सेवा, सत्संग और सिमरन के संग प्रादेशिक समागम की तैयारियों का भव्य शुभारंभ हुआ

कानपुर। निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की असीम कृपा से संत निरंकारी मिशन द्वारा उत्तर प्रदेश के कानपुर में विशाल एक दिवसीय प्रादेशिक निरंकारी संत समागम का आयोजन आगामी 22 मार्च 2026 को सुनिश्चित किया गया है। इस भव्य समागम में प्रदेश भर से हजारों की संख्या में निरंकारी श्रद्धालु-भक्तों के सम्मिलित होने की संभावना है। समागम को सफल एवं सुव्यवस्थित बनाने हेतु तैयारियों का क्रम मंगलवार को प्रातः प्रारंभ कर दिया गया है।
निरंकारी मिशन के प्रचार-प्रसार एवं सेवादल के मेंबर इंचार्ज श्री मोहन छाबड़ा जी, मुंबई से पधारे वयोवृद्ध संत श्री शंभूनाथ तिवारी जी तथा दिल्ली से पधारे निरंकारी सेवादल के केंद्रीय उप मुख्य संचालक शुभकरन जी की गरिमामयी उपस्थिति में सेवा कार्य का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु भक्तों एवं मिशन के स्वयंसेवकों सेवादल के भाई बहन ने मिलजुलकर समागम की अग्रिम सेवा में उत्साह, अनुशासन और समर्पण भाव से अपना योगदान प्रदान किया। ज्ञातव्य है कि ये सेवाएं निरंतर 22 मार्च तक रेलवे ग्राउंड, निराला नगर में संचालित होती रहेंगी, जहाँ समागम का आयोजन प्रस्तावित है।
उद्घाटन सत्र के उपरांत एक विशाल सत्संग का आयोजन किया गया, जिसकी पावन अध्यक्षता श्री शंभूनाथ तिवारी जी ने की। सत्संग में कानपुर जोन की लगभग सभी शाखाओं के साथ ही लखनऊ से भी बड़ी संख्या में संत महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। वातावरण भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक उत्साह से ओतप्रोत रहा। वक्ताओं एवं गीतकारों ने सेवा को ही जीवन का मूल आधार बताते हुए अपने भाव व्यक्त किए तथा सतगुरु का पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही मिशन के मूल सिद्धांत—सेवा, सत्संग और सिमरन—को जीवन में आत्मसात करने का प्रेरणादायी संदेश दिया गया।
इस अवसर पर प्रमुख वक्ता के रूप में श्री तिवारी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सेवा का भाव युगों-युगों से मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। सेवा ही मनुष्य को महान बनाती है और उसे इस निरंकार प्रभु ईश्वर से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि सेवा और समर्पण के कारण ही अनेक संत महात्मा विश्व में प्रेरणास्रोत बने। अपने वक्तव्य में उन्होंने भक्त ध्रुव, प्रह्लाद, मीरा तथा सुदामा जैसे भक्तों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सेवा, श्रद्धा और अटूट विश्वास के महत्व को विस्तारपूर्वक समझाया।
सत्संग के उपरांत श्रद्धालु भक्तों के लिए लंगर का भी आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना के साथ प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम का संचालन श्री संतोष गुप्ता जी ने प्रभावी ढंग से किया। इस अवसर पर निरंकारी सेवादल के केंद्रीय अधिकारीगण सहित क्षेत्रीय पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
समग्र रूप से कहें तो यह आयोजन न केवल आगामी प्रादेशिक समागम की तैयारियों का शुभारंभ था, बल्कि सेवा, सत्संग और सिमरन की जीवनदायी भावना को पुनः जागृत करने का एक प्रेरणास्पद अवसर भी सिद्ध हुआ।
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