आज के समय में ड्रिपेशन, धोखाधड़ी, लालच, हिन्सा आपसी वैमनस्य आदि बढ़ते जा रहे हैं : मृत्युंजय भाई

लखनऊ : ब्रह्मकुमारीज गोमती नगर में शनिवार को मधुबन माउंट आबू मुख्यालय से विख्यात शिक्षाविद, फिल्म प्रोड्यूसर एवं ब्रह्माकुमारीज की गर्वनिंग बॉडी के सदस्य मृत्युंजय भाई पधारे. कार्यक्रम का शुभारंभ लखनऊ यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर एसपी सिंह जी ने पुष्पों का गुच्छा देकर , स्वागत किया. तत्पश्चात गोमती नगर सेंटर इंचार्ज राजयोगिनी राधा दीदी ने स्वागत भाष्य में शिक्षा का महत्व बताते हुए कहा कि यह शिक्षा का ही परिणाम है कि अयोध्या में एक पत्थर की मूर्ति में मूर्तिकार ने जीवन भर राम को जीवंत कर दिया है. इसी तरह आज के शिक्षक, हमारे आने वाली पीढ़ी को, जो की अनगढ़ मूर्ति की तरह है, शिक्षाओं के माध्यम से एक जीवंत प्रेरणादाई व्यक्तित्व के रूप में निखार सकते हैं. आजकल के अलग-अलग प्रोफेशन में आई हुई गिरावट की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि आजकल की पढ़ाई केवल किताबी पढ़ाई रह गई जो व्यक्ति को अधिक से अधिक धन और पद कैसे पाया जाए तो बता देती है लेकिन जीवन में मानवीय मूल्य कैसे धारण किया जाए, एक अच्छा आदमी, समाज के लिए उपयोगी व्यक्तित्व कैसे विकसित किया जाए, इस पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है. समाज में आए हुए इस गैप को भरने के लिए ही ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय का एजुकेशन विंग , मूल्य शिक्षा का प्रचार प्रसार, देश एवं विदेश में अपने विभिन्न सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर कर रहा है.

ज्ञातव्य हो कि मृत्युंजय भाई ब्रह्माकुमारीज के एजुकेशन प्रभाग के चेयरपर्सन हैं. मृत्युंजय भाई ने विभिन्न टीचर्स, प्रिंसिपल एवं शिक्षा से संबंधित एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, कि आज का मनुष्य विकास जरूर कर रहा है लेकिन उसका विकास , विध्वंस की दिशा में किया जा रहा है. तरह के सैनिक शस्त्र एवं तकनीके विकसित की जा रही हैं कि कैसे जल्दी-जल्दी, ज्यादा से ज्यादा विध्वंस किया जा सके. आज के समय में डिप्रेशन, धोखाधड़ी, लालच, हिंसा, आपसी वैमनस्य आदि बढ़ते जा रहे हैं. आज का मनुष्य रक्षक से भक्षक की ओर विकास कर रहा है. यह मनुष्य का विकास नहीं, मनुष्य की विध्वंसकारी प्रवृत्ति विकास हो रहा है.आज झूठ बोलना भी एक अधिकार के रूप में माना जाने लगा है. ऐसे समय में मनुष्य को पुनः उसके देवी गरिमा में स्थापित करना, पुनः उसको उसके मानवीय मूल्यों की स्मृति दिलाना, यह हम शिक्षाविदों का ही कार्य है और इसी के लिए ब्रह्माकुमारीज विश्वविद्यालय मूल्य शिक्षा के द्वारा पूरे विश्व में वास्तविक शिक्षा, मूल्य शिक्षा का प्रचार प्रसार कर रहा है. विभिन्न शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोग जीवन में बहुत कुछ सीखते हैं और जीवन भर सीखते-सिखाते रहते हैं, लेकिन मेरा अनुरोध है कि अपने जीवन में योग को भी स्थान दें. क्योंकि योग के द्वारा ही मनुष्य को अपने वास्तविक व्यक्तित्व का , अपने अंतर मन की सच्चाई का एहसास होता है, स्वयं के मानव होने का सच्चा एहसास हो जाता है. आप शिक्षक ही आने वाली पीढ़ी के लिए रोशनी दिखाने का माध्यम बनते हैं. इसके लिए हमें जरूरत है कि हम अपने अंतर मन के अंदर के संकल्पों पर भी ध्यान देना सीखें, जो की कोई और नहीं देख पाता है और ऐसा योग के माध्यम से ही संभव है.
अंत में स्वर्णलता दीदी ने योग का प्रयोग कराया और सभी को प्रसाद वितरण किया गया.
शीला मिश्रा , डीन फैकल्टी ऑफ साइंस, राकेश डेप्युटी इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल एवं एसपी सिंह , पूर्व वाइस चांसलर, लखनऊ विश्वविद्यालय उपस्थित रहे.



