मीडिया कवरेज में भाषा, वर्तनी और शीर्षक के गिरते स्तर पर जताई गयी चिंता
वरिष्ठ पत्रकार के विक्रम राव की प्रथम पुण्य तिथि पर प्रेस क्लब में संगोष्ठी आयोजित

लखनऊ। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. के विक्रम राव के प्रथम पुण्य तिथि पर आज यूपी प्रेस क्लब लखनऊ में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमे उत्तर प्रदेश के सैकड़ों पत्रकारों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इस दौरान सभी पत्रकारों ने राव साहब जी की पत्रकारिता पर अपनी-अपनी बाते सबके सामने रखी। इससे पहले लखनऊ लालबाग स्थित यूपी प्रेस क्लब में वरिष्ठ पत्रकार डॉ. के विक्रम राव को सभी पत्रकारों ने श्रृद्धांजलि अर्पित की। उसके बाद मंच को वरिष्ट पत्रकारों द्वारा साझा किया गया। जिसमे राव साहब के जीवन शैली और उनके विचारों को बताया गया। इस दौरान संगोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमे पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर वर्तनी, भाषा शैली, हिंदी साहित्य की पारदर्षिता को हिंदी साहित्यकार सर्वेश पांडे ने उजागर किया। उन्होंने युवा पत्रकारों को हिंदी वर्तनी और भाषा शैली की पूरी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज के पत्रकार अपनी लेखनी में क्या – क्या लिख देते है, जिसका मतलब हिंदी में कुछ और होता है। जिससे पत्रकारिता की लेखनी पर सवाल उठते है।

इस दौरान भारत समाचार के संपादक बृजेश मिश्र ने भी राव साहब को याद किया और उन्हें श्रृद्धांजलि अर्पित की। उनको याद करते हुए बताया कि पत्रकारिता जगत में मेरा पहला परिचय प्रेस क्लब का कार्ड रहा। उन्होंने बताया कि राव साहब के द्वारा 2001 में मुझे ये कार्ड प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि राव साहब पत्रकारिता जगत के तेज तर्रार पत्रकार थे। वह सच्चाई के लिए मुख्यमंत्री के सामने खड़े हो जाते थे। उन्होंने कहा कि आज के युग में ऐसे पत्रकारों की कमी है। वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल ने बताया कि के विक्रम राव जी ने पत्रकार जगत को अपना बहुत बड़ा योगदान दिया है। आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें श्रृद्धांजलि सुमन अर्पित है। उनके लिए जितना बोला जाए उतना कम लगेगा। इस मौके पर प्रेस क्लब युनियन अध्यक्ष शिव शरण सिंह ने के विक्रम राव को श्रृद्धांजलि सुमन अर्पित किए । उन्होंने उनके विचारों को साझा किया। इस दौरान उनके द्वारा प्रेस क्लब और देश में किये गए कार्यो को उजागर किया। उन्होंने कहा एक दौर पत्रकारों का वह था जब पत्रकारों की लेखनी पर सवाल नहीं उठते थे। एक दौर अब है जो पत्रकारों पर सवाल उठने लगे है। पहले के दौर में कलम से लिखी गयी खबर पर कुर्सियां बदल जाती थी। ऐसे दौर के पत्रकार के विक्रम राव जी थे। आज प्रेस क्लब में उनकी याद में संगोष्ठी आयोजित की गयी है। जिसमे प्रदेश के सकड़ों पत्रकारों ने भाग लिया है।
इस कार्यक्रम में पत्रकारिता, राजनीति, समाज सेवक और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने मीडिया कवरेज में भाषा, वर्तनी और शीर्षक के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए नए पत्रकारों के प्रशिक्षण पर ज़ोर दिया। वक्ताओं ने अख़बारों की भाषाई गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. राव की पत्रकारिता और भाषाई पकड़ पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि राव की लेखनी और उनकी अंतिम समय तक पढ़ने-लिखने की आदत बनी रही।
कार्यक्रम में IFWJ के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल मिश्रा, यूपीडब्ल्यूजेयू के प्रदेश अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी, यूपी प्रेस क्लब के अध्यक्ष रविंद्र सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के सलाहकार एचएन शर्मा, पूर्व राज्यसभा सांसद व बीजेपी नेता अशोक बाजपेई, सूचना आयुक्त दिलीप अग्निहोत्री, पीएन द्विवेदी, भारत समाचार के एडिटर इन चीफ बृजेश मिश्रा, डॉ. राव की पत्नी डॉ. के सुधा राव, राव साहब के पुत्र व् पत्रकार के. विश्वदेव राव, पद्मश्री डॉक्टर अनिल रस्तोगी, लोकतंत्र सेनानी बृजकिशोर मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी, गोविन्द पंत राजू, योगेश मिश्रा, रतन मणिलाल, प्रद्युमन तिवारी, नवल कांत सिन्हा, टीएन मिश्रा, रजत के मिश्रा, शिव शरण सिंह, मसूद हसन, राम कृष्ण बाजपेयी, सुल्तान शाकिर हाशमी, भारत सिंह, मत्स्येन प्रभाकर, संजोग वाल्टर, राजेंद्र द्विवेदी, शिल्पी सेन, अमिता पारुल, श्रुति गुप्ता, इस्माइल मैन सर्वेश अस्थाना, मनीष मिश्रा, नीरज श्रीवास्तव, अनुराग शुक्ला, तनवीर फातिमा, राजवीर यादव, अविनाश शुक्ला, मुकुल मिश्रा, श्याम कुमार, हरी अरोड़ा, संदीप पांडे, विवेक त्रिपाठी, अनिल सैनी, जुबेर अहमद, जितेंद्र त्रिपाठी, महिमा तिवारी, नितिन अवस्थी, अभिषेक पांडेय, अंकित श्रीवास्तव, आशीष वर्मा, एसएन सिंह, शिव विजय सिंह, पवन सिंह, उबैदुल्लाह नासिर, नितिन श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रेमकान्त तिवारी ने किया।



