सतीश उपाध्याय ने “Global Food Security Summit 2023” में भाग लिया

नई दिल्ली : “Food Banking” के बारे में जागरूकता बढ़ाने और “Food Security” को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर भोजन की हानि और भोजन की बर्बादी को कम करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका के उद्देश्य से, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के उपाध्यक्ष श्री सतीश उपाध्याय ने “Global FoodBanking Network” और “ThinkThrough Consulting” द्वारा डॉ.अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, जनपथ रोड, नई दिल्ली में “Global Food Security Summit 2023” में भाग लिया ।
इस दो-दिवसीय समिट का
उद्घाटन करने के बाद सभा को संभोधित करते हुए, उपाध्याय ने कहा कि “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत” अर्थात् सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े, यह भारतीय संस्कृति का भाव है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का यही भाव है, और भारतीय संस्कृति, भारतीय लोकाचार हम सभी को यही सिखाती है।

उन्होंने कहा कि हम माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जी20 सम्मेलन का आयोजन भारत में कर रहे हैं, और जी20 का लोगो “वासुदेव कुटुम्बकम्” और स्लोगन “One Earth, One Family, One Future ” भी यही भाव प्रकट करता है । उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ‘अंत्योदय’ पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि हम समाज में सबसे आखिरी व्यक्ति के उत्थान और विकास को सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि भारत के दृष्टिकोण से भारत के अंतिम छोर पर खड़ा हुआ व्यक्ति है, जिसके पास खाने का अन्न नहीं है, रहने के लिए स्थान नहीं है, सामाजिक समानता नहीं है, उन सभी को समान वर्ग में लाने की जरूरत है, और अगर मैं ऐसा ग्लोबली कहूं तो भारत ही है जो इस ‘अंत्योदय’ के भाव को लेकर सभी को बराबरी के स्तर तक पहुंचा सकता है और जी20 के माध्यम से भारत यह संदेश दे रहा है। उन्होंने कहा की कोरोना काल में अन्य देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराकर भारत ने अपना यही भाव प्रकट किया ।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने भी कहा है कि “समानता” होनी चाहिए और मेरा कहना है की “समानता” तो होनी चाहिए, परंतु “समरसता” भी होनी चाहिए। समरसता में एक भाव है जिसमें ममता है, एक-दूसरे की देखभाल है, सहभागिता है क्यूकि यहाँ पर हम विश्व स्तर पर सस्टेनेबिलिटी की बात कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की विचारधारा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” हमारे हर लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये बहुत महत्वपूर्ण है और आज वैश्विक खाद्य सुरक्षा शिखर सम्मेलन का विषय है वो है हमारी मानसिकता, मन-प्रक्रिया को दर्शाता है । उन्होंने कहा कि किसान अपने श्रम से फसलें उगाता है, उसे एक मुट्ठी चावल, एक मुट्ठी गेहूं अनाज पैदा करने में चार महीने लगते हैं और वही अनाज पूरे देश के लोगों की भूख को शांत करता है। जिन लोग के पास ज्यादा है, वह उस अनाज को ऐसे ही फेंक देते हैं जो की किसानों के साथ अन्याय है उनके श्रम का अनादर है ।
उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के माध्यम से देशवासियों से भोजन की बर्बादी रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि खाना फेंकना समाजद्रोही के समान है। वास्तव में भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए किसी कानून की नहीं, बल्कि लोगों में व्यक्तिगत तथा सामाजिक चेतना का विकास होना जरूरी है। सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने नागरिकों के पेट को भरे, इसे सुनिश्चित कराए परन्तु नागरिकों का कर्तव्य है कि सरकार की पहल में अपनी भागीदारी निभाएं और अनाज का सदुपयोग करे।
इस अवसर पर आयोजको को बधाई देते हुए, श्री उपाध्याय ने कहा कि “Global Food Security Summit 2023” हमारे लिए विचार-विमर्श, चर्चा और रणनीति तैयार करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है जो एक ठोस अंतर लाएगा “Global FoodBanking Network” और “ThinkThrough Consulting” का मिशन एक ऐसी दुनिया बनाना है जहां हर कोई भोजन की बर्बादी को कम करने और स्थिरता को बढ़ावा देते हुए सक्रिय और स्वस्थ जीवन जीने के लिए पर्याप्त पौष्टिक भोजन प्राप्त कर सके।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आकर्षक सत्रों, व्यावहारिक कार्यशालाओं और सहयोगात्मक संवादों के माध्यम से, हम एक ऐसे वातावरण को बढ़ावा देने की आकांक्षा रखते हैं जो नवाचार और साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा । उन्होंने कहा कि दुनिया भर में खाद्य बैंकों का समर्थन करके और भोजन की बर्बादी को कम करना आज के समय की मांग है।
इस अवसर पर, वीवीआईपी, प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति, ग्लोबल मैनेजिंग पार्टनर-थिंकथ्रू कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष और सीईओ लेफ्टिनेंट, विदेशी प्रतिनिधियों आदि ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया।
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