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विश्व गौरैया दिवस पर ए.के.टी.यू. के छात्र की अनोखी पहल

नन्हे पंखों के लिए बनाया सुरक्षित आशियाना

लखनऊ :  विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर वास्तुकला एवं योजना संकाय, ए.के.टी.यू., लखनऊ के बी.आर्क. पंचम वर्ष के छात्र राजहंस कुमार ने गौरैया संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल की है। उन्होंने संकाय परिसर में गौरैया के लिए घोंसले लगाने के साथ-साथ दाना और पानी की व्यवस्था करने का प्रयास किया है। राजहंस लंबे समय से यह प्रयास कर रहे हैं, इस आशा के साथ कि एक दिन गौरैया फिर से परिसर में लौटेगी और अपनी चहचहाहट से वातावरण को जीवंत बनाएगी।

भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने बताया कि विशेष बात यह है कि राजहंस कुमार ने गौरैया के लिए एक विशेष घोंसला भी डिजाइन किया है। उनके अनुसार, “डिज़ाइन से गौरैया को नया जीवन” दिया जा सकता है। इस घोंसले की मुख्य विशेषता उसका लेयर्ड एंट्री सिस्टम है, जो इसे शिकार करने वाले पक्षियों से अधिक सुरक्षित बनाता है। साथ ही, घोंसले का अंदरूनी भाग सीधे दिखाई नहीं देता, जिससे गौरैया को सुरक्षित और शांत वातावरण मिल सके।

राजहंस का यह डिज़ाइन कम लागत वाला, स्थानीय सामग्री से निर्मित होने योग्य और आसानी से स्थापित किया जा सकने वाला है। यह पहल न केवल गौरैया को सुरक्षित आश्रय देने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में उनकी वापसी के लिए एक व्यावहारिक समाधान भी प्रस्तुत करती है।

गौरैया, जो कभी घर-आँगनों की पहचान हुआ करती थी, आज शहरीकरण, पेड़ों की कमी, आधुनिक इमारतों में घोंसले के लिए स्थान के अभाव और प्रदूषण के कारण तेजी से कम होती जा रही है। ऐसे में राजहंस कुमार की यह पहल पर्यावरण संरक्षण, सह-अस्तित्व और संवेदनशील वास्तुकला का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है।

विश्व गौरैया दिवस हमें यह संदेश देता है कि यदि हम अपने आसपास पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण बनाएं, तो गौरैया जैसी नन्ही चिड़िया फिर से हमारे जीवन का हिस्सा बन सकती है।

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