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कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा “मस्जिद में जय श्री राम” के नारे वाले मामले को खारिज किया जाना उन सभी जिहादियों और सेकुलर ब्रिगेड के नेताओं को मुंह पर गहरा तमाचा है जो कि “जय श्री राम” नाम से चिढ़ते हैं : विनोद बंसल

मस्जिद के अंदर "जय श्री राम" कहने से धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होतीं : न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना

नई दिल्ली : कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के दो लोग (कीर्थन कुमार और सचिन कुमार) पिछले साल एक मस्जिद में घुस गए थे और जय श्री राम के नारे लगाए थे। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने उन पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

इस मामले में दोनों आरोपियों ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने दोनो लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इससे किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंची है और न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने दक्षिण कन्नड़ जिले के निवासी कीर्थन कुमार और सचिन कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ट्विटर हैंडल X पर लिखा कि यह कैसा दुर्भाग्य है कि अभी तक कुछ लोगों द्वारा श्री राम जन्मभूमि और राम मंदिर का विरोध होता था, अब राम के नाम का भी विरोध इसी भारत में होने लग गया!! राम के इस देश में कुछ लोगों ने जैसे ‘श्री राम’ को ही प्रतिबंधित कर दिया हो !
जगह-जगह मस्जिदें क्या बन गईं, जैसे कि वे राम द्रोह के अड्डे हो गए हों! मस्जिद, मदरसों या मुस्लिम बाहुल्य बस्तियों में यदि किसी ने गलती से भी #जय_श्री_राम‌‌ बोल दिया तो जैसे उसने बहुत बड़ा अपराध कर दिया हो! सामने वालों को जैसे उस रामभक्त पर घातक हमले और हत्या का लाइसेंस मिल गया हो!
एक मस्जिद में ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने के मामले में, अभी हाल ही में, माननीय कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय उन सभी जिहादियों और सेकुलर ब्रिगेड के नेताओं को मुंह पर गहरा तमाचा है जो कि जय श्री राम से चिढ़ते हैं या उसे एक सांप्रदायिक चश्मे से देखते हैं।

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