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राष्ट्रीय कथक संस्थान /बिरजू महाराज क.सं.द्वारा आयोजित संगीत संगम कार्यशाला की मनोरम प्रस्तुति

लखनऊ : राष्ट्रीय कथक संस्थान /बिरजू महाराज क.सं.संस्कृति विभाग, उ.प्र. द्वारा आयोजित संगीत संगम कार्यशाला की प्रस्तुति राष्ट्रीय कथक संस्थान परिसर में शुक्रवार 10 मार्च क़ो आयोजित हुई.

ज्ञात हो कि उक्त कार्यक्रम ’’संगीत संगम‘‘ संस्थान में संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे नवांकुरों छात्र-छात्राओं एवं  परिपक्व छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता रहा है।इस कार्यक्रम की संध्या बेला का शुभारम्भ ’’ताल वृन्द‘‘ के अन्तर्गत आनन्द दीक्षित के निर्देशन में  संस्थान के तबला विधा की युवा पीढ़ी द्वारा तबला समूह वादन प्रस्तुत किया गया जोकि तीनताल 16 मात्रा में निबद्ध था। समूह वादन का आरम्भ भगवान श्री महादेव जी की स्तुति से किया गया तदुपरान्त पेषकार, कायदा, रेला, मध्यलय में टुकड़े एवं परन तथा द्रुतलय में जुगलबन्दी प्रस्तुत की गयी।

कलाकारों में सत्यप्रकाश,अखण्ड प्रताप, मानसी, मोहित, एकाक्ष, अग्रिम, इस्काॅन, वैदिक, विवान, वेदात्मन, अभ्यांश, नभय, दीपिका, संरक्षक इत्यादि थे ।लहरा संगत- मीना वर्मा थे । प्रशिक्षण आनन्द दीक्षित द्वारा दिया गया। अगली कड़ी में वीणा वादिनी, ज्ञान दायिनी, सुरों की देवी ’माँ सरस्वती‘ जी की स्तुति राग हंसध्वनि में निबद्ध ’’जयति जय जय माँ सरस्वती‘‘ से किया गया जिसकी शब्द एवं स्वर रचना सुश्री अर्चना कुशवाहा द्वारा की गयी.

तत्पष्चात् शास्त्रीय संगीत की परम्परा का निर्वाहन करते हुए तथा नवरात्रि के पावन पर्व के शुभ आगमन को दर्शाते हुए ‘‘राग बिलासखानी तोड़ी में निबद्ध बन्दिश ‘‘जगदम्बिका अम्बिका मर्दनी अम्ब शुम्भ-निशुम्भ’’ को आलाप, बोल आलाप, तानो एवं तिहाईयों की गरिमामयी प्रस्तुति दी गयी।

प्रथम श्रृंखला की अंतिम कड़ी में रंग बिरंगी होली की अनोखी रंग भरी, भस्म वाली एवं रस भरी होली गीतों को निराले एवं आकर्षक अंदाज में प्र्र्रस्तुत किया गया।
शिरकत करने वाले छात्र-छात्रओ में अंजलि, संस्कृति, शैली, श्वेता, रूद्र इत्यादि थे । प्रशिक्षण अर्चना कुशवाहा ने दिया।
संगत कलाकारो में सिन्थेसाइजर पर विजय कुमार,तबले पर आनन्द दीक्षित।  ढोलक- अंकित कुमार।  साइड रिद्म- दिव्यांशु थे ।


कार्यक्रम का प्रारम्भ राग जोग में निबद्ध बंदिष जिसके बोल-‘‘साजन मोरे घर आये’’ को बोल आलाप तान, बोलतान एवं तिहाईयों के साथ प्रस्तुत किया गया इसी क्रम में राग जोग में तीन ताल में निबद्ध तराना जो कि मीना वर्मा द्वारा रचित बंदिष है जिसके बोल-’’ताना देरेना तदानी दीम‘‘ को खूबसूरत अंदाज में पेष किया गया। अगली कड़ी में नन्हे मुन्ने बाल कलाकरों के द्वारा भजन ’’छोटी-छोटी गैया’’ को मनोहारी रूप में गाया गया। अभी कुछ दिनों पूर्व ही होली का त्योहार हम सबने हर्षोउल्लास के साथ मनाया, गायन कार्यक्रम का समापन लखनवी होरी-’’एरी आज होरी मैं खेलूंगी डटके‘‘ तत्पष्चात पदमश्री योगेष प्रवीन जी की रचना होरी ‘‘आये नंद जी के लाल‘‘ इसी क्रम में ’’होली में उड़े रे गुलाल‘‘ जिसकी शब्द एवं स्वर रचना मीना वर्मा की है इसके पश्चात कुछ परम्परा गत होरीयों को लखनवी गायकी के साथ दोहे एवं बंध लगाते हुए प्रस्तुत किया गया। जिसमें-’’मेरो कान्हा गुलाब का फूल‘‘, ‘‘रंग डारून्गी नंद के लालन पे’’, ’’रंग बरसे बरसाने में’’, ‘‘होरी खेल रहे बाॅके बिहारी’’ एवं ‘‘रंग डार गयो रे बाके बिहारी’’ आदि होरी गीतों कीे प्रस्तुति दी गई।


छात्र-छात्राओ में श्रुति, श्रिया, प्रिया, विजेता, प्रीतिका, पूनम, सुगन्ध, रीता, सारा, मोहित, वैष्णवी, रिभू, दिव्यांषू, जिज्ञांषू, आयुषि, इन्द्राक्षी, अदिति, वंश अनय, आद्या, सिद्धी, वाची, सुभ्रांष, श्रेयस, चित्रांषी, कविष्वर, आर्नव, हार्षित, अंकित इत्यादि थे ।.प्रशिक्षिक मीना वर्मा थी।
संगत कलाकारो में तबले पर आनन्द दीक्षित,ढोलक पर अंकित कुमार थे ।  सिन्थेसाइजर पर रिभू वासुदेव  साइड रिद्म- दिव्यांशु थे.
प्रस्तुति, परिकल्पना एवं अवधारणा: राष्ट्रीय कथक संस्थान
की सचिव सरिता श्रीवास्तव की थी.

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