ऑटिस्टिक बच्चों को सिखाने के लिये विजुअल लर्निंग्स भी कारगर : डॉ. जागृति सिंह

कानपुर। हर 68 बच्चों में एक बच्चा ऑटिज्म से प्रभावित होता है। ऑटिज्म एक न्यूरो डेवलपमेंट डिसऑर्डर है, जिसके कारण बच्चों का व्यवहार प्रभावित होता है। ऑटिस्टिक बच्चे सामान्य जीवन जी सके, इसके लिए खास तरह से उन्हें सिखाने की जरूरत होती है। यह बात वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे के मौके पर चाइल्ड रिहैब एक्सपर्ट एंड काउंसलर डॉक्टर जागृति सिंह ने कही। उन्होने ऑटिस्टिक बच्चों को सिखाने के सरल तरीकों के बारे में भी जानकारी दी।

डॉ. जागृति सिंह ने बताया कि कुछ ऑटिस्टिक बच्चों को पढ़ाकर सिखाने के बजाय विजुअल लर्निंग्स का इस्तेमाल किया जा सकता हैं। आस-पास की चीजों के चित्र को बच्चों को दिखाएं और समझाएं। ऐसे बच्चे को मौखिक निर्देश समझ नहीं आएंगे और बच्चे बातें सुनना पसंद भी नहीं करेंगे। आप चित्र या विजुअल पिक्चर्स की मदद ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि सभी ऑटिस्टिक बच्चे एक जैसे नहीं होते हैं। कुछ ऑटिस्टिक बच्चों को चित्र देखने के बजाय सुनकर समझने में ज्यादा अच्छा लगता है। ऑटिस्टिक ऑडिटरी लर्नर्स को आप इंटरेक्टिव डिस्कसन, आडियोबुक, स्पोकन इंस्ट्रक्शन आदि की मदद से समझा या सिखा सकते हैं। ऐसे बच्चों को चित्र देखने में कोई खास दिलचस्पी नहीं रहती है।
चाइल्ड रिहैब एक्सपर्ट डॉ. जागृति सिंह ने कहा कि कुछ ऑटिस्टिक बच्चे ऐसे होते हैं जिन्हें आप हाथों की गति या फिर हाथों से सीखने वाले एक्सपीरियंस अच्छे लगते हैं। इसकी मदद से वह कोई भी चीज आसानी से सीख सकते हैं। आपके बच्चों के सीखने की पसंद के बारे में समझना चाहिए और फिर ऑटिस्टिक बच्चों को सीखना चाहिए। हाथों के मूवमेंट या फिर किसी चीज को टच करके सीखने की प्रवृत्ति भी ऑटिस्टिक बच्चों में होती है। ऐसे बच्चों को चीजों को टच कर कर भी उसकी जानकारी दे सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें अपने आसपास की चीजों के बारे में जानकारी मिलेगी।



