असम सरकार ने बेटियों को किया जिहादी मुल्लों व काजियों से मुक्त, शेष राज्य भी बढ़ें आगे

विनोद बंसल
असम में मुस्लिम शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन जरूरी किए जाने से राज्य की बेटियां को मुल्ले काजी और उनका शारीरिक उत्पीड़न करने वाले जिहादियों व समाज कंटकों से मुक्ति मिलेगी। इसके माध्यम से बाल विवाह और काजी सिस्टम खत्म होने पर महिला अत्याचारों पर रोक और नारी सशक्तिकरण को बल मिलेगा। वास्तव में आदि बहुविवाह को भी अपराध घोषित कर दिया तो असम की नारियां व सभ्य समाज आजीवन आपके ऋणी रहेंगे। धन्यवाद @CMOfficeAssam श्री @himantabiswa जी।
शेष राज्य सरकारों को भी नारी कल्याणकारी इस पहल का अनुसरण कर बाल विवाह, बहु विवाह, बहु संतान व हलाला जैसी नारी दोहनकारी कुप्रथाओं पर अंकुश लगा कर सभी नारियों को दत्तक, तलाक, भरण पोषण, संपत्ति में हिस्सा तथा काले बोरे से मुक्ति दिलानी ही चाहिए।
बड़ी बात यह भी है कि इस कानून के माध्यम से बहु विवाह पर रोक लगाने, विवाहित महिलाओं को वैवाहिक घर में रहने, भरण पोषण आदि के अपने अधिकार का दावा करने तथा विधवाओं को अपने पति की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार का अधिकार के साथ अन्य लाभ व विशेष अधिकारों के लिए दावा करने में भी सहायता मिलेगी। महिला सशक्तिकरण की दिशा में असम सरकार का निर्णय अभूतपूर्व व अनुकरणीय है।



