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केजरीवाल द्वारा दिल्ली हार का ठींकरा पूर्वांचल नेता गोपाल राय पर फोड़ना शर्मनाक : वीरेन्द्र सचदेवा

नई दिल्ली  : दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है कि दिल्ली की जनता 5 फरवरी 2025 को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन एवं सौरभ भारद्वाज को हरा कर आम आदमी पार्टी सरकार के भ्रष्टाचार के मुंह पर करारा तमाचा मारने के बाद से इंतजार कर रही थी की शीघ्र अरविंद केजरीवाल सामने आ कर अपनी सरकार के भ्रष्टाचार की नैतिक ज़िम्मेदारी लेकर “आप” संयोजक पद से इस्तीफा देंगे।

इसके ठीक विपरीत अरविंद केजरीवाल द्वारा की गई संगठनात्मक घोषणाओं ने प्रमाणित कर दिया है की अरविंद केजरीवाल में कोई नैतिक मूल्य नही बचे हैं।

दिल्ली की जनता ने 2013, 2015 एवं 2020 में अरविंद केजरीवाल के चेहरे पर वोट देकर “आप” सरकार बनवाई थीं और जनता से मीडिया तक सबने अरविंद केजरीवाल को जीत का नायक बताया था पर अब जब दिल्ली की जनता ने भ्रष्टाचार का प्रतिक मानते हुए अरविंद केजरीवाल को हराया है तो अरविंद केजरीवाल ने हार की जिम्मेदारी लेने से इंकार करते हुए विधायक गोपाल राय पर दोष मढ़ दिया है।

श्री सचदेवा ने कहा है कि केजरीवाल द्वारा दिल्ली हार का ठींकरा पूर्वांचल नेता गोपाल राय पर फोड़ना शर्मनाक है।

2015 की दिल्ली जीत के समय दिलिप पांडे तो 2020 की जीत के समय गोपाल राय दिल्ली प्रदेश आम आदमी पार्टी के संयोजक थे पर अरविंद केजरीवाल ने दोनों बार जीत का श्रेय खुद लिया और आज जब दिल्ली में हार हुई तो केजरीवाल ने गोपाल राय को दिल्ली संयोजक पद से मुक्त करके दोष उन पर मढ़ कर गोपाल राय ही नही दिल्ली में बसे पूरे पूर्वांचल समाज पर अपनी हार का दोष मढ़ा है।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा है कि आज 21 मार्च लोकतंत्र दिवस है जिस दिन कांग्रेस को अपनी तानशाही के प्रतिक आपातकाल को समाप्त करना पड़ा था और ऐसे पवित्र दिन पर जनता द्वारा नाकारे मनीष सिसोदिया – सत्येंद्र जैन – सौरभ भारद्वाज को राजनीतिक पदोन्नति देकर अरविंद केजरीवाल ने लोकतंत्र एवं नैतिक मूल्यों की हत्या की।

वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है कि कंठ तक भ्रष्टाचार के आरोपों में डूबी पार्टी का मुखिया अरविंद केजरीवाल ही ना सिर्फ चुनाव हारे बल्कि भ्रष्टाचार में लिप्त साथियों को अपनी पंजाब राज्य सरकार का प्रभारी एवं दिल्ली प्रदेश का संयोजक बना सकता है।

सिसोदिया, जैन एवं भारद्वाज को पद नवाज़ना केजरीवाल की मजबूरी है क्योंकि यह वह तोते हैं जिनमे केजरीवाल की जान बसती है।

 

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