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बाघ बकरी फाउंडेशन ने अक्षय पात्र किचन को दिया डिलीवरी वाहन 

लखनऊ। बाघ बकरी फाउंडेशन ने लखनऊ के बाद वाराणसी अक्षय पात्र किचन को भी डिलीवरी वाहन दान में दिया। इस वाहन से 16 सरकारी स्कूलों के दो हजार से ज्यादा छात्रों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। वाघ बकरी टी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं बाघ बकरी फाउंडेशन के ट्रस्टी रमेश देसाई ने इस वाहन की चाभी अक्षय पात्र फाउंडेशन के ट्रस्टी व नेशनल प्रेसिडेंट इंडिया स्वामी भरतर्षभा दास जी व गुजरात के वाइस प्रेसिडेंट स्वामी राया रामा दास जी को सौंपी। बाद में इन्होंने हरी झंडी दिखाकर इस वाहन को रवाना किया। पिछले साल भी बाघ बकरी फाउंडेशन ने लखनऊ अक्षय पात्र को दो डिलीवरी वाहन दान में दिए थे। इस वाहन से बच्चों को मध्यान भोजन मुहैया कराने के साथ हैप्पीनेस किट्स बांटने और कोविड-19 महामारी के दौरान वंचितों को पका भोजन प्रदान करने का काम किया गया। इस अवसर पर स्वामी भरतर्षभा प्रभु ने श्री देसाई का आभार जताते हुए कहा कि हमारा बाघ बकरी फाउंडेशन के साथ पिछले 14 वर्षों से मजबूत रिश्ता है जो समय के साथ और भी मजबूत हुआ है। इस दौरान अक्षय पात्र वाराणसी के प्रमुख राहुल कुमार झा व उनके सहयोगियों ने बाघ बकरी फाउंडेशन के पदाधिकारियों को पुष्पगुच्छ, प्रतीक चिन्ह व प्रसाद देकर सम्मानित किया।

अक्षय पात्र फाउंडेशन भारत की एक अशासकीय संस्था है जो देश के 14 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 22367 स्कूलों के 2 मिलियन से अधिक बच्चों को हर स्कूल दिन में पौष्टिक भोजन परोस रहा है। अक्षय पात्र फाउंडेशन दुनिया का सबसे बड़ा (गैर-लाभकारी) मिड-डे मील कार्यक्रम वर्ष 2000 से चला रहा है। इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। वर्तमान में आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, उड़ीसा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना व उत्तर प्रदेश आदि राज्यो में अक्षय पात्र किचन स्थापित है। यह संगठन सरकारी स्कूलों और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में मिड-डे मील योजना को लागू करके कक्षा की भूख को खत्म करने का प्रयास करता है। साथ ही, अक्षय पात्र का उद्देश्य कुपोषण का मुकाबला करना और सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित बच्चों की शिक्षा के अधिकार का समर्थन करना भी है। उत्तर प्रदेश में वाराणसी के साथ लखनऊ, मथुरा व गोरखपुर में भी अक्षय पात्र का किचन काम कर रहा है। लखनऊ में जहां 1472 स्कूलों के करीब सवा लाख बच्चों को भोजन दिया जा रहा है वहीं मथुरा में भी दो हजार स्कूलों के करीब सवा लाख बच्चों को दोपहर का पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। गोरखपुर में भी बच्चों को दोपहर का पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है। अक्षय पात्र अपनी पहुंच को बढ़ाने का भी लगातार प्रयास कर रहा है। अक्षय पात्र का सोचना है कि भूख से कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। अक्षय पात्र फाउंडेशन वर्ष 2000 में मात्र 15 सौ बच्चों से यह सेवा शुरू किया था जो आज 2 मिलियन से ज्यादा हो गये है।

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