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भूले बिसरी छात्राओं से महका एपी सेन आंंगन, लगी मस्ती की पाठशाला

लखनऊ : हनुमान जी की पूजा, प्रसाद वितरण और प्राक्तन छात्रा सम्मेलन धूमधाम से मनाया गया। 100 साल के गौरवशाली इतिहास के धनी एपीसेन कॉलेज में 50 साल पुरानी छात्राओं का समागम एक अनूठा दृश्य दिखा गया। प्रातः प्राचार्या के निर्देशन में शिक्षिकाओ और कर्मचारियों ने हनुमान चालीसा का पाठ करके आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद भारतीय परंपरा से सरावोर प्राक्तन सम्मेलन में पुरानी छात्राओं का स्वागत भारतीय परिधान से सजी वर्तमान छात्राओं ने रोली तिलक लगाकर किया। प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने सभी पुरानी छात्राओं का स्वागत किया और अपने से उम्र में कई साल बड़ी छात्राओं के आगमन पर एवं उनका स्वागत करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। प्राचार्या द्वारा अलुमिनाय को महाविद्यालय की अमूल्य संपत्ति बताया और कॉलेज के विकास में उनके योगदान के आवश्यकता की बात की।

1963 बैच की मधु प्रसाद, 1976 की डॉ अनुराधा विनायक, प्रो नीरजा सिंह प्राचार्य जी डी एन पी जी कॉलेज, लखनऊ की प्रथम महिला पत्रकार और आकाशवाणी की फागुनी भौजी, 1978 बैच की नूतन वशिष्ठ, 1978 की दैनिक जागरण की कार्यकर्त्ता नीता मिश्रा, वर्तमान में नरही की पार्षद, 1984 बैच की मधु सिंह, सीमा मैयानी, मीना, फरीना, ज्योति सिंह लेखिका सीमा, मधुरिमा, सुलेखा, दीपशिखा, सुमन बाला तिवारी, नीरज मिश्रा, बीना भल्ला, दीप्ति सिंह सहित कई पुराने प्रसिद्द चेहरों से कॉलेज गुलजार रहा। स्वागत समारोह में ईको फ्रेंंडली तरीकों का अनुसरण करते हुए छात्राओं ने हाथ से नारियल के बने गमलों में पौधा लगाकर सीनियर्स का स्वागत किया । एम ए की छात्राएं पूजा और कीर्ति ने सुर से सुर मिला कर ‘गाए मंगल गान’ गीत गाकर पुरानी छात्राओं का स्वागत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत कॉलेज की पुरानी छात्रा और मशहूर नृत्यांगना मीशा रतन के भक्ति और परंपरा के सम्मिश्रण पर आधारित भावपूर्ण तराने द्वारा किया गया।

मीशा की भावपूर्ण प्रस्तुति से सारा हॉल तालियों से गूंज उठा। पुराने और पुराने गीतों के मिश्रण की मजेदार प्रस्तुति लायबा सायबा और तमन्ना के द्वारा दी गई। आधुनिक महिलाओं की चुनौतियों को ‘कारी कारी रैना सारी’ को रिया सिंह ने बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत किया। हिंदी विभाग की प्रोफेसर ऊषा पाठक ने मशहूर लोकगीत गाकर रोमांच पैदा कर दिया। इस अवसर पर सीनियर के स्वागत के लिए छात्राओं ने मेहंदी तथा गोलगप्पे के स्टाल लगाए और सेल्फी प्वाइंट बनाकर पुुरानी यादों को सेल्फी के माध्यम से याद करने का प्रयास किया। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए हाथ से बने हुए कपड़े के झोंलों का स्टॉल लगाकर अपने जीवन में इको फ्रेंडली तरीकों को अपनाने के लिए जागरूक भी किया। इस कार्यक्रम में पुरानी यादों को दोहराने के लिए डॉ चंद्रकला और डॉ वैशाली ने प्रोजेक्टर पर पुरानी टीचर्स और छात्राओं की गतिविधियों को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम समन्वयक और मीडिया प्रभारी प्रोफेसर श्वेता तिवारी ने बताया कि 1968 बैच की श्रीमती उषा बाजपेई, जो अब विदेश में है, ने मोबाइल पर बात करके अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए अत्यंत प्रसन्नता जाहिर की। पुरानी छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए और सेल्फी प्वाइंट पर फोटो खिंचाईव सभी एलुमनाई का सीनियर टीचर्स  शिवानी दुबे भूतपूर्व प्राचार्या, डॉ श्यामली दुबे, प्रोफे मनु टंडन, मंजू सिंह, प्रोफेसर निधि ने छात्राओं द्वारा बनाए गए गमलों में पौधे भेंट कर उनकी कॉलेज लाइफ की यादों को सुनहरा बना दिया। प्रोफ़ेसर माधुरी यादव , प्रोफेसर रश्मि, डॉ मोनिका अवस्थी ,डॉ कंचन मिश्रा ,डॉ सुमन, डॉ मीनाक्षी, डा मंजरी, ङा मंदाकिनी ने सभी आमंत्रित अतिथियों को एक यादगार के रूप में भेंट देकर उन्हें सम्मानित किया। डॉ कीर्ति गौर के कुशल निर्देशन में छात्राओं ने बड़े मनोयोग से कॉलेज को सुरुचिपूर्ण ढंग से सजाया। इस अवसर पर अवकाश प्राप्त टीचर्स को अपने बीच पाकर छात्राएं बहुत खुश हुई।अंत में एलुमनाई एसोसिएशन की सचिव प्रोफेसर श्वेता तिवारी ने सभी आमंत्रित अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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