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संकट मोचन संगीत समारोह में सम्मानित हुए भूपेंद्र अस्थाना

लखनऊ : काशी के प्राचीन एवं प्रसिद्ध संकट मोचन मंदिर में आयोजित छः दिवसीय 103वाँ संकट मोचन संगीत समारोह अपने दिव्य और सांस्कृतिक वैभव के साथ हुआ। इस आयोजन में अध्यात्म, संगीत, कला और साहित्य का अद्भुत त्रिवेणी संगम देखने को मिला, जिसने पूरे वातावरण को एक विशिष्ट आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की।

समारोह के अंतर्गत आयोजित कला शिविर में देशभर से लगभग 22 कलाकारों एवं मूर्तिकारों ने सहभागिता की। लखनऊ से आए कलाकार, क्यूरेटर एवं कला लेखक भूपेंद्र कुमार अस्थाना भी आमंत्रित कलाकार के रूप में शामिल हुए। उन्होंने हनुमान विषय पर कैनवास पर एक प्रभावशाली रेखांकन कृति का सृजन किया, जिसने दर्शकों और कला प्रेमियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
समारोह के दौरान कला मंच पर संकट मोचन फाउंडेशन द्वारा भूपेंद्र अस्थाना को सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रकाश शुक्ल (वरिष्ठ लेखक, आलोचक एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर) के करकमलों द्वारा प्रदान किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया। इस अवसर पर चित्रकार अनिल शर्मा, शुभो सरकार, आलोक राय सहित अनेक कलाकार एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे।
भूपेंद्र अस्थाना ने अपनी पेन-इंक रचना “आपन तेज समारो आपे…” के बारे में बताते हुए कहा कि यह कृति यथार्थ और प्रतीकात्मकता का संगम है। इसमें हनुमान का स्वरूप एक गहन, आत्मचेतन पुनर्सृजन के रूप में उभरता है—जहाँ वे केवल शक्ति के प्रतीक नहीं, बल्कि भीतर की जागरूकता और संतुलन के रूप में दृष्टिगोचर होते हैं।
कृति में हाथ में उठाया गया पर्वत जिम्मेदारी और सामर्थ्य का बोध कराता है, वहीं शरीर पर अंकित वृक्ष और प्रकृति के रूप सृजनात्मक ऊर्जा के प्रतीक हैं। गदा की स्थिरता और पूँछ का कुंडलित घुमाव नियंत्रित और संतुलित शक्ति का संकेत देते हैं।
विशेष रूप से, चेहरे की बहुस्तरीय संरचना पंचमुखी हनुमान के भाव को सांकेतिक रूप में प्रस्तुत करती है। यहाँ पाँच मुख प्रत्यक्ष नहीं हैं, बल्कि एक ही चेहरे में अनेक दृष्टियों और चेतनाओं के रूप में समाहित हैं—जो ‘पंचतत्व’ और ‘पंचशक्ति’ की गूढ़ अवधारणा को प्रकट करते हैं।
यह रेखांकन अंततः एक सरल किंतु गहन संदेश देता है—वास्तविक शक्ति बाहरी प्रदर्शन में नहीं, बल्कि भीतर के संतुलन, चेतना और साधना में निहित होती है।
समारोह में इस कृति की शैली और भावबोध को व्यापक सराहना मिली। संकट मोचन मंदिर के महंत श्री विशंभर नाथ मिश्र, पुष्कर मिश्र, श्रीप्रकाश शुक्ल, डॉ विजय नाथ मिश्र, यतींद्र नाथ चतुर्वेदी, राजेंद्र शर्मा, मूर्तिकार राजेश कुमार सहित अनेक विद्वानों और कला प्रेमियों ने अस्थाना की इस सृजनात्मक अभिव्यक्ति की प्रशंसा की।

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