ऋण वसूली के लिए रेलवे के सेवानिवृत अधिकारी को परिवार समेत हीरो हाउसिंग कंपनी ने घर से निकाला
प्रशाशन मौन

लखनऊ : दो हफ्ते पहले का केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का संसद का वह बयान सभी को याद होगा जिसमें उन्होंने ऋण वसूली के लिए अमानवीय तरीकों को अपनाने से बचने का निर्देश कंपनियों को दिया है।घटना 22 जून 2023 सरोजनी नगर तहसील मे 2/160 रश्मी खण्ड 2 शारदा नगर लखनऊ की है। आरोप है कि निर्मला सीताराम की निर्देश को ताक पर रखते हुए दोपहर 12:30 से 1 के बीच हीरो हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने ऋण वसूली के नाम पर दो बुजुर्गों जिसमें (एक हार्ट पेशेंट समीर नंदन उम्र 74 साल सेवानिवृत रेलवे अधिकारी ) और एक कैंसर पेशेंट ( श्रीमती पुष्पा नंदन उम्र 70 साल) है दो ऑटिस्टिक बच्चों ( उम्र 5 साल और 7 साल)और बच्चो की माता को 15 मिनट के अंदर अमानवीय तरीके से घर से बाहर निकालते हुए घर पर कब्जा कर लिया। ना ही उनको ठीक से कपडे पहनने दिया गये ना दवाइयां लेने दी गई ,यहाँ तक कि गृह स्वामी जो की रेलवे के रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारी हैं और हार्ट पेशेंट भी हैं उनके हाथ से शर्ट भी छीन कर फेंक दी गयी और ना हीं पहनने दी जबकि वह ऋण धारक ना होकर मात्र गारंटर थे। ऋण धारक मनीष नंदन का आरोप है की एडीएम ट्रांस गोमती के आदेश में यह साफ-साफ लिखा है कि 15 दिन की नोटिस मकान खाली करने की दी जाएगी और सामान की सूची बनाकर सामान परिवार को सौपा जाएगा जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ यहाँ तक कि पंचनामा भी तैयार नहीं किया गया और यह सब प्रशासन एवं पुलिस की मौजूदगी में हुआ। मनीष नंदन का ये कहना है कि जब कंपनी के गुंडे घर पर कब्जा करने आए तो उस वक्त वह घर पर उपस्थित नहीं थे अपना फोन घर पर चार्जिंग में लगा कर पास बाजार में सामान लेने गए थे , छोटे भाई जोकि ऋण में सह धारक है वह भी घर पर उपस्थित नही थे । ना कंपनी के लोग ,ना पुलिस किसी ने भी उन्हें सूचना देने की जरूरत नही महसूस की । जिलाधिकारी कार्यालय मे शिकायत किए जाने पर एक तरफा जांच की खानपूर्ति करके शिकायत निरस्त कर दी गई जबकी आरोपी कंपनी डीआरटी कोर्ट में ना इन्वेंटरी लिस्ट जमा कर पाई और ना किसी भी सवाल का कोई जवाब दिया। यहां तक कि 31 जुलाई 2023 के डीआरटी कोर्ट के ऑर्डर में यह साफ-साफ लिखा है कि 8 अगस्त 2023 तक कंपनी को ऋण धारकों का पूरा सामान वाप
स करना होगा जिस पर कंपनी ने अमल नहीं किया। ऋण धारक मनीष नंदन का कहना है कि हीरो हाउसिंग फाइनेंस से उन्होने जून 2019 मेँ 69,67,000/- का लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी लिया था जो कि पिछले साल जुलाई में एनपीए हो गया ,इसके कारण वह कोरोना काल में काम बंद होना और कंपनी द्वारा ऋण की किस्त 94,600 से बढा कर ₹1,12,000 करना और ऋण ब्याज दर 12.50 प्रतिशत से बढा कर 15 प्रतिशत करना है। कोरोना लॉकडाउन के उपरांत कंपनी द्वारा काम को बढ़ाने के लिए किसी तरह की कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई जबकि सरकार द्वारा सभी सरकारी एवं गैर सरकारी बैंक और एनबीएफसी को यह आदेश था कि सभी छोटे और बड़े व्यापारियों को फिर से काम जमाने के लिए 20 से 25% ऋण बढा कर दिया जाए।

कंपनी द्वारा किये गये इस अमानवीय घटनाक्रम और प्रशासन के मौन से ये परिवार सडक पर आ गया है जिससे इस परिवार का सम्मान भी तार तार हो गया है। दिनांक 29 अगस्त को कंपनी ने नीलामी की तिथि निकली है
जिस पर मनीष नंदन का आरोप है की कंपनी वाले भू माफियाओं के साथ मिलीभगत करके दो करोड़ की संपत्ति एक करोड़ में नीलाम करने जा रहे हैं । मनीष नंदन का ये आरोप है की ना पुलिस एफ ई आर लिख रही है ना प्रशाशन कोई बात सुन रहा है अब सिर्फ न्यायालय का ही आसरा है।

परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के तुरंत हस्तक्षेप करके नीलामी रुकवाने की मांग करते हुए गलत तरीके से लिये गये कब्जे को वापस करने की प्रार्थना की है।



