‘पंजाबी और हिन्दी भाषा की साहित्यिक यात्रा उसकी विविधता और समग्रता का परिचायक है’
उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी तथा खुन-खुन जी गर्ल्स पी जी कॉलेज के संयुक्त संयोजन से संगोष्ठी का आयोजन किया गया

लखनऊ : उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी तथा खुन-खुन जी गर्ल्स पी जी कॉलेज के संयुक्त संयोजन से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका विषय “हिंदी व पंजाबी भाषाओं का संरक्षण और प्रोत्साहन” रहा।
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में लुआकटा अध्यक्ष प्रो. मनोज पांडे, आईटी कॉलेज हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. नीतू शर्मा हिंदी विभाग, अवध गर्ल्स पी जी कॉलेज हिंदी विभाग प्रो. रेखा गुप्ता, शिक्षाविद विनय प्रकाश मिश्रा, सुधा मिश्रा एवं प्राचार्य अंशु केडिया ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शूरुआत की। प्राचार्य प्रो अंशु केडिया ने अतिथि वक्ताओं को अंग वस्त्र एवं प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया।
प्रो. नीतू शर्मा ने कहा कि पंजाबी साहित्य का एक महत्वपूर्ण पक्ष उसमें निहित लोककथाएँ और वीर गाथाएँ हैं। ये रचनाएँ न केवल मनोरंजन प्रदान करती हैं, बल्कि पंजाबी संस्कृति और जीवन के विभिन्न पहलुओं का गहन विचार भी प्रस्तुत करती हैं। इसके अतिरिक्त, समकालीन पंजाबी साहित्य ने विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो सामाज का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब बनता है। पंजाबी भाषा की साहित्यिक यात्रा उसकी विविधता और समग्रता का परिचायक है, जो उसे कलात्मक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
प्रो. रेखा गुप्ता ने बताया कि पंजाबी और हिन्दी साहित्य ने अपने आप में अनगिनत उत्कृष्ट कृतियों का निर्माण किया है। इस साहित्य का प्रारंभिक चरण 11वीं शताब्दी में सिद्ध संतों द्वारा कृतियों की रचना से हुआ, जिनमें ‘भक्तों’ की कविताएँ शामिल हैं। समय के साथ-साथ, इस भाषा के साहित्य में न केवल धार्मिक बल्कि प्रेम, समाज, और संस्कृति के विषयों पर आधारित रचनाएँ भी शामिल हो गईं। प्रमुख लेखकों में भाई गुरदास, शहेनशाह वाणी, और अमृता प्रीतम शामिल हैं, जिनकी कविताएँ और कहानियाँ आज भी पाठकों को आकर्षित करती हैं।
प्रो मनोज पांडे ने कहा कि देश की उन्नति तभी संभव है जब हम अपना विकास अपनी भाषा में करेंगे क्योंकि आज के समय जितने भी विकसित देश हो चाहे वह चीन या जापान, सबने अपना विकास अपनी भाषा में ही किया है ।
शिक्षाविद विनय प्रकाश मिश्रा ने बहुत ही सशक्त और रोचक अंदाज में हिंदी और पंजाबी भाषा का महत्ता को स्पष्ट करते हुए बताया कि हमें भाषा को नहीं, भाषा बोलने वाले का संवर्धन करना है क्योंकि हिंदी एक बहुत ही प्रांजल और परिष्कृत भाषा है तथा सभी भाषाओं का आधार है हिंदी हमारी परिचारिका तथा मां के समान है इसलिए हमें उसके प्रति सम्मान का भाव रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है
कार्यक्रम की संयोजिका सुधा मिश्रा ने बताया कि हिन्दी और पंजाबी भाषा हमारी देश की साहित्य धरोहर हैं जिसमें साहित्यकारों ने समाज को जन जागृत करने का कार्य किया।



