शहीद किसी एक जाति या वर्ग का नहीं होता : प्रोफेसर सुमन
शहीद की प्रतिमा मेन रोड लिबासपुर में स्थापित कराने के लिए 17 नवम्बर को होगी मीटिंग ।
नई दिल्ली : देश की सुरक्षा में तैनात सैनिक तमाम कठिनाइयों के बावजूद देश के प्रति अपना फर्ज निभाते हैं। इन सैनिकों के बदौलत ही देश का आम नागरिक बाहरी आक्रमण से अपने को सुरक्षित महसूस करता है। यदि देश की सीमा पर सैनिकों की चौकसी न हो तो देश की संप्रभुता खतरे में पड़ जाए। देश के नागरिक को इस बात का अहसास है कि सीमा पर तैनात सैनिक देश के बचाव के लिए हमेशा मुस्तैद हैं इसीलिए आम नागरिक चैन की नींद सो पाता है। उक्त विचार दिल्ली की 36 बिरादरी की एक मात्र संस्था ” दिल्ली मूल ग्रामीण पंचायत ” के महामंत्री व डीयू में प्रोफेसर हंसराज सुमन ने लिबासपुर गाँव में शहीद शांति स्वरूप शर्मा की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि स्वरूप पुष्प अर्पित करते हुए कहे ।
प्रोफेसर सुमन ने रविवार को शहीद के परिवार के व्यक्तियों से मुलाकात की । उनके परिवार के सदस्यों में श्री देशराज शर्मा , श्री ललित शर्मा , श्री हर्षित शर्मा , श्री अनिकेत शर्मा हैं । प्रोफेसर सुमन के साथ गाँव के नम्बरदार श्री गजराज यादव , पूर्व निगम पार्षद श्री राजेश यादव , मास्टर सूरज यादव , समाजसेवी श्री तारा चंद यादव , श्री नरेन्द्र यादव आदि ने परिवार से मिलकर कहा है कि लिबासपुर गाँव के मुख्य मार्ग पर शहीद शांति स्वरूप शर्मा की प्रतिमा स्थापित कराने का प्रस्ताव रखा जाएगा । इसके लिए जल्द ही लिबासपुर गाँव में गाँव के लोगों को 17 नवम्बर 2024 ( रविवार ) को एकत्रित कर प्रस्ताव पारित कर एक प्रतिनिधि मंडल दिल्ली की मुख्यमंत्री व दिल्ली के उपराज्यपाल से मिलेगा । बता दें कि शहीद शांति स्वरूप शर्मा की प्रतिमा उनके परिवार के सदस्यों ने गाँव लिबासपुर में पंजाब नेशनल बैंक वाली गली में स्वंय बनवाई है जिसे देखने के लिए आसपास के लोग आ रहे हैं और उन्हें पुष्प अर्पित कर याद करते हैं ।
प्रोफेसर हंसराज सुमन ने परिवार व गाँव के लोगों को संबोधित करते हुए आगे कहा कि सेना में भर्ती सैनिक जब देश की सीमा पर रहता है तो वह जाति, धर्म, भाषा का ख्याल नहीं करता बल्कि वह देश की सुरक्षा का ख्याल करता है। वह जानता है कि भारत विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों और भाषा का देश है इसलिए उसकी जिम्मेदारी भारत की सुरक्षा के लिए है। उस समय देश उसके लिए पहली प्राथमिकता होता है। यदि वह सीमा की सुरक्षा करते हुए शहीद हो जाता है तो वह सभी देश वासियों के लिए अपना फर्ज निभाता है। देश के लिए उसकी शहादत को आदर्श और गर्व के साथ याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि शहीद शांति स्वरूप शर्मा ने देश के लिए बलिदान देकर लिबासपुर गाँव का नाम रोशन किया है , उनकी इस शहादत से युवा पीढ़ी अवश्य प्रेरणा ग्रहण कर आत्मसात करेगी ।
प्रोफेसर हंसराज सुमन ने आगे कहा कि हमें शहीदों के परिवार जनों का सम्मान करना चाहिए और उनके संघर्ष से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि दिल्ली देहात में अलीपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले लिबासपुर गाँव, समयपुर, बादली, हैदरपुर आदि गाँव के लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। यहाँ के युवाओं ने देश की आजादी के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने बताया है कि लिबासपुर गाँव के निवासी शहीद शांति स्वरूप शर्मा माध्यमिक शिक्षा पूर्ण कर “द राजपूताना रेजिमेंट में बतौर सैनिक के पद पर कार्यरत थे। सन् 1967 में भारत-चीन सीमा पर इन्होंने व इनके साथियों ने घुसपैठिए चीनी सैनिकों से जबरदस्त युद्ध किया। उस समय भारत-चीन युद्ध में शहीद होने वाले भारतीय सैनिकों में से वे एक थे। बताया जाता है कि उस युद्ध में उन्होंने बहादुरी दिखाते हुए बहुत से चीनी सैनिकों को मार गिराया था। ये घायल होने के बावजूद चीनी सैनिकों को पीछे ढकेलते हुए अंत में 12 सितम्बर 1967 को शहीद हो गए। गाँव की युवा पीढ़ी को इस महान योद्धा के विषय में जानकारी दी जा रही है। यहाँ स्थापित प्रतिमा युवा पीढ़ी को देश सेवा के लिए प्रोत्साहित करेगी ।
प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि लिबासपुर गाँव के लोगों का देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, अलीपुर कांड व गाँव में बने पंचपीर उन शहीदों की याद दिलाता है। इसके आसपास धौलाकुंआ, अड़ाना, समयपुर, बादली, हैदरपुर, सिरसपुर, खेड़ाकलां आदि गांवों का इतिहास आजादी के आंदोलन में दर्ज है। इसलिए आवश्यक है कि वर्तमान पीढ़ी इस महान योद्धा के विषय में जाने। दिल्ली मूल ग्रामीण पंचायत के महामंत्री प्रोफेसर हंसराज सुमन ने शहीद शांति स्वरूप शर्मा की प्रतिमा मेन रोड लिबासपुर गाँव में स्थापित कराने की दिल्ली सरकार व उपराज्यपाल से मांग की है।


