मिशन के अधिकारियों के साथ आहूत बैठक में निर्णय लिया गया कि उत्तर प्रदेश को बाल श्रम से मुक्त कराने हेतु सभी विभागों की राज्य कार्ययोजना के अन्तर्गत भूमिका का निर्धारण किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश को बाल श्रम मुक्त कराने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सरकारी विभागों के साथ-साथ प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों व सिविल सोसाइटी का भी सहयोग लिया जायेगा।

बैठक में प्रमुख सचिव, श्रम श्री एम0के0 शन्मुगा सुन्दरम द्वारा सभी विभागों को निर्देश दिये गये कि राज्य कार्ययोजना में बाल श्रम उन्मूलन हेतु जो उनकी भूमिका निर्धारित की गयी है उसके सम्बन्ध में विभाग अपने स्तर से आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें तथा अपने अधीनस्थ अधिकारियों को भी निर्देशित कर दें। श्री सुन्दरम द्वारा पंचायत स्तर पर भी कामकाजी बच्चों व प्रवासी परिवारों के डाटा एकत्रित किये जाने के निर्देश दिये गये।
प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रत्येक बालक-बालिका को शिक्षा, सुरक्षा व गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराया जाए, जिसमें सभी विभागों का परस्पर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर शिक्षा से पुनः जोड़ने, विद्यालय में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने, और बाल श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं पुनर्वासन की ठोस व्यवस्था की जाए।
बैठक में श्रम आयुक्त उ0प्र0 मार्कण्डेय शाही द्वारा प्रदेश में बाल श्रम की स्थिति के सम्बन्ध में अवगत कराते हुए बताया गया कि प्रदेश में जनगणना वर्ष 2011 के अनुसार 21.76 लाख बच्चे कामकाजी हैं। इसके अतिरिक्त श्री शाही द्वारा श्रम विभाग के स्तर से बाल श्रम उन्मलून एवं पुनर्वासन हेतु किए जा रहे प्रयासों व कार्यवाहियों के सम्बन्ध में भी अवगत कराया गया।

बाल श्रमिक विद्या योजना, जो वर्तमान में सीमित जिलों में संचालित है, को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में लागू किये जाने पर विचार विमर्श किया गया।
-2
-2-
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बताया गया कि वन स्टॉप सेन्टर, बाल सेवा योजना और स्पॉन्सरशिप योजनाएं बाल श्रमिकों के पुनर्वासन में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। इन संसाधनों का जनपद स्तर पर श्रम विभाग से समन्वय स्थापित कर उपयोग किया जाएगा।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि बाल श्रमिकों के आयु परीक्षण के लिए रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता सभी जनपदों में नहीं है, जिससे समस्या आती है। प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक सीएचसी/पीएचसी पर रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि बालकों का परीक्षण समयबद्ध हो सके।
समाज कल्याण विभाग को निर्देशित किया गया कि बाल श्रमिकों के परिवारों को उनकी पात्रता के अनुसार विभागीय योजनाओं से जोड़कर आर्थिक व सामाजिक पुनर्वासन सुनिश्चित किया जाये। साथ ही भिक्षावृत्ति में संलिप्त बच्चों की पहचान कर कार्रवाई किये जाने के भी निर्देश दिये गये।
गृह विभाग को निर्देश दिए गए कि बाल श्रम मुक्तिकरण अभियानों के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।
प्रमुख सचिव ने सभी विभागों से अपेक्षा की कि वे पूरी प्रतिबद्धता व समर्पण से कार्य करें, जिससे उत्तर प्रदेश को वर्ष 2027 तक बाल श्रम मुक्त राज्य बनाने की दिशा में निर्णायक प्रगति की जा सके।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बाल श्रमिकों की ट्रैकिंग के लिए एक सॉफ्टवेयर व ऐप तैयार किया जायेगा तथा यूनीसेफ के सहयोग से नया सवेरा योजना का मूल्यांकन कराकर उसे पुनः संचालित किया जायेगा। बैठक में यूनीसेफ प्रतिनिधि द्वारा अवगत कराया गया कि श्रम विभाग और यूनीसेफ प्रदेश के बाल श्रम से प्रभावित आठ मण्डल गोरखपुर, लखनऊ, मिर्जापुर, वाराणसी, देवीपाटन, झांसी, चित्रकूट, आगरा व अलीगढ़ में बाल श्रम उन्मलून व पुनर्वासन हेतु मण्डलीय कार्यशालाओं का आयोजन माह अगस्त व सितम्बर 2025 में कराया जायेगा।
शिक्षा विभाग बाल श्रम से मुक्त कराये गये बच्चे जो विद्यालयों में प्रवेशित कराये जाते है उनकी ट्रैकिंग हेतु सम्बन्धित विद्यालय के किसी एक शिक्षक को बाल श्रम हितैषी शिक्षक नामित करेगी ताकि वह शिक्षक ऐसे बच्चों का विद्यालयों में ठहराव सुनिश्चित करा सके।
बैठक में विशेष सचिव, श्रम निलेश सिंह, अपर श्रमायुक्त व प्रभारी निदेशक ई0एस0आई0 सौम्या पाण्डेय, उप निदेशक महिला कल्याण पुष्पेन्द्र सिंह, डी0पी0आर0ओ0 पंचायती राज श्k प्रमोद कुमार यादव, संयुक्त निदेशक डॉ0 आनन्द स्वरूप, निदेशक एस0सी0ई0आर0टी0 श्री गणेश कुमार, सहायक प्रबन्धक श्री राम सहारे व आलोक श्रीवास्तव एवं संयुक्त निदेकश श्री मंयक उ0प्र0 कौशल विकास मिशन, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन से सुनीता सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button