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लखनऊ के कवि डॉ. हिमांशु सक्सेना “अर्श लखनवी” “अनागत कविता मार्तण्ड सम्मान” एवं कवयित्री शशि प्रभा शुक्ला “अनागत कविता चन्द्रिका सम्मान” से सम्मानित

लखनऊ : अखिल भारतीय अनागत साहित्य संस्थान के तत्वावधान में एक सरस अनागत काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह वरिष्ठ साहित्यकार विजय शंकर शुक्ल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि कवि सम्पत्ति कुमार मिश्र वैश्वारी, विशिष्ट अतिथि रमाशंकर सिंह एवं राम सनेही विश्वकर्मा सजल रहे।

कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉक्टर प्रवीण कुमार पांडेय आवारा ने किया । कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ आरंभ हुआ। कार्यक्रम में डॉ. हिमांशु सक्सेना “अर्श लखनवी” को अनागत कविता मार्तण्ड सम्मान एवं कवयित्री शशि प्रभा शुक्ल को अनागत कविता चंद्रिका सम्मान संस्था द्वारा प्रदान किया गया। वाणी वंदना प्रवीण कुमार पांडेय आवारा ने की । इस अवसर पर देश के अनेक साहित्यकार समारोह में आये।

सम्मानित साहित्यकार डॉ हिमांशु सक्सेना “अर्श लखनवी”, ने अपने काव्य पाठ में जिंदगी का विश्लेषण करती ग़ज़ल ( खूबसूरत फूल का इक हार है ये जिंदगी। तो कभी जलता हुआ अंगार हैं ये जिंदगी। ) गा कर सभी का मन जीत लिया साथ ही “काले का महत्व” बताते “हास्य व्यंग” को पढ़ कर खूब तालियां बटोरी। उनके उपरांत दूसरी सम्मानित साहित्यकारा श्रीमती शशि प्रभा शुक्ल ने अपने काव्य पाठ में अपने देश की महिमा बताता हुई कविता पढ़कर सभी का दिल जीत लिया।

कार्यक्रम संस्था अध्यक्ष डॉ. अजय प्रसून के साथ, प्रेमशंकर शास्त्री बेताब, महेश गुप्त महेश, राम राज भारती, अरविंद रस्तोगी, शीला वर्मा मीरा, रमा शंकर सिंह, विजय शंकर शुक्ल अवशेष, डॉ स्वाति पांडेय “प्रीत” संपत्ति कुमार मिश्र वैश्वारी, स्वतंत्र कुमार शुक्ल, मधु कौशिक, विपुल कुमार मिश्र, नीलेश ज्वाला, आर एस विश्वकर्मा सजल, अजय तोमर आदि ने अपने गीत, गजल, छंद एवं मुक्तकों से सबको भाव विभोर कर दिया।अंत में संस्था के उपाध्यक्ष राम राज भारती ने सभी आगंतुकों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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