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बच्चों को मिली अवसर पहचानने की सीख

दादी नानी की कहानी :

लखनऊ। अवसर को पहचानना जरुरी है। इसके लिए आंख और दिमाग खुला रखना चाहिए। यह संदेश शनिवार को पलटन छावनी स्थित प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय के बच्चों को मिली। लोक संस्कृति शोध संस्थान की श्रृंखला दादी नानी की कहानी कार्यक्रम में स्टोरीमैन जीतेश श्रीवास्तव ने बच्चों को प्रेरक कहानी सुनाई।

बोध कथा का आरंभ एक गांव से होता है जहां पेड़ के पास बैठकर एक साधु निरन्तर साधना करते थे। अतिवृष्टि और बाढ़ के कारण लोग सुरक्षित स्थान की ओर जाने लगे किन्तु साधु ने कहा कि मुझे भगवान बचाएगा। बाढ़ में डूबकर साधु की मृत्यु हो गई। उसकी आत्मा ने ईश्वर से शिकायत की तो उन्होंने कहा कि मैं तीन बार रुप बदलकर तुम्हें बचाने आया था पर तुमने नहीं पहचाना। संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने बताया कि कहानी के पहले बच्चों को उच्चारण शुद्धि हेतु टंग ट्वीस्टर देकर दुहराने को कहा गया। बच्चों ने कहानी पर आधारित प्रश्नों के उत्तर भी दिये। इसके साथ ही प्राथमिक विद्यालय का वार्षिकोत्सव भी मनाया गया। माही, गुनगुन, कामिनी, रंजना, संध्या, नैनशी, नैना, गौरी, पलक आदि ने नृत्य प्रस्तुतियां दीं।

इस अवसर पर संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार शम्भूशरण वर्मा, डा. एस.के.गोपाल, प्राथमिक विद्यालय, छावनी मड़ियांव की इंचार्ज अध्यापिका प्रतिज्ञा चतुर्वेदी, सहायक अध्यापिका रनिता श्रीवास्तव, सहयोगी प्रीति, शीबा, आकृति, पूर्व माध्यमिक विद्यालय छावनी मड़ियांव की इंचार्ज अध्यापिका सुमन कनौजिया, सहायक अध्यापिका सरिता मिश्रा, अनुदेशक पुनीत सोनकर आदि उपस्थित रहे।

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